मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना योजना 39वीं किस्त से पहले लाभार्थियों की संख्या करीब 1.25 करोड़ रह गई है। ढाई साल से ज्यादा समय में सात लाख से अधिक नाम अलग-अलग कारणों से हटाए गए हैं।
भोपाल/नीमच। मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना योजना 39वीं किस्त से पहले लाभार्थियों की संख्या में बड़ा बदलाव सामने आया है। योजना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ढाई साल से ज्यादा समय में सात लाख से अधिक महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हट चुके हैं। अब योजना में लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या करीब एक करोड़ 25 लाख रह गई है।
ऐसे में 39वीं किस्त से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं, उनके खाते में अब योजना की राशि आएगी या नहीं। वहीं दूसरी ओर, जिन महिलाओं के नाम अभी भी पात्र लाभार्थियों में शामिल हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशि मिलने की बात सामने आई है। योजना में फिलहाल महिलाओं को 1,500 रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। लेकिन लाभार्थियों की संख्या में लगातार हो रही कमी ने पूरी प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है।
39वीं किस्त से पहले सामने आया बड़ा बदलाव
लाड़ली बहना योजना में शुरुआत के समय बड़ी संख्या में महिलाओं ने आवेदन किया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार योजना शुरू होने पर कुल 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन आए थे। इसके बाद आपत्तियों के आधार पर 2 लाख 18 हजार 858 नाम हटाए गए। इसके बाद लाभार्थियों की संख्या घटकर 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। समय के साथ पात्रता और अन्य कारणों से नाम हटते रहे। अब लाभार्थियों की संख्या करीब 1 करोड़ 25 लाख बताई जा रही है। यानी शुरुआत में जितनी महिलाएं योजना से जुड़ी थीं, उनकी तुलना में अब लाभार्थियों की संख्या में कई लाख की कमी आ चुकी है।
लेकिन 7 लाख नाम एक ही वजह से नहीं कटे
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सात लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम किसी एक कारण से नहीं हटाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उम्र सीमा पूरी होना, जांच में अपात्र पाया जाना, स्वयं योजना का लाभ छोड़ना, मृत्यु और समग्र आईडी तथा आधार से जुड़ी समस्याएं भी नाम हटने के कारणों में शामिल हैं। इसी वजह से 39वीं किस्त से पहले लाभार्थी सूची को लेकर महिलाओं के बीच यह जानना जरूरी है कि उनका नाम अभी पात्र सूची में है या नहीं।
नीमच जिले के आंकड़ों के लिए विभाग से संपर्क, अधिकारी का फोन नहीं उठा
नीमच जिले में लाड़ली बहना योजना से कितनी महिलाएं लाभ ले रही हैं और 39वीं किस्त से पहले कितने नाम लाभार्थी सूची से हटाए गए हैं, इसकी जानकारी के लिए द टाइम्स ऑफ एमपी ने महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी अंकिता पांडेय से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि, कॉल का कोई जवाब नहीं मिला।
नीमच जिले से जुड़े आंकड़ों और नाम हटने के कारणों की विभागीय पुष्टि के लिए अधिकारी से संपर्क किया गया था। फिलहाल उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। अधिकारी का पक्ष मिलने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।
इसलिए नीमच जिले से संबंधित लाभार्थियों की संख्या और नाम हटने के आंकड़ों को विभागीय पुष्टि के बिना अलग से प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।
इंदौर के आंकड़ों से समझिए पूरा मामला
इंदौर जिले में योजना की शुरुआत के दौरान 4 लाख 57 हजार 742 महिलाओं ने आवेदन किया था। अब जिले में 4 लाख 38 हजार 88 महिलाओं के खातों में हर महीने योजना की राशि पहुंच रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा के मुताबिक तय मापदंडों के अनुसार पात्र महिलाओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है। उनके अनुसार जो महिलाएं निर्धारित शर्तों से बाहर हो रही हैं, उन्हीं के नाम हटाए जा रहे हैं।
60 साल की उम्र के बाद हटे हजारों नाम
इंदौर के उपलब्ध आंकड़ों में नाम हटने की एक बड़ी वजह उम्र सीमा बताई गई है। पिछले साढ़े तीन साल में 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर 14,151 महिलाएं योजना से बाहर हुईं। इसके अलावा जांच के दौरान कुछ महिलाएं अपात्र पाई गईं, जबकि कुछ ने खुद योजना का लाभ छोड़ दिया।
इंदौर में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक:
- 14,151 महिलाएं 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के कारण बाहर हुईं।
- 452 महिलाएं जांच में अपात्र पाई गईं।
- 973 महिलाओं ने स्वयं योजना का लाभ छोड़ दिया।
- 763 महिलाओं की मृत्यु के बाद नाम हटाए गए।
- 2,406 नाम समग्र आईडी से जुड़ी समस्या के कारण हटे।
- 903 नाम आधार और समग्र डेटा के मेल नहीं होने के कारण हटे।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लाभार्थी सूची में कमी के पीछे प्रशासनिक और पात्रता से जुड़े अलग-अलग कारण बताए गए हैं।
अब सामने आया सबसे बड़ा सवाल: पांच लाख महिलाओं का क्या?

नाम कटने के मामले में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की महिलाओं से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन समुदायों की करीब पांच लाख महिलाएं लाड़ली बहना योजना के लाभ से बाहर हो गई हैं। इसके पीछे आहार अनुदान योजना के तहत पहले से मिलने वाली आर्थिक सहायता को कारण बताया गया है। यहीं से मामला और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इन महिलाओं को एक दूसरी सरकारी योजना के तहत पहले से आर्थिक सहायता मिल रही है।
दूसरी योजना से मिलने वाले 1500 रुपए बने पात्रता का आधार
सहरिया, बैगा और भारिया समुदायों के लिए वर्ष 2017 में आहार अनुदान योजना शुरू की गई थी। इसके तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है।शुरुआत में यह राशि 1,000 रुपए प्रतिमाह थी। बाद में इसे बढ़ाकर 1,500 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया। लाड़ली बहना योजना के पात्रता नियमों में एक प्रावधान है कि यदि परिवार के किसी सदस्य को किसी सरकारी योजना से 1,500 रुपए या उससे अधिक की राशि मिल रही है, तो महिला लाड़ली बहना योजना के लिए अपात्र हो सकती है।
इसी प्रावधान को इन समुदायों की महिलाओं के मामले में लागू किए जाने की बात सामने आई है।
मंत्री ने पात्रता नियमों को लेकर क्या कहा?
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने इस नियम की पुष्टि की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मंत्री ने लाड़ली बहना योजना के पात्रता नियमों के पैरा 4.4 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नियम सभी महिलाओं पर समान रूप से लागू होता है। इसका मतलब यह हुआ कि किसी महिला को दूसरी सरकारी योजना से मिलने वाली राशि भी उसकी पात्रता को प्रभावित कर सकती है, यदि वह निर्धारित सीमा के दायरे में आती है।
किन परिस्थितियों में लाभ नहीं मिल सकता?
लाड़ली बहना योजना की पात्रता से जुड़े नियमों में अलग-अलग शर्तें हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- परिवार की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपए से अधिक होना।
- परिवार के किसी सदस्य का आयकरदाता होना।
- परिवार के किसी सदस्य का सरकारी नौकरी से जुड़ा होना।
- परिवार के किसी सदस्य का निर्धारित सरकारी निगम या मंडल से जुड़ा होना।
- परिवार के किसी सदस्य को निर्धारित सीमा के अनुसार किसी अन्य सरकारी योजना से राशि मिलना।
हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार सहरिया, बैगा और भारिया महिलाओं के मामले में मुख्य मुद्दा आहार अनुदान योजना से मिलने वाली 1,500 रुपए की राशि है।
एक तरफ राशि बढ़ी, दूसरी तरफ नए नाम नहीं जुड़े
इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि योजना में महिलाओं को मिलने वाली राशि समय के साथ बढ़ी है। योजना की शुरुआत में 1,000 रुपए प्रतिमाह दिए जाते थे। बाद में राशि बढ़ाकर 1,250 रुपए की गई और नवंबर 2025 से इसे बढ़ाकर 1,500 रुपए प्रतिमाह किया गया।
लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक नए पंजीयन पिछले करीब तीन साल से बंद हैं। यानी मौजूदा लाभार्थियों को अधिक राशि मिल रही है, लेकिन दूसरी तरफ पात्रता से बाहर होने वाली महिलाओं के स्थान पर नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
सरकार ने अब तक कितना पैसा भेजा?
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जून 2023 से जून 2026 तक सरकार ने योजना के तहत महिलाओं के बैंक खातों में 56 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेजी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना पर 23,882.81 करोड़ रुपए खर्च करने का बजट रखा गया है। अक्टूबर 2025 तक हर महीने करीब 1,500 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने की जानकारी दी गई थी। दिसंबर 2025 में यह राशि बढ़कर 1,800 करोड़ रुपए से अधिक हो गई। यह भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में किए जाने की जानकारी है।
योजना की शुरुआत कैसे हुई थी?
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 मार्च 2023 को भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में की थी। योजना का उद्देश्य महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना था। शुरुआत में महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपए देने की व्यवस्था की गई थी। बाद में सरकार ने इस राशि में वृद्धि की। अब पात्र महिलाओं को 1,500 रुपए प्रतिमाह मिलने की जानकारी है।
39वीं किस्त से पहले महिलाओं के लिए सबसे अहम बात
अब पूरा मामला 39वीं किस्त पर आकर टिक गया है। जिन महिलाओं का नाम लाभार्थी सूची में बना हुआ है, उन्हें योजना की निर्धारित पात्रता के अनुसार राशि मिलने की उम्मीद है। वहीं जिन महिलाओं का नाम किसी कारण से सूची से हट चुका है, उनके लिए इस किस्त का भुगतान नहीं होगा।
सबसे अहम बात यह है कि सात लाख से ज्यादा नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि सभी महिलाओं के नाम एक ही वजह से काटे गए हैं। कहीं उम्र सीमा कारण बनी, कहीं अपात्रता सामने आई, कहीं महिला ने खुद लाभ छोड़ दिया और कहीं मृत्यु या आधार-समग्र डेटा जैसी तकनीकी समस्या सामने आई। इसके अलावा सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की महिलाओं के मामले में दूसरी सरकारी योजना से मिलने वाली राशि को लेकर पात्रता का सवाल सामने आया है।
एक नजर में पूरा मामला
- लाड़ली बहना योजना 39वीं किस्त से पहले लाभार्थियों की संख्या करीब 1.25 करोड़ रह गई है।
- ढाई साल से ज्यादा समय में 7 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं।
- योजना में वर्तमान में 1,500 रुपए प्रतिमाह मिलने की जानकारी है।
- नए पंजीयन करीब तीन साल से बंद बताए गए हैं।
- उम्र सीमा पूरी होना नाम हटने की प्रमुख वजहों में शामिल है।
- इंदौर में 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर 14,151 नाम हटे।
- सहरिया, बैगा और भारिया महिलाओं के मामले में आहार अनुदान की राशि पात्रता का मुद्दा बनी।
- जून 2023 से जून 2026 तक 56 हजार करोड़ रुपए से अधिक वितरित किए जाने की जानकारी है।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 23,882.81 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान बताया गया है।
आखिर 39वीं किस्त में किसे मिलेगा पैसा?
इसका सीधा जवाब लाभार्थी की मौजूदा पात्रता और सूची में दर्ज स्थिति पर निर्भर करता है। जिन महिलाओं का नाम योजना की पात्र लाभार्थी सूची में बना हुआ है, उनके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किस्त का भुगतान किया जाना है। वहीं जिनका नाम पात्रता समाप्त होने या अन्य कारणों से सूची से हट चुका है, उन्हें योजना की राशि नहीं मिलेगी।
इसलिए 39वीं किस्त से पहले सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि योजना की राशि कितनी है, बल्कि यह है कि लाभार्थी सूची में आपका नाम अभी भी मौजूद है या नहीं।
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