Census 2027 Digital India: 11718 करोड़ मंजूर, मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, 2 चरणों में होगी गिनती

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Census 2027 Digital India

Census 2027 Digital India

नई दिल्ली: Census 2027 Digital India प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के भविष्य को लेकर कई दूरगामी और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। सरकार ने बहुप्रतीक्षित Census 2027 Digital India (जनगणना 2027) के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। आजादी के बाद यह देश की 8वीं और कुल मिलाकर 16वीं जनगणना होगी, लेकिन तकनीकी लिहाज से यह भारत की ‘पहली डिजिटल जनगणना’ होगी।

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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इस महाअभियान के लिए सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है। इसके अलावा, ऊर्जा सुरक्षा के लिए ‘कोल सेतु’ और किसानों के लिए खोपरा (Copra) की एमएसपी बढ़ाने जैसे बड़े निर्णय भी लिए गए हैं।

Census 2027 Digital India: अब मोबाइल ऐप से होगी घर-घर गिनती

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि Census 2027 Digital India पूरी तरह से पेपरलेस और हाई-टेक होगी। अब मोटे रजिस्टरों और कागजों का दौर खत्म हो गया है। इस बार जनगणना में मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए डेटा कलेक्ट किया जाएगा।

  • 30 लाख कर्मचारी जुटेंगे: इस विशालकाय अभियान को पूरा करने के लिए देश भर के करीब 30 लाख कर्मचारी मैदान में उतरेंगे।

  • बहुभाषी सुविधा: जिस मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग किया जाएगा, उसमें हिंदी और अंग्रेजी के अलावा सभी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं का विकल्प होगा, ताकि सटीक जानकारी जुटाई जा सके।

  • Census-as-a-Service: सरकार का लक्ष्य है कि मंत्रालयों और नीति निर्माताओं को साफ-सुथरा और मशीन-रीडेबल डेटा मिले, जिसे ‘सेंसस-एज-ए-सर्विसेज’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।

Census 2027 Digital India दो चरणों में पूरा होगा जनगणना का महाकुंभ

सरकार ने इस विशाल प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए दो चरणों का रोडमैप तैयार किया है:

  1. पहला चरण (हाउस लिस्टिंग): यह चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें मकानों की सूची और आवास संबंधी जानकारी (Housing Census) जुटाई जाएगी।

  2. दूसरा चरण (जनसंख्या गणना): मुख्य जनगणना का काम, यानी लोगों की गिनती, फरवरी 2027 में की जाएगी।

पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष नियम: लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फीले इलाकों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे दुर्गम क्षेत्रों में मौसम की चुनौतियों को देखते हुए जनसंख्या गणना का काम पहले चरण के साथ ही, यानी सितंबर 2026 में पूरा कर लिया जाएगा।

जाति बताना स्वैच्छिक, डेटा सुरक्षा की फुल गारंटी

Census 2027 Digital India जनगणना को लेकर अक्सर निजता (Privacy) और जातिगत आंकड़ों पर सवाल उठते रहे हैं। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि Census 2027 Digital India का डिजिटल डिजाइन डेटा सुरक्षा (Data Protection) के कड़े मानकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।अश्विनी वैष्णव ने कहा,
   “सेंसस को लेकर जल्द ही एक विस्तृत गजट नोटिफिकेशन जारी होगा। जहां तक जाति का सवाल है, इसे बताना अनिवार्य नहीं है। यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। कोई चाहे तो जानकारी दे सकता है और न चाहे तो मना कर सकता है।”

सरकार ने यह भी साफ किया है कि केवल ‘एग्रीगेटेड डेटा’ (समग्र आंकड़े) ही प्रकाशित किए जाएंगे। किसी भी व्यक्ति का ‘माइक्रो डेटा’ (निजी जानकारी) सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

नीति निर्माण में गेम चेंजर साबित होगा डेटा

Census 2027 Digital India केवल सिरों की गिनती नहीं है। यह गांव, कस्बों और वार्ड स्तर पर प्राथमिक आंकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें आवास की स्थिति, सुविधाएं, संपत्ति, साक्षरता, धर्म, एससी-एसटी, प्रवासन, प्रजनन और आर्थिक गतिविधियों जैसे कई अहम पहलुओं का डेटा शामिल होगा। यह डेटा सरकार को भविष्य की नीतियां बनाने और उन्हें सटीक रूप से लागू करने में मदद करेगा। यह जनगणना 1948 के जनगणना अधिनियम और 1990 के नियमों के तहत आयोजित की जाएगी।


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