अलविदा ही-मैन: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का 89 साल की उम्र में निधन, सिनेमा के एक सुनहरे युग का अंत
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
24 नवम्बर 2025, (अपडेटेड 24 नवम्बर 2025, 6:20 अपराह्न IST)

मुंबई, 24 नवंबर 2025: भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ और अपनी बेमिसाल अदाकारी से छह दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में आज उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरा बॉलीवुड और देश गमगीन है।

लंबी बीमारी के बाद ली अंतिम सांस प्राप्त जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें 31 अक्टूबर, 2025 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 10 नवंबर को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद से डॉक्टर्स की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। बाद में उन्हें घर लाया गया, जहाँ उनका इलाज जारी था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार पवन हंस श्मशान घाट पर किया जाएगा।

परिवार और सितारों का जमावड़ा धर्मेंद्र के अंतिम समय में उनका पूरा परिवार उनके साथ था। पत्नी हेमा मालिनी, बेटे सनी और बॉबी देओल, बेटियां ईशा, अहाना, विजेता और अजीता सहित पोते करण और राजवीर देओल अस्पताल में मौजूद थे। खबर मिलते ही सलमान खान, शाहरुख खान, गोविंदा और अमीषा पटेल समेत कई बड़े सितारे अंतिम दर्शन के लिए पहुँचे।

65 साल का बेमिसाल सफर पंजाब के नसरानी गाँव से निकलकर मुंबई आए धर्मेंद्र ने 1960 में फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से शुरुआत की थी। 65 साल के करियर में उन्होंने ‘शोले’, ‘चुपके-चुपके’, ‘धर्मवीर’ और ‘फूल और पत्थर’ जैसी कालजयी फिल्में दीं। हाल ही में 2023 में ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ और 2024 में ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी।

मरणोपरांत रिलीज होगी ‘इक्कीस’ धर्मेंद्र काम के प्रति इतने समर्पित थे कि 89 साल की उम्र में भी वे एक्टिव थे। उनकी आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ इसी साल 25 दिसंबर, 2025 को रिलीज होने वाली है, जिसमें वे अगस्त्य नंदा के पिता की भूमिका में नजर आएंगे। यह फिल्म अब उनके चाहने वालों के लिए एक आखिरी तोहफा होगी।

पंजाब के मालवा क्षेत्र से गहरा नाता धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को किशन सिंह व सतवंत कौर के घर हुआ था। उनका गहरा नाता पंजाब के मालवा क्षेत्र से था, विशेष रूप से लुधियाना व मालेरकोटला जिलों से, जहाँ उनके सबसे अधिक प्रशंसक थे। अभिनेता का शुरुआती जीवन सादगी और संघर्ष से भरा रहा। उन्होंने अपने पिता किशन सिंह दियोल के बार-बार तबादलों के कारण अपना बचपन कई जगहों पर बिताया।

शिक्षा: उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी हाई स्कूल, ललतों से प्राप्त की, जहाँ उनके पिता हेडमास्टर थे।

ट्यूबवेल ऑपरेटर: सुपरस्टार बनने से पहले, धर्मेंद्र ने मालेरकोटला जिले के बनभौरा गांव में ट्यूबवेल ऑपरेटर के रूप में भी काम किया।

किसान का बेटा: पारिवारिक रिश्तों में भतीजे बूटा सिंह देओल के अनुसार, धर्मेंद्र अपने पिता से बेहद स्नेह रखते थे और उन्होंने ही खेती की जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी संभाली थी।

बनभौरा गांव के बुजुर्ग गुरमेल सिंह याद करते हैं कि धर्मेंद्र अपने साथी दिलबाग राय के साथ मिलकर किसानों को उनकी फसलों के लिए समय पर पानी उपलब्ध कराने हेतु रात में ट्यूबवेल चलाने का समय निर्धारित करते थे।

स्टारडम के शिखर पर भी नहीं भूले अपना गाँव धर्मेंद्र का व्यक्तित्व उनकी ज़मीन से जुड़े होने की निशानी था। मशहूर होने के बाद भी उनका गाँव और खेती से लगाव कम नहीं हुआ। बूटा सिंह देओल बताते हैं कि फिल्मी करियर के चरम पर होने के बावजूद, जब भी धर्मेंद्र अपने पैतृक डांगो गांव आते थे, तो वे अपने खेतों में ट्रैक्टर चलाना नहीं भूलते थे। डांगो के अलावा उन्होंने अपना बचपन अपनी मां के पैतृक गांव नसराली हैबोवाल में भी बिताया। वे न सिर्फ अपने काम पर ध्यान देते थे, बल्कि लोगों के सुख-दुख में भी शामिल होते थे। ट्यूबवेल ऑपरेटर की ड्यूटी के दौरान भी वे अक्सर लोगों के बीच आकर उनकी समस्याओं को हल करने में मदद करते थे।

धर्मेंद्र पर किताब लिख रहे डॉ. दविंदर अशोक ने उन्हें बेहद नम्र, सरल और बहुप्रतिभाशाली व्यक्ति बताया, जिन्होंने कभी किसी को निराश नहीं किया।

भारतीय सिनेमा में उनका योगदान अमूल्य है, और उनकी असाधारण यात्रा—एक साधारण ट्यूबवेल ऑपरेटर से लेकर बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ सुपरस्टार बनने तक की—हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।

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Aakash Sharma
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