भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों के लिए श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। योजना लागू होने के बाद चयनित विद्यार्थियों को हर महीने ₹7,500 की आर्थिक सहायता मिलेगी। सवाल यह है कि इस राशि का फायदा किन बच्चों को मिलेगा और चयन की शर्तें क्या होंगी?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस योजना में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि NEET, JEE और CLAT जैसी प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग फीस भी शामिल होगी। योजना का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजे जाने की तैयारी है।
असली सवाल— किसे मिलेगा ₹7,500 का फायदा?
श्री मेधा योजना हर विद्यार्थी के लिए नहीं होगी। इसका लाभ उन्हीं बच्चों को मिलेगा जिनके माता या पिता पंजीकृत निर्माण श्रमिक हैं और निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं। सबसे पहले श्रमिक का मंडल में पंजीयन जरूरी होगा। यह पंजीयन कम से कम तीन साल पुराना होना चाहिए। इसके अलावा श्रमिक के 90 दिन काम करने की शर्त भी रखी गई है। विद्यार्थी की उम्र आवेदन के समय 14 से 19 वर्ष के बीच होनी चाहिए। साथ ही वह मध्यप्रदेश बोर्ड या सीबीएसई का नियमित छात्र होना चाहिए।
10वीं में 80 प्रतिशत अंक जरूरी
योजना में सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक पढ़ाई से जुड़ी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विद्यार्थी के लिए 10वीं कक्षा में कम से कम 80 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे। यानी सिर्फ श्रमिक परिवार से होना पर्याप्त नहीं होगा। बच्चे को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता भी पूरी करनी होगी।
हर महीने ₹7,500, लेकिन खर्च कहां होगा?
योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी आर्थिक सहायता है। श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के अनुसार चयनित विद्यार्थियों को ₹7,500 हर महीने दिए जाएंगे। यह राशि केवल सामान्य छात्रवृत्ति की तरह नहीं होगी। जानकारी के अनुसार इसका उपयोग कई शैक्षणिक जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।
इसमें शामिल हैं:
- ट्यूशन फीस
- किताबों का खर्च
- हॉस्टल का खर्च
- NEET कोचिंग फीस
- JEE कोचिंग फीस
- CLAT कोचिंग फीस
यानी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए भी इस योजना से मदद मिलने का प्रस्ताव है।
पहले चरण में कितने बच्चों को मिलेगा लाभ?
योजना को शुरुआती दौर में सीमित संख्या के साथ शुरू करने की तैयारी है। जानकारी के अनुसार पहले चरण में 600 बच्चों को लाभ दिया जाएगा। इनमें 500 बच्चे भवन सन्निर्माण बोर्ड से और 100 बच्चे श्रमिक कल्याण बोर्ड से लिए जाने की बात कही गई है। सरकार की ओर से इसे शुरुआती तौर पर ट्रायल के रूप में लागू करने की जानकारी दी गई है। परिणाम अच्छे रहने पर आगे लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
चयन में भी है खास नियम
श्री मेधा योजना में चयन सामान्य तरीके से नहीं बल्कि मेरिट के आधार पर किए जाने की जानकारी है।
- एमपी बोर्ड और सीबीएसई विद्यार्थियों की संयुक्त मेरिट बनेगी।
- हर साल अधिकतम 500 विद्यार्थियों के चयन की बात है।
- कुल सीटों में 20 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित रहेंगी।
- छात्राओं के लिए अधिकतम 100 सीटें हो सकती हैं।
- सामान्य जिलों से अधिकतम 15 विद्यार्थियों का चयन होगा।
- भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों से 40-40 विद्यार्थी चुने जा सकते हैं।
एक और महत्वपूर्ण शर्त है। एक पंजीकृत श्रमिक के अधिकतम दो बच्चे ही इस योजना का लाभ ले सकेंगे।
पहले से दूसरी छात्रवृत्ति ले रहे हैं तो क्या होगा?
यहां भी सरकार ने एक अहम शर्त रखी है। जानकारी के अनुसार जो बच्चा पहले से मंडल की किसी दूसरी छात्रवृत्ति का लाभ ले रहा है, उसे श्री मेधा योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए पात्र विद्यार्थी के लिए यह देखना जरूरी होगा कि वह पहले से किसी अन्य संबंधित छात्रवृत्ति का लाभ तो नहीं ले रहा है।
12वीं में भी 75 प्रतिशत अंक जरूरी
योजना में चयन के बाद भी विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई जारी रखनी होगी। जानकारी के अनुसार 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। इसके अलावा हर साल निर्धारित समय पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। केवल शुरुआत में चयन हो जाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आगे भी योजना की शर्तें पूरी करनी होंगी।
पैसा सीधे जारी होगा या पहले निगरानी होगी?
योजना में भुगतान को लेकर भी निगरानी की व्यवस्था प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार पहला भुगतान छह महीने बाद किया जाएगा। इसके बाद हर छह महीने में मेंटर की रिपोर्ट देखी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर अगली राशि जारी की जाएगी। हर जिले में कलेक्टर एक मेंटर नियुक्त करेंगे। यह मेंटर अधिकारी, समाजसेवी या शिक्षाविद हो सकता है। मेंटॉर विद्यार्थी की पढ़ाई और करियर को लेकर मार्गदर्शन करेगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि योजना के तहत मिलने वाली राशि का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।
आवेदन कब से शुरू होंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल आवेदन की तारीख को लेकर है। जानकारी के मुताबिक, योजना का ड्राफ्ट तैयार है और इसे गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजा जाना है। सरकार इसे इसी साल लागू करने की तैयारी में है। हालांकि ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की सटीक तारीख नहीं दी गई है। आवेदन की तारीख मंडल के पोर्टल पर जारी किए जाने की बात कही गई है। इसलिए अभी पात्र विद्यार्थियों और अभिभावकों को आधिकारिक पोर्टल पर जारी होने वाली सूचना का इंतजार करना होगा।
आवेदन सिर्फ ऑनलाइन होगा
योजना में आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। विद्यार्थी को आवेदन के साथ संबंधित कक्षा की अंकसूची जमा करनी होगी। प्रधानाचार्य से सत्यापित अंकसूची भी आवश्यक होगी। इसके अलावा APAAR ID, ई-केवाईसी वाली समग्र ID, मोबाइल नंबर और ई-मेल की जानकारी देनी होगी। श्रमिक की ओर से ई-केवाईसी समग्र ID, बैंक पासबुक और शपथ पत्र जैसे दस्तावेज मांगे जाएंगे।
16 लाख से ज्यादा श्रमिकों तक पहुंचने की संभावना
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में ई-केवाईसी करा चुके पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की संख्या 16 लाख 658 है। इनमें सिंगरौली में 85,886, भिंड में 70,160, जबलपुर में 67,525 और ग्वालियर में 66,115 पंजीकृत श्रमिक बताए गए हैं। सागर, बालाघाट और झाबुआ में भी बड़ी संख्या में श्रमिक पंजीकृत होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में योजना भले ही शुरुआत में सीमित बच्चों से शुरू हो, लेकिन इसका संभावित दायरा काफी बड़ा हो सकता है।
मंत्री ने इसे बताया खास पहल
श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के अनुसार, श्रमिकों के बच्चे मेधावी होने के बावजूद कई बार संसाधनों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते। इसी समस्या को ध्यान में रखकर योजना तैयार की गई है। मंत्री के अनुसार यह शुरुआत एक प्रयोग के तौर पर की जा रही है और सफल होने पर इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है। उनके अनुसार, ऐसी योजना शुरू करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य है। इसकी जानकारी अन्य राज्यों के साथ साझा करने की भी बात कही गई है।
मुंबई की राष्ट्रीय बैठक में भी होगी चर्चा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 11 और 12 तारीख को मुंबई में राष्ट्रीय स्तर की बैठक होने वाली है, जिसमें विभिन्न राज्यों के श्रम मंत्री शामिल होंगे। मध्य प्रदेश इस बैठक में श्री मेधा योजना की जानकारी साझा करेगा। बैठक में श्रमिकों और उनके परिवारों की बेहतरी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की भी जानकारी है।
श्री मेधा योजना की पूरी तस्वीर एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना | श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना |
| लाभार्थी | निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चे |
| मासिक सहायता | ₹7,500 |
| शुरुआती लाभार्थी | 600 बच्चे |
| प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं | NEET, JEE, CLAT |
| उम्र | 14 से 19 वर्ष |
| 10वीं में अंक | कम से कम 80% |
| 12वीं में अंक | कम से कम 75% |
| आवेदन | केवल ऑनलाइन |
| छात्राओं के लिए आरक्षण | 20% |
| एक श्रमिक के बच्चों की सीमा | अधिकतम 2 |
अब सबसे जरूरी बात क्या है?
श्री मेधा योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आर्थिक सहायता देने का है। ₹7,500 मासिक सहायता और NEET, JEE व CLAT की कोचिंग फीस शामिल होना इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। लेकिन अभी योजना के अंतिम लागू होने और आवेदन शुरू होने की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। इसलिए पात्रता रखने वाले विद्यार्थियों को आधिकारिक अधिसूचना और मंडल के पोर्टल पर जारी होने वाली जानकारी का इंतजार करना होगा।
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