कोलकाता। बकरीद 2026 से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने पशु वध को लेकर बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि अब सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं की कुर्बानी नहीं दी जा सकेगी। नए निर्देशों के बाद बंगाल पशु वध अधिनियम पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध फिटनेस सर्टिफिकेट किसी भी पशु, मवेशी या भैंस का वध गैरकानूनी माना जाएगा।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पशु वध केवल नगर पालिका या स्थानीय प्रशासन द्वारा अधिकृत वधशालाओं में ही किया जा सकेगा। खुले इलाकों, सार्वजनिक स्थलों या अनधिकृत स्लॉटर हाउस में पशु वध पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर सख्ती से नियम लागू करने को कहा है।
26 मई को मनाई जाएगी बकरीद
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, 26 मई 2026 को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद मनाई जाएगी। हर साल इस अवसर पर पशुओं की कुर्बानी दी जाती है, लेकिन इस बार बंगाल पशु वध अधिनियम के तहत नए नियम लागू किए गए हैं। सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था, स्वच्छता और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था।
राज्य प्रशासन ने साफ कर दिया है कि त्योहार के दौरान केवल अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त वधशालाओं में ही पशु वध की अनुमति होगी। किसी भी प्रकार की सार्वजनिक कुर्बानी या अवैध पशु वध पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
फिटनेस सर्टिफिकेट के नियम हुए सख्त
नए आदेश के तहत फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त बना दिया गया है। अब केवल नगर पालिका अध्यक्ष या पंचायत समिति अध्यक्ष और सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी की संयुक्त सहमति के बाद ही प्रमाणपत्र जारी होगा।
बंगाल पशु वध अधिनियम के अनुसार, दोनों अधिकारियों को लिखित रूप में यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित पशु वध योग्य है। केवल वही पशु प्रमाणपत्र के लिए पात्र होंगे जो अत्यधिक वृद्ध हों, गंभीर चोट से अक्षम हों, विकृत हों या लाइलाज बीमारी से पीड़ित हों। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 14 वर्ष से कम आयु के स्वस्थ पशुओं को वध की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इससे अवैध पशु वध और फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
उल्लंघन करने पर होगी जेल और जुर्माना
सरकार ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बंगाल पशु वध अधिनियम के तहत अवैध पशु वध को गंभीर अपराध माना गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों को 6 महीने तक की जेल, 1000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती है।
इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति का फिटनेस सर्टिफिकेट आवेदन खारिज होता है तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के समक्ष अपील कर सकता है। इसके लिए अलग प्रशासनिक प्रक्रिया तय की गई है।
अवैध पशु व्यापार पर भी सरकार सख्त
राज्य सरकार ने पुलिस और प्रशासन को अवैध पशु व्यापार, अवैध बाजारों और अनधिकृत स्लॉटर हाउस के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से अवैध पशु व्यापार और अवैध वधशालाओं को लेकर शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।
सरकार का कहना है कि केवल लाइसेंस प्राप्त और कानूनी गतिविधियों को ही अनुमति दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों को त्योहार के दौरान विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
बंगाल पशु वध अधिनियम को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दल इस फैसले को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे पूरी तरह प्रशासनिक और कानूनी कदम कह रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है।
राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि त्योहार के दौरान कानून का पालन करें और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि से दूर रहें। प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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