नीमच। वर्ष 2018 में मनासा-नीमच रोड स्थित जवासा पुलिया के पास हुए सड़क हादसे के मामले में ग्राम न्यायालय, जिला नीमच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाकर एक महिला की मृत्यु और अन्य लोगों को घायल करने के मामले में टैंकर चालक को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी विशाल खाड़े ने आरोपी गणेशलाल पिता मिश्रीलाल रायका (40 वर्ष), निवासी ग्राम पालडी, तहसील आसीन्द, जिला भीलवाड़ा (राजस्थान) को भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 304ए, 338 और 279 के तहत दोषी पाया। न्यायालय ने टैंकर चालक को धारा 304ए के तहत 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 338 के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1 हजार रुपये अर्थदंड, तथा धारा 279 के तहत 3 माह का सश्रम कारावास एवं 1 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
वर्ष 2018 में हुआ था हादसा
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी करने वाले एडीपीओ पारस मित्तल ने बताया कि यह दुर्घटना 9 जनवरी 2018 को दोपहर करीब 4 बजे मनासा-नीमच रोड स्थित जवासा पुलिया के पास हुई थी। घटना के समय महेश नागदा अपनी मोटरसाइकिल से पत्नी शिवकन्याबाई, पुत्री दिशु और पुत्र अथर्व के साथ अल्हेड़ से रेवली-देवली जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे टैंकर चालक ने कथित रूप से तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हुए मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।
हादसे में महिला की हुई थी मौत
अभियोजन के अनुसार दुर्घटना में महेश नागदा के कंधे में फ्रैक्चर हुआ, उनकी पुत्री दिशु घायल हो गई, जबकि पत्नी शिवकन्याबाई के सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मृत्यु हो गई।घटना के बाद थाना नीमच सिटी में मर्ग कायम किया गया। जांच पूरी होने के बाद टैंकर चालक के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की गई और अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर हुई सुनवाई
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने आहत व्यक्तियों, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों तथा विवेचक सहित अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए। अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपराध को संदेह से परे प्रमाणित करने का निवेदन किया। सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने टैंकर चालक को दोषी मानते हुए उपरोक्त सजा सुनाई। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी एडीपीओ पारस मित्तल ने की।
न्यायालय का यह फैसला सड़क पर लापरवाही से वाहन चलाने के मामलों में कानूनी जवाबदेही का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। यातायात नियमों का पालन और सावधानीपूर्वक वाहन संचालन ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक है।
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