मंदसौर/पिपलियामंडी। कृपा बायोटेक एथेनॉल प्लांट में कम्प्यूटर ऑपरेटर मनीष धमधामा (24) की संदिग्ध मौत के बाद प्लांट के संचालन को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। चंबी ग्राम पंचायत के सरपंच का दावा है कि कृपा बायोटेक एथेनॉल प्लांट पिछले करीब तीन साल से बिना वैध पंचायत अनुमति के चल रहा है और स्थानीय टैक्स के रूप में 10 लाख रुपए से अधिक की राशि बकाया है।
मृतक के पिता और परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्लांट में सुरक्षा उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण मनीष की जान गई। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण और किसी की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम स्थिति पुलिस और तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। घटना के बाद मृतक के परिजनों और प्लांट संचालक योगेश गर्ग के बीच शुक्रवार को बंद कमरे में मुलाकात भी हुई। सूत्रों के मुताबिक परिवार ने 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग रखी। हालांकि, बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
पंचायत अनुमति को लेकर क्या है विवाद?
चंबी ग्राम पंचायत के सरपंच रामलखन व्यास के अनुसार,
कृपा बायोटेक एथेनॉल प्लांट के लिए पंचायत से कोई एनओसी या वैधानिक अनुमति नहीं ली गई। उनका कहना है कि प्लांट को लेकर प्रशासन के सामने पहले भी लिखित शिकायतें रखी गई थीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सरपंच के मुताबिक प्लांट करीब 25 अड़ी जमीन पर पंचायत अंतर्गत गांव सेमखेड़ा की सीमा में आता है। उनका दावा है कि प्लांट संचालक की ओर से पंचायत अनुमति और संचालन को लेकर अलग-अलग बातें कही जाती रहीं। जब चंबी पंचायत की ओर से आपत्ति जताई गई तो कथित तौर पर कहा गया कि अनुमति चौकी से ली गई है। वहीं, चौकी की ओर से रोके जाने पर सेमखेड़ा पंचायत से अनुमति होने की बात कही गई।
10 लाख से ज्यादा टैक्स का दावा
चंबी ग्राम पंचायत के सरपंच ने 10 लाख रुपए से अधिक स्थानीय टैक्स बकाया होने का भी दावा किया है। उनका कहना है कि प्लांट संचालक की ओर से पंचायत को टैक्स का भुगतान नहीं किया गया। हालांकि, टैक्स बकाया की वास्तविक राशि और भुगतान की स्थिति पंचायत के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी। इस संबंध में संबंधित दस्तावेज सामने आना अभी बाकी है।
नदी और खेतों में दूषित अपशिष्ट बहाने का आरोप
कृपा बायोटेक एथेनॉल प्लांट को लेकर एक और गंभीर आरोप कथित प्रदूषण का है। सरपंच रामलाल के अनुसार प्लांट से निकलने वाला दूषित और जहरीला केमिकल खेतों और रेतम नदी की ओर बहाया जा रहा है। सरपंच का दावा है कि नदी का पानी दूषित होने के बाद कुछ महीने पहले क्षेत्र में मछलियों और जलीय जीवों की मौत भी हुई थी। ग्रामीणों की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नीमच एसडीएम और तहसीलदार को लिखित शिकायतें दिए जाने की बात कही गई है।
मनीष के परिवार ने रखी तीन बड़ी मांगें
मृतक मनीष धमधामा के पिता और परिजनों ने प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण यह हादसा हुआ। शुक्रवार को मंदसौर में परिवार और संचालक योगेश गर्ग के बीच बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक परिवार ने तीन प्रमुख मांगें रखीं—
- 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता
- परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी
- जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई
बताया गया है कि प्रबंधन की ओर से आडियल रुख के चलते वार्ता बेनतीजा रही।
जिम्मेदारों के जवाब से भी उठे सवाल
अनुमति, कथित प्रदूषण और हादसे को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगे जाने की जानकारी सामने आई है।
एसडीएम स्वाति तिवारी (मल्हारगढ ) अनुमति और जांच को लेकर सवाल पूछे गए। जानकारी के मुताबिक उन्होंने आवाज ठीक से सुनाई नहीं देने की बात कहते हुए दोबारा कॉल करने की बात कही, लेकिन बाद में फोन का जवाब नहीं दिया।
बाबूलाल जाटव (सचिव,ग्राम चगेरी),पंचनामे और अनुमति पर बोले मेरा तो गांव से तबादला हो चुका है, मुझे कुछ नहीं पता । जब मीडिया ने सरपंच से पुष्टि की तो उन्होंने कहा कि सचिन जाटव का कोई तबादला नहीं हुआ है वह यही पदस्थ है।
वहीं, कृपा बायोटेक एथेनॉल प्लांट के संचालक योगेश गर्ग से पक्ष जानने के लिए लगातार दूसरे दिन फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन जानकारी के अनुसार उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
पुलिस की जांच के बाद खुलेगी तस्वीर
पुलिस प्रशासन, मंदसौर के अनुसार मृतक का शव घर भेजा जा रहा है। परिजनों के आवेदन के आधार पर तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कृपा बायोटेक एथेनॉल प्लांट से जुड़े कई सवाल जांच के दायरे में हैं—पंचायत अनुमति वास्तव में ली गई थी या नहीं, टैक्स बकाया कितना है, प्रदूषण संबंधी आरोपों में कितनी सच्चाई है और मनीष की मौत में सुरक्षा व्यवस्था की क्या भूमिका रही।
इन सभी सवालों का अंतिम जवाब संबंधित विभागों की जांच, पंचायत रिकॉर्ड और पुलिस कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।
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