करोड़पति कहाँ लगाते हैं पैसा? CA ने खोला वो ‘बोरिंग’ सीक्रेट जो बना सकता है आपको अमीर
न सोना, न शेयर… करोड़पति लोग कहाँ लगाते हैं पैसा? CA ने बताया वो सीक्रेट जो बना सकता है आपको अमीर!
नई दिल्ली: अगर आप सोचते हैं कि अमीर बनने के लिए सिर्फ शेयर बाजार या क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना जरूरी है, तो आप गलत हो सकते हैं। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ने भारत के करोड़पतियों की असली ‘वेल्थ मशीन’ का राज खोल दिया है, जो इन चकाचौंध भरी संपत्तियों से कोसों दूर है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन कौशिक का कहना है कि भारत के सबसे अमीर लोग न तो शेयर बाजार के हर उतार-चढ़ाव के पीछे भागते हैं और न ही क्रिप्टो की अस्थिर चमक-दमक में अपना समय गंवाते हैं। इसके बजाय, वे उन “बोरिंग लेकिन भरोसेमंद” जगहों में निवेश करते हैं, जिन पर आम मध्यम वर्ग का ध्यान शायद ही जाता है।
यही है करोड़पतियों की असली ‘वेल्थ मशीन’
कौशिक के मुताबिक, भारत के अमीर लोग अपनी दौलत पार्किंग लॉट, कोल्ड स्टोरेज, टोल रोड और बड़े वेयरहाउस जैसी भौतिक (physical) संपत्तियों से बढ़ाते हैं। ये ऐसे व्यापार हैं जो मार्केट की स्थिति से अप्रभावित रहते हुए, हर दिन लगातार कैश फ्लो (नकद प्रवाह) सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने साफ किया कि जहाँ मध्यम वर्ग अक्सर IPO या शेयरों में पैसा लगाकर जोखिम लेता है, वहीं अमीर लोग ऐसी बुनियादी ढांचा (Infrastructure) संपत्तियाँ चुनते हैं जिनकी मांग कभी खत्म नहीं होती।
‘बोरिंग एसेट्स’ से धमाकेदार कमाई
सीए कौशिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में बताया कि इन बोरिंग एसेट्स से होने वाली कमाई के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
- पार्किंग लॉट: एक मेट्रो सिटी में मध्यम आकार का पार्किंग लॉट हर महीने ₹25 लाख से ₹30 लाख तक कमा सकता है।
- कोल्ड स्टोरेज: 10,000 वर्ग फुट का कोल्ड स्टोरेज प्रति माह ₹8 लाख से ₹12 लाख तक किराया दे सकता है।
- टोल प्लाजा: एक व्यस्त हाईवे पर टोल प्लाजा की दैनिक कमाई ₹10 लाख से ₹15 लाख तक हो सकती है।
कौशिक के अनुसार, इन व्यवसायों में आय का अनुमान लगाना आसान होता है, यही वजह है कि बैंक भी इन्हें फाइनेंस करने में स्टार्टअप्स की तुलना में ज्यादा भरोसा करते हैं, जहाँ रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।
टैक्स में भी मिलता है बड़ा फायदा
CA ने यह भी बताया कि अमीर लोग इन एसेट्स में निवेश करके टैक्स के मोर्चे पर भी फायदे में रहते हैं। कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और टोल प्रोजेक्ट्स जैसी इन्फ्रास्ट्रक्चर संपत्तियों पर टैक्स में छूट, डेप्रिसिएशन बेनिफिट (मूल्यह्रास लाभ) और जीएसटी क्रेडिट जैसे लाभ मिलते हैं, जिससे उनकी टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है।
कौशिक ने मध्यम वर्ग की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहाँ स्कूल ‘डिग्री → नौकरी → ईएमआई → रिटायरमेंट’ का चक्र सिखाते हैं, वहीं अमीर परिवार ‘जमीन → इन्फ्रास्ट्रक्चर → कैश फ्लो → विरासत’ का पाठ सिखाते हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश से पहले, कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

