बस में बैठकर ससुराल के लिए निकली थी ज्ञानीबाई, 8 दिन बाद जंगल में मिला ऐसा सुराग जिसने सबको चौंका दिया
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
20 जून 2026, (अपडेटेड 20 जून 2026, 2:08 अपराह्न IST)

रामपुरा/नीमच। रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम सालरमाला की रहने वाली ज्ञानीबाई के मामले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। कई दिनों से लापता चल रही ज्ञानीबाई का कंकाल गांधीसागर क्षेत्र के जंगल में मिलने के बाद शनिवार को परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोगों ने नीमच-झालावाड़ मार्ग पर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया और मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।

घटना की जानकारी सामने आते ही गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक और नाराजगी का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो शायद ज्ञानीबाई की जान बचाई जा सकती थी।

12 जून को ससुराल के लिए निकली थी ज्ञानीबाई

परिजनों के अनुसार ज्ञानीबाई को 12 जून को राजस्थान के रावतभाटा स्थित ससुराल भेजने के लिए बस में बैठाया गया था। मृतका के पिता गोपाल पिता लिंबाजी ने बताया कि गांधीसागर क्षेत्र तक उनकी बेटी से मोबाइल पर लगातार संपर्क बना हुआ था।

उन्होंने बताया कि गांधीसागर पहुंचने के बाद अचानक मोबाइल बंद हो गया। इसके बाद परिवार ने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश शुरू की, लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिली। जब काफी प्रयासों के बाद भी ज्ञानीबाई का पता नहीं चला तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

पिता ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

मृतका के पिता गोपाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने शुरुआती दौर में ही पुलिस को एक संदिग्ध युवक का नाम और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी थी। उनका कहना है कि पुलिस को उपलब्ध कराए गए इन तथ्यों पर तत्काल और गंभीरता से कार्रवाई की जाती तो परिणाम अलग हो सकते थे।

पिता ने कहा कि परिवार लगातार पुलिस के संपर्क में था और बेटी की तलाश के लिए गुहार लगाता रहा, लेकिन जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी। उनका दावा है कि यदि समय रहते संदिग्धों से पूछताछ होती तो ज्ञानीबाई को बचाया जा सकता था।

हालांकि इन आरोपों पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जंगल में मिले कंकाल और सामान से हुई पहचान

पुलिस जांच के दौरान गांधीसागर क्षेत्र के समीप जंगल में एक स्थान से मानव कंकाल, कपड़े और पायल बरामद किए गए। बरामद सामान की पहचान परिजनों ने ज्ञानीबाई के रूप में की।

कंकाल मिलने की खबर फैलते ही गांव में मातम छा गया। परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल और बाद में प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए। लोगों का कहना है कि जिस तरह से यह मामला सामने आया है, उसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस ने बरामद साक्ष्यों को जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है और मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग

ज्ञानीबाई मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने नीमच-झालावाड़ मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों का कहना था कि यदि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं होगी तो आम लोगों का कानून व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ेगा। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भी बड़ी संख्या मौजूद रही। कुछ समय तक मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की कतारें लग गईं।

प्रशासन ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों और परिजनों से चर्चा कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता से की जा रही है। उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी तथा दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की और मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया।

जांच जारी, पूरे क्षेत्र की निगाहें पुलिस कार्रवाई पर

फिलहाल पुलिस ज्ञानीबाई मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, बरामद सामग्री और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।उधर, ग्रामीणों और परिजनों की मांग है कि पूरे मामले का जल्द खुलासा कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। क्षेत्र में अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और आने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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