एशियाई शेर की वापसी की तैयारी, MP के जंगलों में फिर गूंज सकती है दहाड़
Reported by: Ameet | Edited by: आकाश शर्मा
10 अगस्त 2026, (अपडेटेड 10 अगस्त 2026, 1:26 अपराह्न IST)

भोपाल। मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों को दोबारा बसाने की दिशा में तैयारी की जा रही है। चीता प्रोजेक्ट के बाद अब प्रदेश में एशियाई शेर के संरक्षण और प्रजनन की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। फिलहाल शेरों को सीधे जंगल में छोड़ने के बजाय नियंत्रित वातावरण में रखकर उनके संरक्षण और प्रजनन पर ध्यान दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश के वन विभाग की योजना के तहत गुजरात से शुद्ध नस्ल के एशियाई शेर लाने और उनके प्रजनन के बाद जन्म लेने वाले शावकों को उपयुक्त वन क्षेत्रों में बसाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, जंगल में शेरों को बसाने की प्रक्रिया से पहले उनके लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार आधार, सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी होगा।

वन विहार में पहुंच चुका है नर-मादा जोड़ा

गुजरात के जूनागढ़ स्थित सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क से दिसंबर 2024 में एशियाई शेरों का एक नर-मादा जोड़ा भोपाल के वन विहार लाया जा चुका है। यह जोड़ा वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत गुजरात से मध्यप्रदेश आया था। फिलहाल इस जोड़े को नियंत्रित वातावरण में रखा गया है। यहां एशियाई शेर के संरक्षण और प्रजनन पर फोकस किया जा रहा है। योजना के मुताबिक, प्रजनन के बाद जन्म लेने वाले शावकों को भविष्य में उपयुक्त वन क्षेत्रों में बसाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस वन क्षेत्र में और किस समय छोड़ा जाएगा।

कभी मध्यप्रदेश में मौजूदगी बताई जाती थी

मध्यप्रदेश में एशियाई शेर बसाने की योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कभी विंध्य, बुंदेलखंड और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में इनकी मौजूदगी बताई जाती थी। समय के साथ यह प्रजाति मध्यप्रदेश से पूरी तरह समाप्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 19वीं सदी के अंत तक शेर मध्यप्रदेश से लगभग समाप्त हो चुके थे। अब एक बार फिर इस प्रजाति की वापसी की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

यदि यह योजना आगे बढ़ती है और एशियाई शेरों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास विकसित किया जाता है, तो यह मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।

गुजरात में 891 एशियाई शेर दर्ज

गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या लगातार बढ़ने की बात सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 की गणना में गुजरात में 891 एशियाई शेर दर्ज किए गए थे। शेरों की बढ़ती संख्या के बीच इनके लिए नए सुरक्षित आवासों की जरूरत भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी पृष्ठभूमि में मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों के संभावित पुनर्वास की योजना पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि, किसी भी वन्यजीव प्रजाति को किसी नए क्षेत्र में बसाने से पहले वहां की परिस्थितियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक होगा। शेरों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध है या नहीं, उनके लिए प्राकृतिक आवास कितना अनुकूल है और स्थानीय स्तर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की कितनी संभावना हो सकती है, इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना होगा।

पहले संरक्षण और प्रजनन, फिर जंगल में बसाने की तैयारी

मौजूदा जानकारी के अनुसार, अभी एशियाई शेरों को सीधे जंगल में छोड़ने की बजाय वन विहार जैसे नियंत्रित वातावरण में संरक्षण और प्रजनन पर ध्यान दिया जा रहा है। गुजरात से आए नर-मादा जोड़े के माध्यम से प्रजनन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और भविष्य में पैदा होने वाले शावकों को उपयुक्त वन क्षेत्र में बसाने की संभावना पर काम किया जा रहा है।

इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य रूप से ये पहलू महत्वपूर्ण होंगे—

  • एशियाई शेरों के लिए उपयुक्त वन आवास
  • पर्याप्त शिकार आधार
  • शेरों की सुरक्षा
  • संरक्षण और प्रजनन की व्यवस्था
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना
  • शावकों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण

इन पहलुओं का मूल्यांकन किए बिना जंगल में एशियाई शेर छोड़ना उचित नहीं होगा।

क्या फिर MP के जंगलों में गूंजेगी शेर की दहाड़?

मध्यप्रदेश में एशियाई शेर को दोबारा बसाने की योजना फिलहाल तैयारी और संरक्षण के चरण में दिखाई देती है। वन विहार में गुजरात से आए नर-मादा जोड़े के संरक्षण और प्रजनन के बाद जन्म लेने वाले शावकों को उपयुक्त वन क्षेत्रों में बसाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है और वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद उपयुक्त वन क्षेत्र तय किया जाता है, तो भविष्य में मध्यप्रदेश के जंगलों में एशियाई शेरों की मौजूदगी फिर दिखाई दे सकती है।


ताज़ा ख़बरों का अपडेट सीधा अपने फोन पर पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

Aakash Sharma
Aakash Sharmahttps://thetimesofmp.com
आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

Hot this week

पालसोड़ा एक्सीडेंट में 1 युवक की मौत, 2 की हालत गंभीर

पालसोड़ा एक्सीडेंट: नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र में...

उज्जैन शूटिंग रेंज मारपीट: VIDEO में कैद कोच पर हमला, सिस्टम पर उठे सवाल

उज्जैन (Ujjain Crime News)। उज्जैन शूटिंग रेंज मारपीट का...

रिद्धि राठौड़ का शानदार प्रदर्शन, 400 और 600 मीटर दौड़ में जीते स्वर्ण पदक

नीमच। शालेय संभाग स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्विमफ्लाय स्पोर्ट्स...

मनासा में घर में सो रहे 40 वर्षीय कालू को सांप ने काटा, समय पर अस्पताल पहुंचाया

मनासा। नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में शुक्रवार अलसुबह...

Related Articles

Popular Categories