खेल मैदान बनाम सीएम राइज़ स्कूल: नीमच में खिलाड़ियों का अभूतपूर्व विरोध, प्रशासन से भावुक अपील

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नीमच | शहर के खेल इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना सामने आई है, जहाँ सीएम राइज़ स्कूल के प्रस्तावित निर्माण को लेकर सैकड़ों की संख्या में खिलाड़ी सड़क पर उतर आए हैं। गुरुवार को शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 के एकमात्र बहु-खेल मैदान को बचाने के लिए बास्केटबॉल, क्रिकेट, फुटबॉल और एथलेटिक्स से जुड़े खिलाड़ियों ने एकता का प्रदर्शन किया।

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एकजुट होकर सौंपा ज्ञापन: ‘यह मैदान हमारी पहचान है’

स्थानीय विधायक दिलीप सिंह परिहार और जिला कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में खिलाड़ियों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि स्कूल का निर्माण तत्काल किसी अन्य उपयुक्त जगह पर स्थानांतरित किया जाए। खिलाड़ियों ने तर्क दिया कि यह मैदान दशकों से नीमच की खेल संस्कृति का केंद्र रहा है।

खिलाड़ियों का पक्ष: यह नीमच का एकमात्र ऐसा खेल परिसर है जो विभिन्न खेलों की सुविधाएँ प्रदान करता है—इसमें दो बास्केटबॉल कोर्ट, एक फुटबॉल ग्राउंड, क्रिकेट पिच और एक एथलेटिक ट्रैक शामिल हैं। वर्षों से यहीं अभ्यास करके राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेकों प्रतिभाएँ उभरी हैं।

अंतरराष्ट्रीय सफलता का साक्षी यह मैदान

खिलाड़ियों ने प्रशासन को याद दिलाया कि इस मैदान की मिट्टी से निकली प्रतिभाओं ने देश का नाम रोशन किया है। हाल ही में, इसी मैदान से निकले तीन खिलाड़ियों का चयन भारतीय टीम में हुआ। इनमें से एक खिलाड़ी ने तो जर्मनी में आयोजित वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भारत को 45 साल बाद बहुप्रतीक्षित स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रचा है।

इसके अलावा, कई युवाओं को सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ और रेलवे जैसी प्रतिष्ठित सरकारी सेवाओं में खेल कोटे के माध्यम से चयनित होने में भी इस मैदान का योगदान रहा है।

शिक्षा और खेल का संतुलन: खिलाड़ियों की अपील

खिलाड़ियों ने साफ किया कि वे शिक्षा के विकास के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसे समाधान की मांग कर रहे हैं जो शिक्षा और खेल दोनों के समान विकास को सुनिश्चित कर सके। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि सीएम राइज़ स्कूल का निर्माण या तो पुराने, अप्रयुक्त विद्यालय भवन को हटाकर किया जाए, या फिर कोई दूसरा स्थान चुना जाए, ताकि भविष्य में भी नीमच खेल के मानचित्र पर अपनी पहचान बनाए रख सके।

यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है कि वह शिक्षा की आवश्यकता और खेल प्रतिभाओं के भविष्य के बीच कैसे संतुलन स्थापित करता है।

 

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