नीमच: पैरा लीगल वॉलिंटियर्स का प्रशिक्षण संपन्न, विधिक साक्षरता और जनसेवा का लिया संकल्प

Para Legal Volunteer Training

Para Legal Volunteer Training

नीमच (रिपोर्टर): न्याय और समाज के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से Para Legal Volunteer Training का एक विशेष सत्र नीमच जिला न्यायालय में आयोजित किया गया। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के दिशा-निर्देशों और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री वीरेंद्र सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में, 14 दिसंबर 2025 को नव-नियुक्त वॉलिंटियर्स को कानून की बारीकियां सिखाई गईं।

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Para Legal Volunteer Training शिविर में समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने के लिए वॉलिंटियर्स को न केवल किताबी ज्ञान दिया गया, बल्कि फील्ड में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार किया गया।

दीप प्रज्वलन और संवेदनशीलता का पाठ

Para Legal Volunteer Training कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी एक्ट) श्री आलोक कुमार सक्सेना और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती शोभना मीणा द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

अपने उद्घाटन उद्बोधन में विशेष न्यायाधीश श्री सक्सेना ने Para Legal Volunteer Training के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा,

“एक पीएलवी (PLV) केवल एक स्वयंसेवक नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है। फील्ड में कार्य करते समय आपकी संवेदनशीलता और पीड़ितों के प्रति आपका व्यवहार ही न्यायपालिका पर उनके विश्वास को मजबूत करता है।”

उन्होंने सभी वॉलिंटियर्स को पूर्ण एकाग्रता के साथ कानूनों को समझने और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

महिला एवं बाल सुरक्षा कानूनों पर विशेष सत्र

प्रशिक्षण के तकनीकी सत्रों की शुरुआत बेहद संवेदनशील मुद्दों से हुई। श्रीमती रश्मि मिश्रा, विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) ने Para Legal Volunteer Training के दौरान ‘पॉक्सो एक्ट’ (POCSO Act) की गहराइयों को समझाया। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में किस प्रकार रिपोर्ट दर्ज करानी है और पीड़ित प्रतिकार योजना (Victim Compensation Scheme) के तहत पीड़ितों को कैसे आर्थिक सहायता दिलाई जा सकती है।

वहीं, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड सुश्री अंकिता गुप्ता ने एक विस्तृत सत्र लिया जिसमें उन्होंने निम्नलिखित विषयों को कवर किया:

  • किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act): बच्चों की देखरेख और संरक्षण।

  • घरेलू हिंसा अधिनियम: महिलाओं को घर के भीतर सुरक्षा प्रदान करना।

  • दहेज प्रतिषेध अधिनियम: सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कानूनी प्रावधान।

  • दत्तक ग्रहण और कस्टडी: गोद लेने और बच्चों की कस्टडी से जुड़े पेचीदा नियम।

सामान्य कानून और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार

कानून की जानकारी हर आम आदमी के लिए जरूरी है, इसी उद्देश्य से व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड श्री अंकित जैन ने दैनिक जीवन में काम आने वाले कानूनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम’ पर विस्तार से चर्चा की, जो आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। इसके अलावा, उन्होंने चेक बाउंस (धारा 138 एनआई एक्ट), हिंदू विवाह अधिनियम और तलाक से जुड़ी विधिक प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया।

प्रशासन, पुलिस और जेल नियमावली का प्रशिक्षण

एक सफल पीएलवी को पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करना होता है। इस Para Legal Volunteer Training में यह पहलू भी अछूता नहीं रहा:

  1. जेल अधिकार: जिला जेल नीमच के अधीक्षक श्री एन.एस. राणा ने बंदियों के विधिक अधिकारों और जेल मैनुअल की जानकारी दी।

  2. लोक सेवा गारंटी: डिप्टी कलेक्टर श्री चंद्र सिंह धार्वे ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय सीमा में सेवाएं प्राप्त करने के तरीके बताए।

  3. पुलिस प्रक्रिया: कंट्रोल रूम प्रभारी श्री सौरभ शर्मा ने गिरफ्तारी के नियम, जमानत की प्रक्रिया और एक अभियुक्त के संवैधानिक अधिकारों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

उपभोक्ता अधिकार और कौशल विकास

असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल सुश्री अर्पिता संघवी ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पर सत्र लेते हुए बताया कि कैसे एक पीएलवी लोगों को ठगी से बचा सकता है। वहीं, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री प्रवीण कुमार ने नालसा (NALSA) की विभिन्न योजनाओं, लोक अदालत की उपयोगिता और मध्यस्थता (Mediation) के जरिए विवाद निपटाने के तरीके बताए।

समापन: कौशल विकास और संकल्प

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में सचिव श्रीमती शोभना मीणा ने Para Legal Volunteer Training का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने वॉलिंटियर्स की कम्युनिकेशन स्किल्स, ऑब्ज़र्वेशन और ड्राफ्टिंग स्किल्स (लिखा-पढ़ी) पर विशेष कक्षा ली। उन्होंने समझाया कि एक अच्छी अर्जी या आवेदन कैसे लिखा जाता है।

प्रशिक्षण के अंत में, सभी नव-नियुक्त पैरा लीगल वॉलिंटियर्स ने संकल्प लिया कि वे लीगल सर्विस क्लीनिकों के माध्यम से आमजन को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाएंगे और समाज में विधिक जागरूकता की अलख जगाएंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम निश्चित रूप से नीमच जिले में विधिक सहायता को नए आयाम देगा।


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