नीमच मंडी में ‘परिवार लिमिटेड’ का खेल – एक ही छत के नीचे तीन फर्में, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल!

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  • एक ही परिवार की तीन कंपनियां चला रहीं कारोबार

  • धानुका सोया और धिरेन्द्र सोया जैसे बड़े व्यापारी भी वर्षों से इसी तरह के लेनदेन करते आ रहे हैं।

  • मंडी सचिव बोले – “यह सब वैध है”, पर कानून कहता है कुछ और….

नीमच। नीमच मंडी प्रांगण में नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक ही परिवार के तीन सदस्य एक ही पते से अलग-अलग नामों से व्यापार कर रहे हैं और मंडी प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

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जानकारी के अनुसार,
1️⃣ प्रदीप एंड कंपनी (नितिन बम) (GST नंबर :  23AZMPB3417B1Z2)
2️⃣ रिषभ कॉरपोरेशन (मनोहरलाल बम) (GST नंबर : 23ACFPB4958F1ZW)
3️⃣ दिवाकर ट्रेडिंग कंपनी (सुनील कुमार बम)  (GST नंबर : 23AZMPB3417B1Z2)
तीनों फर्मों का पता मंडी प्रांगण, नीमच ही है और कारोबार लगभग समान — कृषि उत्पाद, तिलहन और मसालों का व्यापार।


मंडी इंस्पेक्टर समीर दास बोले — “यह वैध है”

पूरे मामले पर जब मंडी इंस्पेक्टर समीर दास से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा —

“यह पूरी तरह से वैध है। कई व्यापारियों को गोदाम नहीं मिलता, इसलिए वे अपने परिवार या मित्रों के गोदाम का किरायानामा लगाकर लेनदेन करते हैं। यह कोई नई बात नहीं, सालों से ऐसा ही चल रहा है।”

मंडी इंस्पेक्टर के इस बयान ने सवाल और गहरे कर दिए हैं —
अगर यह सालों से चल रहा है, तो क्या अब ‘रिवाज़’ ही कानून बन चुका है?


 ‘धानुका सोया’ और ‘धिरेन्द्र सोया’ जैसे बड़े नाम भी शामिल

सूत्रों के अनुसार, इस “गोदाम किरायानामा संस्कृति” में छोटे नहीं, बल्कि धानुका सोया और धिरेन्द्र सोया जैसे बड़े व्यापारी भी वर्षों से इसी तरह के लेनदेन करते आ रहे हैं।
यानि मजबूरी नहीं, बल्कि सुविधा और सिस्टम का फायदा बन चुका है यह तरीका।


कानून क्या कहता है?

दुकान स्थापना अधिनियम (Shop & Establishment Act)

“एक ही परिसर में एक ही परिवार द्वारा समान प्रकृति की एक से अधिक फर्मों का संचालन अनुचित है। प्रत्येक व्यवसाय को अलग प्रतिष्ठान और अलग पते से संचालित किया जाना आवश्यक है।”

जीएसटी कानून (GST Act, 2017)

धारा 25(2)रूल 8(1) के अनुसार,
“एक ही पते से एक ही स्वामित्व या समान व्यापारिक प्रकृति के लिए अलग-अलग जीएसटी नंबर नहीं दिए जा सकते, जब तक कि वे अलग व्यवसाय न हों।”

ऐसे मामलों में टैक्स चोरी, बिलिंग हेराफेरी और इनवॉइस स्प्लिटिंग के आरोप बन सकते हैं।


संभावित कर अपराध (Tax Offence)

• फर्जी इनवॉइस जारी करना — ताकि लेनदेन तीन हिस्सों में बाँटकर टैक्स से बचा जा सके।
• टर्नओवर सीमा से नीचे दिखाना — GST रजिस्ट्रेशन की सीमा (₹40 लाख/₹1 करोड़) से बचने के लिए।
• ITC का दुरुपयोग — एक फर्म से खरीदी गई वस्तु का इनपुट क्रेडिट दूसरी फर्म में दिखाना।


परिणाम क्या हो सकते हैं

🔸 GST विभाग द्वारा Registration Cancellation (पंजीयन निरस्तीकरण)
🔸 Penalty & Tax Demand — टैक्स चोरी पाए जाने पर 100% तक जुर्माना
🔸 Income Tax Investigation — छिपे लेनदेन पर धारा 132 के तहत छापा
🔸 Business Blacklisting — भविष्य में नया GST नंबर न मिलने की संभावना


जल्द पड़ सकता है GST और Income Tax का छापा

कर विशेषज्ञों के मुताबिक, इन फर्मों की गतिविधियाँ इनवॉइस स्प्लिटिंग, टैक्स चोरी, और फर्जी बिलिंग के संकेत देती हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जीएसटी इंटेलिजेंस और आयकर विभाग ने इस पूरे नेटवर्क की जानकारी संज्ञान में ले ली है।
ऐसे में जल्द ही नीमच मंडी में छापेमारी की कार्रवाई हो सकती है।

“एक ही मंडी, एक ही परिवार, तीन रजिस्ट्रेशन — कानून की किताब में इसे वैध नहीं, ‘विभाजित कारोबार’ कहा जाता है।”

अब बारी है कि GST और आयकर विभाग यह तय करें कि “परंपरा” के नाम पर “अनियमितता” को कब तक ढोया जाएगा।


व्यापारियों का तंज – “यहाँ मंडी नहीं, मिलीभगत मंडल है”

स्थानीय व्यापारियों ने इस व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा —

“यहाँ मंडी नहीं, मिलीभगत मंडल चल रहा है। नियम सिर्फ कागज़ों में हैं, बाकी सब किरायानामे की दीवार के पीछे छिपा है।”
“ईमानदार व्यापारी जहाँ अनुमति के लिए महीनों भटकते हैं, वहीं रिश्तेदारी वाले एक ही छत से तीन-तीन फर्में चला रहे हैं।”


अब सवाल — क्या होगी निष्पक्ष जांच?

जनता अब प्रशासन से जवाब चाहती है —
क्या मंडी इंस्पेक्टर खुद की ही कही वैधता की जांच करवाएँगे?
या यह मामला भी कुछ दिनों में “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा?

कानून तो साफ है — लेकिन नीमच मंडी में कानून नहीं, संबंध और सुविधा चल रही है।