जावद। नीमच जिले की जावद तहसील के मालगढ़ गांव में इन दिनों दहशत का माहौल बना हुआ है। गांव और आसपास के इलाकों में लगातार हो रहे तेंदुए का हमला अब ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। पिछले करीब एक महीने में तेंदुआ करीब 20 मवेशियों को अपना शिकार बना चुका है। लगातार हो रही घटनाओं के बाद गांव के लोग भय के साए में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ देर रात गांव में प्रवेश करता है और बाड़ों में बंधे पशुओं को उठाकर जंगल की ओर ले जाता है। कई बार लोगों ने उसकी आवाज और गतिविधियां भी देखी हैं, जिससे डर लगातार बढ़ता जा रहा है।
अंधेरा होते ही गांव में छा जाता है सन्नाटा
मालगढ़ में अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि शाम ढलते ही लोग घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। गलियां सुनसान हो जाती हैं और बच्चे भी बाहर खेलने नहीं निकलते। महिलाओं और बुजुर्गों में सबसे ज्यादा डर देखा जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर रात यह आशंका बनी रहती है कि कहीं तेंदुए का हमला किसी इंसान पर न हो जाए। कई परिवार अब रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। पशुपालकों ने भी अपने मवेशियों को खुले बाड़ों में बांधना बंद कर दिया है।
12 अप्रैल से शुरू हुआ हमला, अब तक 20 मवेशियों की मौत
ग्रामीण सुरेश पाटीदार के मुताबिक 12 अप्रैल को पहली बार गांव में तेंदुए का हमला हुआ था। उस रात एक गाय को तेंदुआ उठा ले गया। इसके बाद घटनाएं लगातार बढ़ती चली गईं। गांव के अलग-अलग हिस्सों से मवेशियों के शिकार की खबरें सामने आने लगीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग अब तक तेंदुए को पकड़ नहीं पाया है। यही वजह है कि लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है।
वन विभाग ने मांगी पिंजरा लगाने की अनुमति
पूरे मामले में उप वन मंडल अधिकारी दशरथ अखंड ने बताया कि मालगढ़ क्षेत्र में लगातार तेंदुए की गतिविधियां देखी जा रही हैं। विभाग की टीम गांव में गश्त कर रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
उन्होंने बताया कि तेंदुए का हमला रोकने के लिए शासन से पिंजरा लगाने की अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों से रात में अकेले बाहर नहीं निकलने की अपील की गई है।
हर रात डर के साए में गुजर रही जिंदगी
लगातार बढ़ते तेंदुए का हमला ने मालगढ़ गांव की सामान्य जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। गांव के लोग अब हर रात डर और अनिश्चितता के बीच गुजार रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग जल्द ठोस कार्रवाई करे, ताकि गांव में फिर से सामान्य माहौल लौट सके।
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