अफीम नीति नीमच पर किसानों का बड़ा सवाल, टाउन हॉल में उठीं ये मांगें
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
09 सितम्बर 2026, (अपडेटेड 09 सितम्बर 2026, 2:16 अपराह्न IST)

नीमच। अफीम नीति नीमच को लेकर किसानों में चर्चा तेज हो गई है। टाउन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में किसानों ने आगामी अफीम नीति को लेकर अपनी विभिन्न मांगें और समस्याएं सामने रखीं। किसानों ने सीपीएस पद्धति समाप्त करने, 3.5 मार्फिन के आधार पर पट्टे जारी करने, पुराने अफीम पट्टे बहाल करने और फसल को बीमा योजना में शामिल करने की मांग की।

किसानों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में उत्पादन और मार्फिन के मापदंडों को लेकर उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किसानों ने आगामी नीति में ऐसे व्यावहारिक बदलाव करने की मांग की, जिससे खेती से जुड़े नियम स्पष्ट हो सकें।

सीपीएस पद्धति खत्म करने की मांग

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने सीपीएस पद्धति समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई। किसानों के अनुसार इस व्यवस्था में हर वर्ष कितना उत्पादन देना होगा, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है। किसानों ने मांग की कि उत्पादन से जुड़े मापदंड स्पष्ट और व्यावहारिक बनाए जाएं, ताकि किसानों को हर साल उत्पादन संबंधी अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

3.5 मार्फिन पर पट्टे और पुराने पट्टों की बहाली

किसानों ने आगामी अफीम नीति में 3.5 के मार्फिन आधार पर पट्टे जारी करने की मांग भी रखी। किसानों का कहना है कि मार्फिन के आधार में राहत मिलने से अधिक किसानों को अफीम खेती का अवसर मिल सकता है। इसके अलावा जिन किसानों के पुराने पट्टे मार्फिन के आधार पर निरस्त हुए हैं, उनके मामलों की दोबारा समीक्षा करने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि पात्र किसानों के पुराने पट्टे बहाल किए जाने चाहिए।

उचित मूल्य और धारा 29 का मुद्दा

किसानों ने अफीम के वर्तमान मूल्य को लेकर भी असंतोष जताया। उनका कहना है कि किसानों को मिलने वाला मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में बताए जाने वाले मूल्य की तुलना में कम है। किसानों ने अफीम का उचित एवं लाभकारी मूल्य निर्धारित करने की मांग की।

कार्यक्रम में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 से जुड़े मामलों को लेकर भी किसानों ने चिंता जताई। किसानों का कहना है कि किसी एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होने पर अन्य किसानों के भी परेशान होने की स्थिति बनती है। उन्होंने प्रावधान के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने और अनावश्यक परेशानी से बचाने की मांग की।

मार्फिन जांच और खराब फसल पर राहत

किसानों ने अफीम की गुणवत्ता और मार्फिन निर्धारण को वैज्ञानिक आधार पर करने की मांग की। उनका कहना है कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में व्यावहारिक मापदंड तय किए जाने चाहिए। प्राकृतिक कारणों से खराब या नष्ट हुई फसल को लेकर भी किसानों ने राहत की मांग रखी। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में उचित प्रक्रिया के तहत किसानों को राहत मिलनी चाहिए।

फसल बीमा की मांग, अब नीति का इंतजार

किसानों ने अफीम की फसल को फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक आपदा से फसल नष्ट होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों ने आगामी अफीम नीति नीमच के संबंध में नीति जल्द जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर नीति घोषित होने से किसान आगामी सीजन की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे।

किसानों की प्रमुख मांगें

  • सीपीएस पद्धति समाप्त हो।
  • 3.5 मार्फिन आधार पर पट्टे जारी हों।
  • पुराने पट्टों की समीक्षा कर पात्र किसानों के पट्टे बहाल हों।
  • अफीम का उचित एवं लाभकारी मूल्य तय हो।
  • धारा 29 से जुड़े मामलों में किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए।
  • मार्फिन के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक मापदंड तय हों।
  • खराब फसल पर राहत मिले।
  • अफीम को फसल बीमा योजना में शामिल किया जाए।

अभी आगामी अफीम नीति के अंतिम प्रावधान सामने नहीं आए हैं। किसानों की इन मांगों पर क्या निर्णय होता है, यह नीति जारी होने के बाद स्पष्ट होगा।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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