उपेक्षा का शिकार नीमच का ऐतिहासिक जावी कमल सरोवर, सौंदर्यीकरण योजना फाइलों में कैद!

Shubham Solar Solution

नीमच: जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित जावी का ऐतिहासिक कमल सरोवर, जो पूरे नीमच जिले की शान और पहचान है, आज प्रशासन की घोर उपेक्षा का शिकार होकर बदहाली के आंसू बहा रहा है। मंदसौर के तेलिया तालाब की तर्ज पर इसके सौंदर्यीकरण और विकास की बहुप्रतीक्षित योजनाएँ केवल सरकारी फाइलों की धूल फांक रही हैं, और धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हो सका है।

​कमल के दुर्लभ फूलों के लिए विख्यात यह प्राचीन सरोवर मौर्यकालीन महत्व रखता है, जैसा कि किनारे लगे शिलालेख से पता चलता है। ग्रामीणों का मानना है कि यहां खिलने वाले अष्ठदल कमल (दुर्लभ प्रजाति) का वर्णन रामचरित मानस और पुराणों में भी मिलता है। किंवदंतियों के अनुसार, एक संत कैलाश मानसरोवर से 108 पंखुड़ियों वाले विशेष कमल के फूल लाए थे, जिसने इस पूरे तालाब को कमल वाटिका में बदल दिया था।

​बदहाल सफाई व्यवस्था और टूटे सपने

​सौंदर्यीकरण के प्रथम चरण के मास्टर प्लान में तालाब के चारों ओर रेलिंग, इंटरलॉक ब्लॉक और सौर ऊर्जा से रोशनी जैसी सुविधाओं को शामिल किया गया था, ताकि इसे एक आकर्षक पर्यटन स्थल बनाया जा सके। लेकिन, हकीकत यह है कि तालाब के किनारे गंदगी और कचरे के ढेर लगे हैं, जो स्थानीय सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।

​सन 2000-2002 में अल्पवर्षा के कारण तालाब सूख गया था, जिसके बाद हुई खुदाई से कमल खिलना बंद हो गए थे। हालांकि, 2006 में भारी बरसात के बाद कमल फिर से खिलने लगे और गांव की पहचान बन गए। बावजूद इसके, प्रशासन की उदासीनता ने वर्षों पुराने इस जलाशय को बदहाली की खाई में धकेल दिया है। जावी के ग्रामीणों ने अब मांग की है कि इस प्राचीन धरोहर को संरक्षित करने और योजना को तुरंत अमल में लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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