नीमच: जिले के सिंगोली इलाके में स्थित तिलस्वा घाट अब हादसों का ‘डेथ पॉइंट’ बनता जा रहा है। मंगलवार रात (26 मई) यहां एक तेज रफ्तार पिकअप अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस खौफनाक हादसे में 3 मजदूरों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि 3 अन्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
सबसे भयावह बात यह है कि मजदूर पिकअप में रखी पेंट की बाल्टियों पर बैठे थे। हादसे के बाद शवों पर पेंट बिखर गया, जिससे मंजर और भी दर्दनाक हो गया। साफ है कि स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है, क्योंकि महज 48 घंटे पहले ही इसी घाट पर एक बड़ा हादसा हुआ था।

पेंट की बाल्टियों पर बैठे थे मजदूर, ड्राइवर फरार
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 10 बजे एक पिकअप वाहन (RJ14-GN-6549) राजस्थान के धौलपुर से बांसवाड़ा की तरफ जा रहा था। गाड़ी में भारी मात्रा में पेंट की बाल्टियां लोड थीं। नियमों को ताक पर रखकर मजदूरों को इन्हीं बाल्टियों के ऊपर बिठाया गया था।

जैसे ही पिकअप तिलस्वा घाट के खतरनाक और अंधेरे मोड़ पर पहुंची, ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया। वाहन सीधे गहरी खाई में जा गिरा। बाल्टियां फटने से सारा रंग मजदूरों के शवों और घायलों पर गिर गया। रात के अंधेरे और रंग से सने होने के कारण बचाव कार्य में भी भारी दिक्कत आई। घटना के तुरंत बाद लापरवाह ड्राइवर मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
घायल कोटा रेफर, यूपी और राजस्थान के थे मजदूर
हादसे की सूचना मिलते ही सिंगोली थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा और तहसीलदार प्रेमशंकर पटेल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। राहगीरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और शवों को खाई से निकालकर सिंगोली अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया।

मृतक और घायल: ये सभी मजदूर बरेली (उत्तर प्रदेश), गाजीपुर और जयपुर (राजस्थान) के रहने वाले थे। ये सभी आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे।
घायलों की स्थिति: गंभीर रूप से घायल मोहम्मद जाकिर (40), इदरीस और सोमपाल को सिंगोली अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद रातों-रात कोटा रेफर कर दिया गया है। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
प्रशासनिक विफलता: 48 घंटे में दूसरा बड़ा हादसा
तिलस्वा घाट पर यह कोई पहला हादसा नहीं है। रविवार को ही इसी जगह पर शिव शक्ति ट्रेवल्स की एक यात्री बस पलट गई थी, जिसमें 30 यात्री घायल हुए थे। लगातार हो रहे इन हादसों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि घाट पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। स्थानीय नागरिक लंबे समय से क्रैश बैरियर, चेतावनी बोर्ड और गति सीमा तय करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन PWD और स्थानीय प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है। बिना क्रैश बैरियर के यह अंधा मोड़ सीधे तौर पर मौत को दावत दे रहा है। अगर रविवार के हादसे के बाद ही प्रशासन ने कोई अस्थायी बैरिकेडिंग की होती, तो शायद इन 3 मजदूरों की जान बच सकती थी।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. नीमच में पिकअप हादसा कहां और कब हुआ?
यह हादसा नीमच जिले के सिंगोली क्षेत्र में स्थित तिलस्वा घाट पर मंगलवार रात (26 मई) करीब 10 बजे हुआ।
2. नीमच तिलस्वा घाट हादसे में कितने लोगों की मौत हुई है?
इस दर्दनाक हादसे में 3 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई और 3 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
3. दुर्घटनाग्रस्त पिकअप में क्या भरा हुआ था?
पिकअप (RJ14-GN-6549) में पेंट (कलर) की बाल्टियां लोड थीं। मजदूर इन्हीं बाल्टियों के ऊपर बैठे हुए थे, जिसके कारण खाई में गिरने के बाद शव भी रंग से सन गए।
4. हादसे का शिकार हुए मजदूर कहां के रहने वाले थे और कहां जा रहे थे?
मजदूर मुख्य रूप से यूपी के बरेली, गाजीपुर और राजस्थान के जयपुर के रहने वाले थे। वे राजस्थान के धौलपुर से बांसवाड़ा एक आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे।
5. तिलस्वा घाट पर बार-बार हादसे क्यों हो रहे हैं?
घाट पर खतरनाक और अंधेरे मोड़ हैं। वहां न तो कोई क्रैश बैरियर (सुरक्षा दीवार) है और न ही गति सीमा के चेतावनी बोर्ड। प्रशासन की इसी लापरवाही के कारण दो दिन में यह दूसरा बड़ा हादसा है।
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