भोपाल। मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों को दोबारा बसाने की दिशा में तैयारी की जा रही है। चीता प्रोजेक्ट के बाद अब प्रदेश में एशियाई शेर के संरक्षण और प्रजनन की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। फिलहाल शेरों को सीधे जंगल में छोड़ने के बजाय नियंत्रित वातावरण में रखकर उनके संरक्षण और प्रजनन पर ध्यान दिया जा रहा है।
मध्यप्रदेश के वन विभाग की योजना के तहत गुजरात से शुद्ध नस्ल के एशियाई शेर लाने और उनके प्रजनन के बाद जन्म लेने वाले शावकों को उपयुक्त वन क्षेत्रों में बसाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, जंगल में शेरों को बसाने की प्रक्रिया से पहले उनके लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार आधार, सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी होगा।
वन विहार में पहुंच चुका है नर-मादा जोड़ा
गुजरात के जूनागढ़ स्थित सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क से दिसंबर 2024 में एशियाई शेरों का एक नर-मादा जोड़ा भोपाल के वन विहार लाया जा चुका है। यह जोड़ा वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत गुजरात से मध्यप्रदेश आया था। फिलहाल इस जोड़े को नियंत्रित वातावरण में रखा गया है। यहां एशियाई शेर के संरक्षण और प्रजनन पर फोकस किया जा रहा है। योजना के मुताबिक, प्रजनन के बाद जन्म लेने वाले शावकों को भविष्य में उपयुक्त वन क्षेत्रों में बसाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस वन क्षेत्र में और किस समय छोड़ा जाएगा।
कभी मध्यप्रदेश में मौजूदगी बताई जाती थी
मध्यप्रदेश में एशियाई शेर बसाने की योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कभी विंध्य, बुंदेलखंड और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में इनकी मौजूदगी बताई जाती थी। समय के साथ यह प्रजाति मध्यप्रदेश से पूरी तरह समाप्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 19वीं सदी के अंत तक शेर मध्यप्रदेश से लगभग समाप्त हो चुके थे। अब एक बार फिर इस प्रजाति की वापसी की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
यदि यह योजना आगे बढ़ती है और एशियाई शेरों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास विकसित किया जाता है, तो यह मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।
गुजरात में 891 एशियाई शेर दर्ज
गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या लगातार बढ़ने की बात सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 की गणना में गुजरात में 891 एशियाई शेर दर्ज किए गए थे। शेरों की बढ़ती संख्या के बीच इनके लिए नए सुरक्षित आवासों की जरूरत भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी पृष्ठभूमि में मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों के संभावित पुनर्वास की योजना पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, किसी भी वन्यजीव प्रजाति को किसी नए क्षेत्र में बसाने से पहले वहां की परिस्थितियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक होगा। शेरों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध है या नहीं, उनके लिए प्राकृतिक आवास कितना अनुकूल है और स्थानीय स्तर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की कितनी संभावना हो सकती है, इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना होगा।
पहले संरक्षण और प्रजनन, फिर जंगल में बसाने की तैयारी
मौजूदा जानकारी के अनुसार, अभी एशियाई शेरों को सीधे जंगल में छोड़ने की बजाय वन विहार जैसे नियंत्रित वातावरण में संरक्षण और प्रजनन पर ध्यान दिया जा रहा है। गुजरात से आए नर-मादा जोड़े के माध्यम से प्रजनन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और भविष्य में पैदा होने वाले शावकों को उपयुक्त वन क्षेत्र में बसाने की संभावना पर काम किया जा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य रूप से ये पहलू महत्वपूर्ण होंगे—
- एशियाई शेरों के लिए उपयुक्त वन आवास
- पर्याप्त शिकार आधार
- शेरों की सुरक्षा
- संरक्षण और प्रजनन की व्यवस्था
- मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना
- शावकों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण
इन पहलुओं का मूल्यांकन किए बिना जंगल में एशियाई शेर छोड़ना उचित नहीं होगा।
क्या फिर MP के जंगलों में गूंजेगी शेर की दहाड़?
मध्यप्रदेश में एशियाई शेर को दोबारा बसाने की योजना फिलहाल तैयारी और संरक्षण के चरण में दिखाई देती है। वन विहार में गुजरात से आए नर-मादा जोड़े के संरक्षण और प्रजनन के बाद जन्म लेने वाले शावकों को उपयुक्त वन क्षेत्रों में बसाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है और वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद उपयुक्त वन क्षेत्र तय किया जाता है, तो भविष्य में मध्यप्रदेश के जंगलों में एशियाई शेरों की मौजूदगी फिर दिखाई दे सकती है।
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