नीमच। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशों के अनुरूप जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नीमच द्वारा शुक्रवार को जिला न्यायालय परिसर स्थित ए.डी.आर. सेंटर भवन के सभागार में पैरा लीगल वॉलिंटियर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। एकदिवसीय प्रशिक्षण का मुख्य विषय सी.आई.एस. (CIS), ई-कोर्ट प्रणाली एवं साइबर सुरक्षा रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य पैरा लीगल वॉलिंटियर्स के ज्ञान और कौशल को विकसित कर उन्हें आमजन के बीच विधिक एवं डिजिटल जागरूकता फैलाने के लिए अधिक सक्षम बनाना था।
यह प्रशिक्षण माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नीमच श्री वीरेंद्र सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ
कार्यक्रम की शुरुआत माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री वीरेंद्र सिंह राजपूत द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इसके बाद प्रशिक्षण सत्र का संचालन किया गया, जिसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने पैरा लीगल वॉलिंटियर्स को न्यायालयों में उपयोग होने वाली डिजिटल प्रणालियों और साइबर सुरक्षा के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
CIS एवं ई-कोर्ट प्रणाली की दी गई विस्तृत जानकारी
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिला न्यायालय नीमच के जूनियर सिस्टम एनालिस्ट श्री पीयूष नारायण तथा श्री ब्रजेश पांडे ने प्रतिभागियों को CIS एवं ई-कोर्ट प्रणाली से संबंधित प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि न्यायालयों में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ इन प्रणालियों की समझ आवश्यक हो गई है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने विषय की व्यावहारिक उपयोगिता, न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक की भूमिका तथा आमजन को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में पैरा लीगल वॉलिंटियर्स की भूमिका पर विशेष जोर दिया। प्रतिभागियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग एवं संबंधित प्रक्रियाओं की भी जानकारी दी गई।
साइबर अपराधों से बचाव के बताए व्यावहारिक उपाय
प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में जिला पुलिस साइबर सेल में पदस्थ श्री कुलदीप सिंह, डाटा प्रोटक्शन ऑफिसर ने साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया। उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूप, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार तथा इंटरनेट उपयोग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने प्रतिभागियों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक रहने, संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों से सतर्क रहने तथा डिजिटल सुरक्षा संबंधी आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी। प्रशिक्षण के दौरान साइबर जागरूकता को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में पैरा लीगल वॉलिंटियर्स की भूमिका पर भी विशेष चर्चा की गई।
बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलिंटियर्स रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती शोभना मीणा, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री विष्णु दुबे, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री प्रवीण कुमार सहित बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलिंटियर्स उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विषय विशेषज्ञों से विभिन्न प्रश्न पूछे और उनसे संबंधित जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए व्यवहारिक पहलुओं पर भी मार्गदर्शन दिया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या रहा?
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस पैरा लीगल वॉलिंटियर्स प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य स्वयंसेवकों के ज्ञान एवं कौशल का विकास करना था ताकि वे समाज में विधिक सेवाओं, CIS पोर्टल, ई-कोर्ट प्रणाली तथा साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचा सकें। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पैरा लीगल वॉलिंटियर्स को न्यायिक व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विषयों की बेहतर समझ विकसित होती है, जिससे वे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आम नागरिकों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं।
आखिर पैरा लीगल वॉलिंटियर्स आम लोगों की कैसे करेंगे मदद?
पैरा लीगल वॉलिंटियर्स (PLV) न्यायपालिका और आम नागरिकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें विधिक सेवाओं, न्यायालय संबंधी प्रक्रियाओं, सीआईएस पोर्टल और साइबर सुरक्षा की जानकारी इसलिए दी जाती है ताकि वे अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को सही मार्गदर्शन दे सकें।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि किसी कानूनी समस्या, सरकारी विधिक सहायता, ऑनलाइन धोखाधड़ी या न्यायालय संबंधी प्रक्रिया के लिए कहां संपर्क किया जाए। ऐसे में उनके क्षेत्र में कार्यरत पैरा लीगल वॉलिंटियर्स प्रारंभिक स्तर पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन फ्रॉड, बैंकिंग धोखाधड़ी, सोशल मीडिया हैकिंग या साइबर ठगी जैसी घटना होती है, तो PLV उसे साइबर हेल्पलाइन, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा आवश्यक कानूनी सहायता प्राप्त करने के बारे में जागरूक कर सकते हैं। इसी प्रकार न्यायालय से जुड़े मामलों में भी वे संबंधित व्यक्ति को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दे सकते हैं।
समाज और न्याय व्यवस्था के बीच मजबूत कड़ी हैं PLV
पैरा लीगल वॉलिंटियर्स केवल विधिक जानकारी देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे समाज में कानूनी जागरूकता, डिजिटल सुरक्षा, महिला एवं बाल अधिकार, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, निःशुल्क विधिक सहायता तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण आयोजित करने का उद्देश्य यही है कि PLV नवीन तकनीक, ई-कोर्ट प्रणाली और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों से अपडेट रहें, ताकि वे गांव-गांव और वार्ड स्तर तक सही एवं विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
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