नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के सिंगोली क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद 14 वर्षीय बालक की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बुखार से पीड़ित बालक को बिना आवश्यक जांच के ड्रिप और इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही मिनटों बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। गंभीर अवस्था में उसे राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मिली जानकारी के अनुसार, सिंगोली के समीप स्थित ग्राम माता का खेड़ा निवासी सैय्यद खान का 14 वर्षीय पुत्र अंसार खान पिछले दिनों बुखार से पीड़ित था। परिजन उसे इलाज के लिए सिंगोली में संचालित धाकड़ क्लीनिक लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि क्लीनिक संचालित करने वाले कथित झोलाछाप डॉक्टर विनोद धाकड़ ने बिना किसी आवश्यक चिकित्सकीय जांच के बालक को ड्रिप चढ़ा दी।
ड्रिप लगने के कुछ ही मिनट बाद बिगड़ने लगी हालत
परिजनों के अनुसार, ड्रिप शुरू होने के लगभग 15 मिनट बाद अंसार खान की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसका शरीर ठंडा पड़ने लगा और वह दर्द से तड़पने लगा। परिजनों ने तत्काल क्लीनिक संचालक को इसकी जानकारी दी। आरोप है कि स्थिति गंभीर होते देख संबंधित व्यक्ति ने बालक को तत्काल बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी और कहा कि उसका इलाज वहां कराया जाए।
परिवार का कहना है कि उस समय उन्हें यह उम्मीद थी कि इलाज करने वाला व्यक्ति स्वयं भी मरीज के साथ जाएगा और पूरी जानकारी अस्पताल के चिकित्सकों को देगा।
साथ चलने की बात कही, लेकिन रास्ते में नहीं मिला
परिजनों का आरोप है कि क्लीनिक संचालक ने भीलवाड़ा अस्पताल तक साथ चलने की बात कही थी। परिवार ने उस पर भरोसा करते हुए बालक को वाहन में बैठाकर रवाना किया। हालांकि, उनका कहना है कि कुछ ही देर बाद संबंधित व्यक्ति वहां से चला गया और फिर उसका कोई पता नहीं चला।
परिजनों के मुताबिक, रास्ते भर कई बार मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन बंद मिला। उनका कहना है कि इससे समय पर इलाज संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो सकी।
भीलवाड़ा अस्पताल में चली उपचार की कोशिश
गंभीर हालत में अंसार खान को राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया और उसे बचाने का प्रयास किया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल के चिकित्सकों ने पहले दिए गए उपचार की जानकारी लेने का प्रयास भी किया, ताकि उसी के अनुसार इलाज किया जा सके, लेकिन संबंधित व्यक्ति से संपर्क नहीं हो पाया।
देर रात उपचार के दौरान अंसार खान ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और गांव में भी शोक का माहौल बन गया।
परिजनों ने लगाया गलत उपचार का आरोप
मृतक के परिजनों का आरोप है कि यदि सही उपचार किया जाता और समय रहते पूरी चिकित्सकीय जानकारी उपलब्ध कराई जाती तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
परिजनों ने यह भी मांग की है कि क्षेत्र में संचालित ऐसे सभी कथित झोलाछाप डॉक्टर की जांच कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी घटना का सामना न करना पड़े।
वैध डिग्री को लेकर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि संबंधित क्लीनिक संचालक की चिकित्सकीय योग्यता और वैध डिग्री को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यदि जांच में यह पाया जाता है कि बिना वैध अनुमति चिकित्सा सेवाएं संचालित की जा रही थीं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसका अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और सक्षम अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई का इंतजार
घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर कथित अवैध क्लीनिकों की जांच होनी चाहिए, ताकि बिना योग्यता चिकित्सा सेवाएं देने वालों पर रोक लग सके। इस मामले में पुलिस द्वारा दर्ज की गई कार्रवाई और स्वास्थ्य विभाग की जांच संबंधी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उपचार में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।
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