नीमच/जीरन: नीमच जिले की जीरन तहसील के ग्राम सोनियाना में स्वराज शूटिंग लिमिटेड की प्रस्तावित औद्योगिक इकाई को लेकर पेड़ों की कटाई का विवाद गहरा गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि प्रस्तावित स्वराज शूटिंग लिमिटेड की औद्योगिक इकाई के लिए चिन्हित शासकीय जमीन पर 2 हजार से अधिक हरे पेड़ और पौधे मौजूद हैं और इनके कटने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पेड़ कटाई रुकवाने, भूमि आवंटन की प्रक्रिया की जांच कराने और पेड़-पौधों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की है।
ग्राम खेरमालिया निवासी जितमल पिता रामप्रसाद और ग्राम जमुनिया कला निवासी राजेश पिता कन्हैयालाल प्रजापति ने इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि स्वराज शूटिंग लिमिटेड की औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए संबंधित जमीन पर मौजूद हरे-भरे वृक्षों को हटाया जा सकता है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए तो इसका सीधा असर क्षेत्र के पर्यावरण के साथ-साथ वहां रहने वाले पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास पर पड़ेगा।
हालांकि, पेड़ों की वास्तविक संख्या और कटाई की अनुमति को लेकर प्रशासन या वन विभाग की ओर से स्वतंत्र सत्यापन/आधिकारिक रिपोर्ट फिलहाल सामने नहीं आई है।
शासकीय जमीन के इन सर्वे नंबरों पर उठे सवाल
शिकायत के मुताबिक ग्राम सोनियाना, तहसील जीरन की शासकीय भूमि के सर्वे नंबर 96/1, 98/6, 93/2 और 104 में बड़ी संख्या में पुराने और नए पेड़ मौजूद हैं। शिकायतकर्ताओं ने आवेदन में पेड़ों और पौधों की संख्या का विस्तृत ब्यौरा भी दिया है। उनके अनुसार संबंधित क्षेत्र में करीब:
- 600 बड़े आंवले के पेड़
- 550 नीम के पेड़
- 75 प्लास के पेड़
- करीब 30 बेर-खेजड़ा के पेड़
- करीब 350 आंवले के पौधे
- करीब 350 बड़े सागवान के वृक्ष
मौजूद हैं।
इसके अलावा भी कई नवीन वृक्ष एवं पौधे होने का दावा शिकायत में किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार इन सभी को मिलाकर पेड़-पौधों की संख्या 2 हजार से अधिक है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा है कि क्षेत्र में करीब 1500 वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ बताए गए हैं। यानी मामला केवल नए पौधों का नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में पुराने और विकसित वृक्षों से भी जुड़ा होने का दावा किया गया है।
बिना सक्षम अनुमति पेड़ काटने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने स्वराज शूटिंग लिमिटेड द्वारा नवीन औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए संबंधित भूमि का आवंटन कराए जाने की बात कही है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भूमि आवंटन के दौरान वहां मौजूद पेड़-पौधों की वास्तविक जानकारी नहीं दी गई अथवा भूमि आवंटन के लिए गलत जानकारी का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ताओं ने इसे जांच का विषय बताते हुए संबंधित रिकॉर्ड और पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की है कि यदि पेड़ों की कटाई के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति नहीं है तो किसी भी स्थिति में पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी जाए। यह आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पेड़ कटे तो पर्यावरण और जीव-जंतुओं पर असर की आशंका
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित क्षेत्र में बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ मौजूद हैं। यदि स्वराज शूटिंग लिमिटेड की औद्योगिक इकाई के लिए इन पेड़ों की कटाई होती है तो इसका नुकसान केवल हरियाली तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार इन पेड़ों पर निर्भर पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास पर भी असर पड़ सकता है।
शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि क्षेत्र में पुराने पेड़ों के अलावा बड़ी संख्या में नए वृक्ष और पौधे भी मौजूद हैं। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि स्वराज शूटिंग लिमिटेड की औद्योगिक गतिविधि शुरू करने से पहले मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाए और पेड़-पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
भूमि आवंटन से पहले भी आपत्तियां रखने का दावा
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि के आवंटन से पहले वन विभाग, ग्राम पंचायत और अन्य संबंधित संस्थाओं के समक्ष पर्यावरण संरक्षण तथा पेड़-पौधों को लेकर आपत्तियां रखी गई थीं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इसके बावजूद अब प्रस्तावित स्वराज शूटिंग लिमिटेड की औद्योगिक इकाई के लिए मौजूद पेड़-पौधों को लेकर गंभीर स्थिति बन रही है। यही वजह है कि ग्रामीणों ने अब प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
25 अगस्त से शुरू हुई शिकायत, 27 अगस्त को फिर आवेदन
मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने 25 अगस्त 2026 को तहसीलदार जीरन के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद 27 अगस्त 2026 को भी पेड़ों की कटाई को तत्काल रोकने के संबंध में आवेदन दिया गया। यानी शिकायतकर्ताओं ने दो अलग-अलग तारीखों पर प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने सीएम हेल्पलाइन शिकायतक नंबर 40234862 पर भी शिकायत किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा आवेदन में शिकायत की प्रतियां कई वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं को भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।
केंद्रीय मंत्री से लेकर एनजीटी तक भेजी स्वराज शूटिंग लिमिटेड की शिकायत
शिकायत में बताया गया है कि मामले की प्रतियां निम्न अधिकारियों एवं संस्थाओं को भेजी गई हैं:
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, दिल्ली
- मध्यप्रदेश शासन के वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रदीप अहिरवार, भोपाल
- नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा
- अनुविभागीय अधिकारी, जीरन (एसडीएम)
- वनमंडलाधिकारी, नीमच
- वन एवं पर्यावरण विभाग
- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), भोपाल
इससे साफ है कि शिकायतकर्ताओं ने मामले को स्थानीय प्रशासन से आगे संबंधित पर्यावरणीय अधिकारियों और संस्थाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
ग्रामीणों का ऐलान—पेड़ कटे तो होगा आंदोलन
शिकायतकर्ताओं जितमल प्रजापति और राजेश प्रजापति ने प्रशासन से मांग की है कि यदि पेड़ों की कटाई विधि-विरुद्ध तरीके से की जा रही है तो उसे तत्काल रुकवाया जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए। आवेदन में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि पेड़ों की कटाई की जाती है तो ग्रामीणों द्वारा आंदोलन किया जाएगा। शिकायतकर्ताओं ने आवेदन में यह भी कहा है कि पेड़ों की कटाई की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी स्वराज शूटिंग लिमिटेड एवं जिम्मेदार अधिकारियों की होगी।
यानी अब मामला सिर्फ आवेदन और आपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि यदि पेड़ों की कटाई शुरू होती है तो ग्रामीण विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपना सकते हैं।
शिकायत में धमकी के भी गंभीर आरोप
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ताओं ने स्वराज शूटिंग लिमिटेड के मालिक पर भी आरोप लगाए हैं। आवेदन में शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि मालिक द्वारा उन्हें कथित तौर पर राजनीतिक एवं धनाढ्य होने की बात कहते हुए कानूनी प्रक्रिया में उलझाने और रास्ते से हटाने की धमकी दी गई। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में संबंधित कंपनी अथवा उसके मालिक का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
अब असली सवाल—2 हजार से ज्यादा पेड़ों का क्या होगा?
सोनियाना का यह मामला अब कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्तावित स्वराज शूटिंग लिमिटेड की औद्योगिक इकाई के लिए जिस शासकीय भूमि का इस्तेमाल किया जाना है, वहां मौजूद बताए जा रहे 2 हजार से अधिक पेड़ों का भविष्य क्या होगा?
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि:
- संबंधित जमीन पर वास्तविक रूप से कितने पेड़ मौजूद हैं?
- भूमि आवंटन के समय इन पेड़-पौधों का रिकॉर्ड क्या था?
- क्या पेड़ों की कटाई के लिए किसी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई है?
- क्या वन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की अनुमति या प्रक्रिया पूरी की गई?
- भूमि आवंटन से पहले ग्राम पंचायत और अन्य संस्थाओं द्वारा दर्ज आपत्तियों पर क्या कार्रवाई हुई?
- प्रस्तावित औद्योगिक इकाई के लिए पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी क्या प्रक्रिया अपनाई गई?
इन सवालों का जवाब प्रशासनिक और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
शिकायत से अब जांच की मांग तक पहुंचा मामला
फिलहाल जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने अलग-अलग स्तरों पर शिकायतें देकर पेड़ों की कटाई रोकने की मांग की है। दूसरी ओर, पेड़ों की वास्तविक संख्या, भूमि आवंटन की प्रक्रिया और कथित कटाई की अनुमति को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इसलिए अब निगाहें प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई पर हैं। यदि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करते हैं और रिकॉर्ड की जांच करते हैं तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है। स्वराज शूटिंग लिमिटेड की प्रस्तावित औद्योगिक इकाई को लेकर उठे ये सवाल अब केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शासकीय भूमि, भूमि आवंटन प्रक्रिया, पर्यावरण संरक्षण और संबंधित अनुमतियों की जांच से भी जुड़े हैं।
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