Neemuch Mobile Tower Incident: 100 फिट ऊंचे टॉवर पर ‘मौत’ का खेल, पुलिस ने ऐसे बचाई जान
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
17 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 17 दिसम्बर 2025, 7:46 अपराह्न IST)

नीमच: Neemuch Mobile Tower Incident मप्र के नीमच जिले में 17 दिसंबर 2025 की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक शख्स अपनी जान की परवाह किए बिना मोबाइल टॉवर की सबसे ऊंची चोटी पर जा चढ़ा। नीचे सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ और ऊपर मौत के मुहाने पर खड़ा एक ज़िद्दी शख्स। यह नजारा था थाना जावद क्षेत्र के ग्राम सुवाखेड़ा का। इस Neemuch Mobile Tower Incident ने न केवल प्रशासन की सांसें फूला दीं, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। गनीमत रही कि पुलिस की तत्परता और मानवीय संवेदना ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।

Neemuch Mobile Tower Incident क्या था पूरा मामला?

Neemuch Mobile Tower Incident दरअसल, ग्राम सुवाखेड़ा में एक व्यक्ति का अपनी पुश्तैनी जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह सिस्टम और सुनवाई न होने से इतना आहत था कि उसने विरोध जताने का सबसे खतरनाक तरीका चुना। बुधवार की सुबह, जब लोग अपने काम पर जा रहे थे, तभी यह शख्स गांव में लगे एक विशालकाय मोबाइल टॉवर पर चढ़ने लगा।

जब तक लोग कुछ समझ पाते और उसे रोकते, वह टॉवर के ऊपरी हिस्से तक पहुँच चुका था। वहां से वह लगातार कूदने की धमकी दे रहा था। हवा के तेज झोंकों के बीच उसका संतुलन बिगड़ते देख नीचे खड़े ग्रामीणों की चीखें निकल रही थीं।

Dial-112: संकटमोचक बनकर पहुंची टीम

Neemuch Mobile Tower Incident घटना की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्काल राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम भोपाल को सूचित किया। सूचना मिलते ही Neemuch Mobile Tower Incident की लोकेशन को ट्रेस किया गया और तुरंत स्थानीय डायल-112 एफआरवी (First Response Vehicle) को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 पर तैनात आरक्षक हिमांशु परमार और पायलट विनोद शर्मा बिना एक पल गंवाए घटना स्थल पर पहुंचे। वहां का मंजर बेहद तनावपूर्ण था। भीड़ वीडियो बना रही थी और शोरगुल के कारण टॉवर पर चढ़ा व्यक्ति और भी ज्यादा आक्रामक हो रहा था।

सांसें थाम देने वाला रेस्क्यू ऑपरेशन

Neemuch Mobile Tower Incident मौके पर पहुंचते ही आरक्षक हिमांशु परमार ने सबसे पहले भीड़ को टॉवर से दूर किया ताकि उस व्यक्ति का ध्यान न भटके। इसके बाद जावद थाना प्रभारी श्री जितेन्द्र वर्मा भी अपनी टीम के साथ वहां पहुंच गए। यहीं से शुरू हुआ जिंदगी और मौत के बीच बातचीत का सिलसिला।

“पुलिस के लिए यह सिर्फ़ एक लॉ एंड आर्डर का मसला नहीं था, बल्कि एक इंसान को ज़िंदा बचाने की चुनौती थी। एक छोटी सी गलती, और परिणाम भयानक हो सकते थे।”

थाना प्रभारी और डायल-112 के जवानों ने लाउडस्पीकर के जरिए उस व्यक्ति से संवाद स्थापित किया। उसे भरोसा दिलाया गया कि उसकी जमीन विवाद की समस्या का समाधान पुलिस और प्रशासन मिलकर प्राथमिकता से करेंगे।

जब बातचीत से पिघला गुस्सा 

Neemuch Mobile Tower Incident इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण वह क्षण था जब पुलिस टीम ने मनोवैज्ञानिक तरीके से स्थिति को संभाला। आमतौर पर ऐसे मामलों में बल प्रयोग करना घातक साबित हो सकता है, इसलिए पुलिस ने ‘इमोशनल कनेक्ट’ का सहारा लिया। Neemuch Mobile Tower Incident के दौरान थाना प्रभारी श्री वर्मा और आरक्षक हिमांशु ने लगातार करीब 2 घंटे तक उस व्यक्ति से बात की। उन्होंने उसे उसके परिवार, बच्चों और भविष्य का वास्ता दिया। धूप और ऊंचाई के कारण वह व्यक्ति भी अब थकने लगा था, और डिहाइड्रेशन के कारण उसके हाथ-पैर कांप रहे थे। यह वह समय था जब पुलिस की हर एक बात उसके जीवन के लिए निर्णायक थी। पुलिसकर्मियों ने उसे पानी और मदद का पूरा भरोसा दिलाया और उसे यह अहसास कराया कि उसका जीवन जमीन के टुकड़े से कहीं ज्यादा कीमती है। आखिरकार, पुलिस की मर्मस्पर्शी अपील और भरोसे ने काम किया। उसका गुस्सा धीरे-धीरे शांत हुआ और वह नीचे उतरने को राजी हो गया।

सुरक्षित वापसी और ग्रामीणों का आभार

काफी मशक्कत के बाद, पुलिस की देखरेख में वह व्यक्ति धीरे-धीरे टॉवर से नीचे उतरा। जैसे ही उसके पैर जमीन पर पड़े, परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। पुलिस ने उसे तुरंत पानी पिलाया और प्राथमिक उपचार के लिए भेजा।

इस Neemuch Mobile Tower Incident का सुखद अंत पुलिस की सजगता के कारण ही संभव हो पाया। अगर डायल-112 समय पर नहीं पहुंचती या पुलिस धैर्य से काम नहीं लेती, तो आज सुवाखेड़ा में मातम पसरा होता।

खाकी का मानवीय चेहरा

Neemuch Mobile Tower Incident अक्सर पुलिस की छवि को लेकर कई सवाल उठते हैं, लेकिन नीमच पुलिस ने आज जो उदाहरण पेश किया, उसने सभी का दिल जीत लिया। ग्रामीणों और पीड़ित के परिजनों ने आरक्षक हिमांशु परमार, पायलट विनोद शर्मा और थाना प्रभारी जितेन्द्र वर्मा का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।

पुलिस टीम ने बाद में ग्रामीणों को भी समझाइश दी कि किसी भी विवाद में कानून को हाथ में लेना या जान जोखिम में डालना सही नहीं है। जमीन विवाद का हल बातचीत और कोर्ट-कचहरी से निकल सकता है, लेकिन गई हुई जान वापस नहीं आ सकती।


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Aakash Sharma
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