नीमच। नीमच जिले के जयसिंहपुरा गांव में बुधवार को हुई अतिक्रमण कार्रवाई के बाद हालात अचानक बिगड़ गए और 60 वर्षीय नानूराम जाटव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया है।
परिजनों ने जिला अस्पताल में हंगामा करते हुए पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशील विवाद बन गया है, जिसमें अतिक्रमण कार्रवाई की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
बिना सूचना पहुंची टीम, कोर्ट केस का दिया गया हवाला
परिवार का आरोप है कि प्रशासनिक अमला और पुलिस बिना किसी पूर्व सूचना के नई आबादी क्षेत्र में पहुंचे और सीधे अतिक्रमण कार्रवाई शुरू कर दी। परिजनों का कहना है कि जिस जमीन को लेकर कार्रवाई की गई, वह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
मृतक की नातिन ममता जाटव के अनुसार, जब नानूराम ने कोर्ट केस का हवाला देते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाया, तो पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की और कथित रूप से मारपीट की। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया।
मारपीट और मानसिक दबाव से बिगड़ी हालत
परिजनों का दावा है कि अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान हुई कथित मारपीट और मानसिक दबाव के कारण नानूराम की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
परिवार का कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं है, बल्कि प्रशासनिक दबाव का नतीजा है। इस आरोप ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
झोपड़ी में आग लगाने और सबूत मिटाने का आरोप
मामले में एक और गंभीर मोड़ तब आया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान उनकी झोपड़ी में आग लगा दी गई। उनका दावा है कि सरपंच के बेटे और पुलिसकर्मियों ने मिलकर यह घटना अंजाम दी।
इसके साथ ही, घटना के दौरान बनाए जा रहे वीडियो को लेकर भी विवाद सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनके मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट करवा दिए, ताकि साक्ष्य मिटाए जा सकें। इन आरोपों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
40 वर्षों से रह रहा परिवार, बार-बार कार्रवाई का आरोप
परिवार का कहना है कि वे पिछले 40 वर्षों से उसी स्थान पर रह रहे हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2024 से उन्हें लगातार हटाने की कोशिश की जा रही है।
ममता जाटव ने बताया कि यह पांचवीं बार है जब प्रशासन अतिक्रमण कार्रवाई के लिए उनके घर पहुंचा।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले उनके परिवार के एक सदस्य को जेल भेजा गया था, जिसे बाद में कुछ ही दिनों में रिहा कर दिया गया।
प्रशासन का पक्ष: कार्रवाई पूरी तरह नियम अनुसार
वहीं दूसरी ओर, प्रशासन ने परिजनों के सभी आरोपों को खारिज किया है। एसडीएम संजीव साहू के अनुसार, अतिक्रमण कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार और शांतिपूर्ण ढंग से की गई थी।
उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि डोम निर्माण के लिए चिन्हित है और कार्रवाई से पहले विधिवत नोटिस जारी किया गया था। प्रशासन का यह भी दावा है कि आगजनी की घटना परिजनों द्वारा खुद की गई है, ताकि प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।
गांव में तनाव का माहौल, जांच की मांग तेज
घटना के बाद जयसिंहपुरा गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान क्या हुआ, इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।
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