मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश पुलिस में MP पुलिस प्रमोशन को लेकर नियम बदलने की तैयारी है। एसएसएफ यानी विशेष सशस्त्र बल में एएसआई से एसआई और एसआई से निरीक्षक यानी कंपनी कमांडर बनने के लिए अब फील्ड ड्यूटी को अनिवार्य करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पुलिस मुख्यालय के इस प्रस्ताव को डीजीपी की मंजूरी के बाद गृह विभाग भेज दिया गया है।
प्रस्ताव के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को पदोन्नति के लिए अपने सेवाकाल का एक-तिहाई हिस्सा एक्टिव फील्ड ड्यूटी में पूरा करना होगा। हालांकि सिपाही और हवलदार के प्रमोशन नियमों में बदलाव प्रस्तावित नहीं किया गया है।
आखिर प्रमोशन के लिए क्यों जरूरी होगी फील्ड ड्यूटी?
पुलिस मुख्यालय ने विसबल पदोन्नति नियम-2012 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों के फील्ड अनुभव को महत्व देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।यानी यदि नया नियम मंजूर होकर लागू होता है तो सिर्फ कार्यालयीन या अटैचमेंट ड्यूटी का अनुभव पदोन्नति के लिए पर्याप्त नहीं होगा। एएसआई से एसआई और एसआई से निरीक्षक बनने वाले अधिकारियों के लिए सेवाकाल का निर्धारित हिस्सा एक्टिव फील्ड ड्यूटी में होना जरूरी होगा। MP पुलिस प्रमोशन के इस प्रस्ताव का सीधा असर एसएसएफ में पदोन्नति की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
किन अधिकारियों पर लागू होगा प्रस्ताव?
प्रस्तावित बदलाव मुख्य रूप से दो पदोन्नतियों से जुड़ा है।
- एएसआई से एसआई बनने के लिए।
- एसआई से निरीक्षक यानी कंपनी कमांडर बनने के लिए।
- दोनों स्तरों पर सेवाकाल का एक-तिहाई समय एक्टिव फील्ड ड्यूटी में होना प्रस्तावित है।
- सिपाही और हवलदार के प्रमोशन नियमों में बदलाव नहीं किया गया है।
इसका मतलब है कि प्रस्तावित मध्य प्रदेश पुलिस प्रमोशन व्यवस्था में फील्ड अनुभव अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण पात्रता बन सकता है।
कौन-सी ड्यूटी एक्टिव मानी जाएगी?
प्रस्ताव में एक्टिव ड्यूटी की श्रेणी भी तय की गई है।
जिले में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा में तैनात कंपनियों को एक्टिव ड्यूटी में शामिल किया गया है। इसके अलावा वन विभाग तथा अवैध रेत उत्खनन रोकने वाली कंपनियों की ड्यूटी भी इसमें शामिल है। हॉक फोर्स यानी नक्सल मोर्चे की ड्यूटी, एसटीएफ, क्यूआरएफ और एसआईएसएफ की ड्यूटी को भी एक्टिव माना गया है। कॉम्प्लेक्स प्लाटून, हेडक्वार्ट और आरबीएसएफ की सुरक्षा ड्यूटी को भी प्रस्ताव में एक्टिव श्रेणी में रखा गया है।
सुरक्षा वाहिनी की ड्यूटी को अधिकतम तीन साल तक एक्टिव माना जाएगा। तीन साल से ज्यादा की सेवा को एक्टिव ड्यूटी में नहीं गिना जाएगा।
दफ्तर और अटैचमेंट ड्यूटी पर भी नजर
प्रस्ताव में कुछ जिम्मेदारियों को इन-एक्टिव ड्यूटी माना गया है। अधिकारियों के आवास पर अर्दली ड्यूटी, वाहिनी कार्यालय और खाता संबंधी कार्यालयीन ड्यूटी को इसमें शामिल किया गया है। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय, मंत्रालय या अन्य कार्यालयों में अटैचमेंट को भी एक्टिव फील्ड ड्यूटी नहीं माना जाएगा। क्लब भवन में अटैच ड्यूटी और अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। हालांकि कल्याण कार्यों को इन-एक्टिव नहीं माना गया है।
एसएसएफ में करीब 25 हजार पुलिसकर्मी
मध्य प्रदेश में फिलहाल करीब 25 हजार पुलिसकर्मी एसएसएफ में तैनात हैं। इनमें पांच हजार से अधिक जवान अर्दली या दफ्तरी ड्यूटी में लगे हुए हैं। नया नियम लागू होने की स्थिति में दफ्तरी ड्यूटी और फील्ड ड्यूटी के बीच तैनाती में बदलाव हो सकता है।
आरमोरर के लिए भी नया नियम प्रस्तावित
पदोन्नति नियमों के साथ आरक्षक आरमोरर से जुड़े नियम में भी बदलाव प्रस्तावित है। हथियार शाखा में शामिल होने के लिए छह महीने का पुलिस आरमोरर कोर्स अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। छह महीने से कम प्रशिक्षण वाले आरक्षकों को इसके लिए पात्र नहीं माना जाएगा।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल प्रस्ताव गृह विभाग के पास भेजा गया है। MP पुलिस प्रमोशन से जुड़े इन बदलावों को लागू करने के लिए गृह विभाग की मंजूरी और आगे की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। मंजूरी मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय संशोधित नियमों की अधिसूचना जारी कर सकता है। इसके बाद अधिकारियों के सेवाकाल और एक्टिव ड्यूटी की अवधि के आधार पर पदोन्नति की पात्रता का आकलन किया जा सकता है।
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