नीमच मंडी में ‘परिवार लिमिटेड’ का खेल – एक ही छत के नीचे तीन फर्में, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल!
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
29 अक्टूबर 2025, (अपडेटेड 29 अक्टूबर 2025, 6:17 अपराह्न IST)
  • एक ही परिवार की तीन कंपनियां चला रहीं कारोबार

  • धानुका सोया और धिरेन्द्र सोया जैसे बड़े व्यापारी भी वर्षों से इसी तरह के लेनदेन करते आ रहे हैं।

  • मंडी सचिव बोले – “यह सब वैध है”, पर कानून कहता है कुछ और….

नीमच। नीमच मंडी प्रांगण में नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक ही परिवार के तीन सदस्य एक ही पते से अलग-अलग नामों से व्यापार कर रहे हैं और मंडी प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

जानकारी के अनुसार,
1️⃣ प्रदीप एंड कंपनी (नितिन बम) (GST नंबर :  23AZMPB3417B1Z2)
2️⃣ रिषभ कॉरपोरेशन (मनोहरलाल बम) (GST नंबर : 23ACFPB4958F1ZW)
3️⃣ दिवाकर ट्रेडिंग कंपनी (सुनील कुमार बम)  (GST नंबर : 23AZMPB3417B1Z2)
तीनों फर्मों का पता मंडी प्रांगण, नीमच ही है और कारोबार लगभग समान — कृषि उत्पाद, तिलहन और मसालों का व्यापार।


मंडी इंस्पेक्टर समीर दास बोले — “यह वैध है”

पूरे मामले पर जब मंडी इंस्पेक्टर समीर दास से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा —

“यह पूरी तरह से वैध है। कई व्यापारियों को गोदाम नहीं मिलता, इसलिए वे अपने परिवार या मित्रों के गोदाम का किरायानामा लगाकर लेनदेन करते हैं। यह कोई नई बात नहीं, सालों से ऐसा ही चल रहा है।”

मंडी इंस्पेक्टर के इस बयान ने सवाल और गहरे कर दिए हैं —
अगर यह सालों से चल रहा है, तो क्या अब ‘रिवाज़’ ही कानून बन चुका है?


 ‘धानुका सोया’ और ‘धिरेन्द्र सोया’ जैसे बड़े नाम भी शामिल

सूत्रों के अनुसार, इस “गोदाम किरायानामा संस्कृति” में छोटे नहीं, बल्कि धानुका सोया और धिरेन्द्र सोया जैसे बड़े व्यापारी भी वर्षों से इसी तरह के लेनदेन करते आ रहे हैं।
यानि मजबूरी नहीं, बल्कि सुविधा और सिस्टम का फायदा बन चुका है यह तरीका।


कानून क्या कहता है?

दुकान स्थापना अधिनियम (Shop & Establishment Act)

“एक ही परिसर में एक ही परिवार द्वारा समान प्रकृति की एक से अधिक फर्मों का संचालन अनुचित है। प्रत्येक व्यवसाय को अलग प्रतिष्ठान और अलग पते से संचालित किया जाना आवश्यक है।”

जीएसटी कानून (GST Act, 2017)

धारा 25(2)रूल 8(1) के अनुसार,
“एक ही पते से एक ही स्वामित्व या समान व्यापारिक प्रकृति के लिए अलग-अलग जीएसटी नंबर नहीं दिए जा सकते, जब तक कि वे अलग व्यवसाय न हों।”

ऐसे मामलों में टैक्स चोरी, बिलिंग हेराफेरी और इनवॉइस स्प्लिटिंग के आरोप बन सकते हैं।


संभावित कर अपराध (Tax Offence)

• फर्जी इनवॉइस जारी करना — ताकि लेनदेन तीन हिस्सों में बाँटकर टैक्स से बचा जा सके।
• टर्नओवर सीमा से नीचे दिखाना — GST रजिस्ट्रेशन की सीमा (₹40 लाख/₹1 करोड़) से बचने के लिए।
• ITC का दुरुपयोग — एक फर्म से खरीदी गई वस्तु का इनपुट क्रेडिट दूसरी फर्म में दिखाना।


परिणाम क्या हो सकते हैं

🔸 GST विभाग द्वारा Registration Cancellation (पंजीयन निरस्तीकरण)
🔸 Penalty & Tax Demand — टैक्स चोरी पाए जाने पर 100% तक जुर्माना
🔸 Income Tax Investigation — छिपे लेनदेन पर धारा 132 के तहत छापा
🔸 Business Blacklisting — भविष्य में नया GST नंबर न मिलने की संभावना


जल्द पड़ सकता है GST और Income Tax का छापा

कर विशेषज्ञों के मुताबिक, इन फर्मों की गतिविधियाँ इनवॉइस स्प्लिटिंग, टैक्स चोरी, और फर्जी बिलिंग के संकेत देती हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जीएसटी इंटेलिजेंस और आयकर विभाग ने इस पूरे नेटवर्क की जानकारी संज्ञान में ले ली है।
ऐसे में जल्द ही नीमच मंडी में छापेमारी की कार्रवाई हो सकती है।

“एक ही मंडी, एक ही परिवार, तीन रजिस्ट्रेशन — कानून की किताब में इसे वैध नहीं, ‘विभाजित कारोबार’ कहा जाता है।”

अब बारी है कि GST और आयकर विभाग यह तय करें कि “परंपरा” के नाम पर “अनियमितता” को कब तक ढोया जाएगा।


व्यापारियों का तंज – “यहाँ मंडी नहीं, मिलीभगत मंडल है”

स्थानीय व्यापारियों ने इस व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा —

“यहाँ मंडी नहीं, मिलीभगत मंडल चल रहा है। नियम सिर्फ कागज़ों में हैं, बाकी सब किरायानामे की दीवार के पीछे छिपा है।”
“ईमानदार व्यापारी जहाँ अनुमति के लिए महीनों भटकते हैं, वहीं रिश्तेदारी वाले एक ही छत से तीन-तीन फर्में चला रहे हैं।”


अब सवाल — क्या होगी निष्पक्ष जांच?

जनता अब प्रशासन से जवाब चाहती है —
क्या मंडी इंस्पेक्टर खुद की ही कही वैधता की जांच करवाएँगे?
या यह मामला भी कुछ दिनों में “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा?

कानून तो साफ है — लेकिन नीमच मंडी में कानून नहीं, संबंध और सुविधा चल रही है।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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