ऐतिहासिक कार्रवाई: ₹44 लाख का मुआवजा नहीं देने पर कलेक्ट्रेट का Account Freeze, राजस्थान में प्रशासनिक हड़कंप
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
23 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 23 दिसम्बर 2025, 10:51 पूर्वाह्न IST)

पाली/सोजत (Account Freeze): राजस्थान की न्यायपालिका ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह जिला प्रशासन ही क्यों न हो। पाली जिले के सोजत में एक दशक पुराने मामले में न्यायालय ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने पूरे राज्य के सरकारी महकमे की नींद उड़ा दी है। अदालती आदेश की अवहेलना करने और एक पीड़ित परिवार को मुआवजा न देने के कारण कलेक्ट्रेट का Account Freeze कर दिया गया है।

यह कठोर कदम अपर एवं सेशन न्यायाधीश (ADJ) सोजत की अदालत ने उठाया है। 22 दिसंबर को कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष टीम ने बैंक पहुंचकर डिक्री के निष्पादन के तहत कलेक्ट्रेट के खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया पूरी की।

क्या है पूरा मामला ? (10 साल की कानूनी जंग)

घटना 21 मई 2015 की है, जब सोजत सिटी के रहने वाले 45 वर्षीय मेहंदी व्यापारी नरेंद्र टांक अपने काम से घर लौट रहे थे। नरेंद्र टांक सोजत के प्रतिष्ठित व्यवसायी थे। उस रात जब वह अपनी बाइक से जा रहे थे, तब सड़क के बीचों-बीच दो भारी-भरकम सांड आपस में लड़ रहे थे। अचानक दोनों सांडों की भिड़ंत की चपेट में नरेंद्र टांक आ गए। इस भीषण हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

इस घटना ने न केवल एक परिवार का मुखिया छीना, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर किया। मृतक की पत्नी ज्योति टांक, पुत्र कुणाल और पुत्री भूमिका ने इस अन्याय के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने नगर पालिका सोजत, स्वायत्त शासन विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कराया।

कोर्ट की फटकार और ₹44 लाख का हर्जाना

लगभग 9 वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, ADJ कोर्ट सोजत ने 9 महीने पहले एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं को नियंत्रित करना नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी में विफल रहने पर कोर्ट ने प्रशासन को दोषी ठहराया।

न्यायालय ने आदेश दिया कि मृतक के आश्रितों को 44 लाख 10 हजार 480 रुपए की क्षतिपूर्ति राशि (मुआवजा) दी जाए। लेकिन, नौ महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने इस राशि का भुगतान नहीं किया। सरकारी अधिकारियों के इस अड़ियल और संवेदनहीन रवैये को देखते हुए कोर्ट ने Account Freeze करने की सख्त कार्रवाई का आदेश जारी किया।

सरकारी मशीनरी में मची खलबली

22 दिसंबर को जब कोर्ट की टीम कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची, तो वहां का नजारा कुछ अलग था। जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के समय जिला कलेक्टर कार्यालय में मौजूद नहीं थे और उनकी सरकारी गाड़ी भी वहां नहीं मिली। इससे पहले 18 दिसंबर को कोर्ट ने सोजत नगर पालिका का खाता भी इसी मामले में फ्रीज किया था।

पीड़ित पक्ष के वकील गजेंद्र दवे ने मीडिया को बताया कि प्रशासन को बार-बार समय दिया गया था, लेकिन आदेश की पालना नहीं की गई। वकील दवे ने स्पष्ट किया, “कोर्ट ने खातों में 44 लाख रुपए की राशि को फ्रीज किया है। जब तक यह मुआवजा राशि जमा नहीं कराई जाती, तब तक कलेक्ट्रेट इन पैसों का उपयोग नहीं कर पाएगा।”

‘Account Freeze’ कार्रवाई का बड़ा संदेश

यह कार्रवाई राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास में एक नजीर पेश करती है। अक्सर देखा जाता है कि अदालती डिक्री होने के बावजूद सरकारी विभाग बजट की कमी या फाइलों की आवाजाही का बहाना बनाकर सालों तक मुआवजा अटकाए रखते हैं। लेकिन इस बार Account Freeze की कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आम आदमी के अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट किसी भी हद तक जा सकता है।

सोजत और पाली के नागरिकों में इस फैसले को लेकर चर्चा है। लोगों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है, और यह फैसला उन लापरवाह अधिकारियों के लिए एक कड़ा सबक है जो जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज करते हैं।


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Aakash Sharma
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