50 लाख की अफीम जब्त: नीमच में सीक्रेट खांचे से मिली खेप, नाम छिपाने पर उठे सवाल
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
16 अप्रैल 2026, (अपडेटेड 16 अप्रैल 2026, 11:05 पूर्वाह्न IST)

नीमच । मध्यप्रदेश के नीमच जिले में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। “प्रहार” अभियान के तहत नारकोटिक्स प्रकोष्ठ ने एक ट्रैवलर वाहन से 10 किलो 54 ग्राम अफीम जब्त कर तस्करी के एक संभावित बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है। इस पूरी कार्रवाई में बरामद अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 50 लाख रुपए आंकी गई है।

मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी, फिर हुआ बड़ा खुलासा

अधिकारियों को पहले से ही एक संदिग्ध वाहन की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने रणनीतिक तरीके से घेराबंदी कर सफेद रंग की ट्रैवलर गाड़ी को रोका। जब वाहन की तलाशी ली गई, तो शुरुआती जांच में कुछ खास नहीं मिला, लेकिन गहन निरीक्षण के दौरान एक बड़ा राज सामने आया।

जांच में पाया गया कि वाहन की पिछली सीट के ऊपर छत में एक बेहद चालाकी से तैयार किया गया गुप्त खांचा बनाया गया था। इसी खांचे में छिपाकर अफीम जब्त की गई। इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल दर्शाता है कि तस्कर लगातार नए और हाई-लेवल तरीके अपना रहे हैं।

तस्करी का तरीका: जांच एजेंसियों के लिए चुनौती

जिस तरह से इस मामले में अफीम जब्त हुई है, वह सामान्य तस्करी के मामलों से अलग है। आमतौर पर डिक्की या सीट के नीचे माल छिपाया जाता है, लेकिन यहां छत में सीक्रेट कंपार्टमेंट बनाना यह संकेत देता है कि यह काम पेशेवर और संगठित गिरोह द्वारा किया गया है।

इस तरह के मामलों में केवल वाहन चालक ही नहीं, बल्कि एक पूरी सप्लाई चेन सक्रिय होती है, जिसमें सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और रिसीवर तक शामिल होते हैं।

आरोपियों के नाम नहीं उजागर, बढ़ी शंका

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में अफीम जब्त होने के बावजूद आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ड्राइवर और सप्लायर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन उनकी पहचान अब तक गोपनीय रखी गई है। यह स्थिति सामान्य प्रक्रिया से अलग मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर इस तरह की कार्रवाई के बाद पुलिस आरोपियों का पूरा विवरण जारी करती है।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठने लगे हैं कि कहीं इस तस्करी के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट या प्रभावशाली नेटवर्क तो नहीं, जिसे बचाने का प्रयास किया जा रहा हो।

अधिकारियों का पक्ष: जांच पूरी होने तक गोपनीयता

नारकोटिक्स विंग के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक जब्ती नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की कड़ी हो सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, यदि जल्दबाजी में नाम उजागर किए गए तो इससे आगे की कार्रवाई और नेटवर्क तक पहुंचने में बाधा आ सकती है। हालांकि, इस तर्क के बावजूद पारदर्शिता को लेकर सवाल बने हुए हैं।

क्षेत्र में सक्रिय तस्करी नेटवर्क का संकेत

नीमच और आसपास के इलाके लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में अफीम जब्त होना यह संकेत देता है कि क्षेत्र में सक्रिय नेटवर्क अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

यदि इस मामले की गहराई से जांच की जाती है, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। इससे न केवल स्थानीय बल्कि राज्य स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई संभव हो सकती है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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