नीमच। जिले में आर.बी.एस.के. योजना के प्रभावी क्रियान्वयन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही दिशा में काम किया जाए तो प्रशासनिक पहल सीधे लोगों की जिंदगी बदल सकती है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर चल रहे अभियान के तहत दो मासूम बच्चों को जन्मजात विकृति से मुक्ति दिलाकर सामान्य जीवन की ओर लौटाया गया।
गांव-गांव सर्वे से मिली सफलता
कलेक्टर के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग ने आर.बी.एस.के. योजना के अंतर्गत गांव-गांव विशेष सर्वे अभियान चलाया। इस दौरान नीमच ब्लॉक के चंगेरा माता गांव की वंशिका चन्द्रावत (1 वर्ष) और गिरदौड़ा गांव के यश गायरी (6 माह) की पहचान हुई। दोनों बच्चे जन्म से क्लब फुट (तिरछे पैर) की समस्या से पीड़ित थे।
टीम ने तुरंत परिजनों को जानकारी दी और उन्हें जिला चिकित्सालय पहुंचने के लिए प्रेरित किया। आर.बी.एस.के. योजना के तहत समय पर हस्तक्षेप ही इस सफलता की सबसे बड़ी वजह बना।
हर गुरुवार को मिलता है विशेष उपचार
जिला चिकित्सालय नीमच के डीईआईसी सेंटर में हर गुरुवार को विशेष क्लिनिक आयोजित किया जाता है। यहां आर.बी.एस.के. योजना के अंतर्गत क्लब फुट से ग्रसित बच्चों का परीक्षण और इलाज किया जाता है।
वंशिका और यश को भी नियमित रूप से यहां लाया गया। डॉक्टरों ने उनका चरणबद्ध इलाज किया और उन्हें करेक्टिव शूज उपलब्ध कराए गए, जो पूरी तरह निशुल्क थे।
लगातार फॉलोअप से बदली जिंदगी
कुछ महीनों तक निरंतर उपचार और परिजनों के सहयोग से अब दोनों बच्चों के पैर पूरी तरह सीधे हो चुके हैं। पहले जहां चलना मुश्किल था, अब बच्चे सामान्य जीवन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
परिजनों ने बताया कि वे हर हफ्ते बच्चों को डीईआईसी सेंटर लाते थे और आर.बी.एस.के. योजना के तहत उन्हें कोई खर्च नहीं उठाना पड़ा। यह योजना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं रही।
परिजनों ने जताया आभार
बच्चों की माताओं बुलबुल चन्द्रावत और मंजू गायरी ने कहा कि अगर समय पर आर.बी.एस.के. योजना का लाभ नहीं मिलता, तो उनके बच्चे दिव्यांग हो सकते थे। अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए वरदान
आर.बी.एस.के. योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकृतियों, बीमारियों और विकास संबंधी समस्याओं का निःशुल्क इलाज किया जाता है। जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी कराई जाती है।
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को आर.बी.एस.के. योजना का लाभ मिले, इसके लिए विशेष अभियान जारी रखा जाए।
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