UNESCO World Heritage Diwali: ऐतिहासिक पल! दिवाली बनीं विश्व धरोहर, PM मोदी बोले- ‘यह पर्व हमारी सभ्यता की आत्मा’; कुंभ मेले के बाद भारत की 16वीं बड़ी उपलब्धि
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
10 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 10 दिसम्बर 2025, 2:27 अपराह्न IST)

नई दिल्ली: UNESCO World Heritage Diwali भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के लिए आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने भारत के सबसे बड़े त्यौहार ‘दिवाली’ (Deepawali) को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल कर लिया है।

UNESCO World Heritage Diwali घोषित होने के साथ ही भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) को एक नई उड़ान मिली है। इससे पहले कुंभ मेला और दुर्गा पूजा जैसे उत्सवों को यह सम्मान मिल चुका है, लेकिन दिवाली का इस सूची में आना वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासियों और सनातन संस्कृति की बहुत बड़ी जीत मानी जा रही है।

PM मोदी की पहली प्रतिक्रिया: ‘दिवाली सिर्फ त्यौहार नहीं, एक विचार है’

इस ऐतिहासिक घोषणा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपार हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि UNESCO World Heritage Diwali की घोषणा हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।PM मोदी ने अपने संदेश में कहा,

दिवाली केवल दीपों का उत्सव नहीं है, यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह अंधकार पर प्रकाश की, अज्ञान पर ज्ञान की और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यूनेस्को का यह निर्णय हमारी हजारों साल पुरानी परंपरा के प्रति वैश्विक सम्मान को दर्शाता है

प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित करते हुए कहा कि अब पूरी दुनिया ‘प्रकाश के पर्व’ को एक नई दृष्टि से देखेगी।

UNESCO ने क्यों चुना दिवाली को?

यूनेस्को की इंटरगवर्नमेंटल कमेटी ने बोत्सवाना में आयोजित अपने सत्र के दौरान यह फैसला लिया। UNESCO World Heritage Diwali को इस लिस्ट में शामिल करने के पीछे कई ठोस कारण दिए गए हैं:

  1. वैश्विक प्रसार: दिवाली अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, दुबई और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इसे राष्ट्रीय उत्सव की तरह मनाया जाता है।

  2. सामाजिक समरसता: यह त्यौहार जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ता है।

  3. आर्थिक महत्व: स्थानीय कारीगरों (मिट्टी के दीye बनाने वाले) से लेकर बड़े बाजारों तक, यह त्यौहार अर्थव्यवस्था में जान फूंकता है।

भारत की 15 धरोहरें पहले से शामिल, दिवाली बनी 16वीं विरासत

यह पहली बार नहीं है जब भारत की किसी परंपरा को यूनेस्को ने सराहा है। UNESCO World Heritage Diwali के जुड़ने से पहले भारत की 15 सांस्कृतिक विरासतों को यह दर्जा प्राप्त था।

इन प्रमुख विरासतों में शामिल हैं:

  • कुंभ मेला (Kumbh Mela)

  • कोलकाता की दुर्गा पूजा (Durga Puja)

  • योग (Yoga)

  • वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा

  • रामलीला

  • राजस्थान का कालबेलिया लोक गीत और नृत्य

  • लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चार

UNESCO World Heritage Diwali  दिवाली के जुड़ने से यह लिस्ट और भी समृद्ध हो गई है। यह दर्शाता है कि भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ दुनिया में कितनी तेजी से बढ़ रही है।

दुनियाभर में जश्न का माहौल

जैसे ही UNESCO World Heritage Diwali की खबर आई, न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी जश्न शुरू हो गया। अमेरिका के व्हाइट हाउस से लेकर लंदन के ट्रफलगर स्क्वायर तक, भारतीय समुदाय के लोग एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस टैग के मिलने के बाद दिवाली पर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन (International Tourism) को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि विदेशी सैलानी अब इस ‘वर्ल्ड हेरिटेज फेस्टिवल’ को देखने भारत आएंगे।

निष्कर्ष

दिवाली को विश्व धरोहर का दर्जा मिलना यह साबित करता है कि भारतीय संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी और प्रभावशाली हैं। UNESCO World Heritage Diwali का यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति पर गर्व करने का एक और कारण देगा। अब जिम्मेदारी हमारी है कि हम इस त्यौहार की पवित्रता और इसके पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप को बनाए रखें।


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Aakash Sharma
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