Neemuch Lineman Accident: प्रधान डाकघर के पास लाइन सुधार रहे आउटसोर्स कर्मचारी को लगा जोरदार करंट, 30 फीट ऊपर से गिरा नीचे
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
25 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 25 दिसम्बर 2025, 4:39 अपराह्न IST)

नीमच (Neemuch): Neemuch Lineman Accident शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले प्रधान डाकघर (Head Post Office) के पास आज सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। विद्युत विभाग की एक बड़ी लापरवाही या कहें तकनीकी चूक के चलते एक Neemuch Lineman Accident का शिकार हो गया। लाइन सुधार कार्य के दौरान एक आउटसोर्स विद्युतकर्मी को करंट का जोरदार झटका लगा, जिससे वह संतुलन खोकर क्रेन से नीचे गिर पड़ा। गनीमत रही कि पास ही चल रहे एक आयोजन के चलते उसे तुरंत मेडिकल सहायता मिल गई, जिससे उसकी जान बच सकी।

Neemuch Lineman Accident क्या है पूरा मामला? 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना नीमच शहर के प्रधान डाकघर के समीप की है। यहाँ विद्युत वितरण कंपनी द्वारा डबल लाइन में सुधार का कार्य (Maintenance Work) किया जा रहा था। इस कार्य के लिए विद्युत विभाग ने आउटसोर्स कर्मचारियों को काम पर लगाया था। बताया जा रहा है कि गिरदौड़ा निवासी 30 वर्षीय रघुवीर सिंह पिता भगवत सिंह, जो कि पेशे से एक आउटसोर्स लाइनमैन हैं, क्रेन पर चढ़कर खंभे पर लाइन सुधारने का प्रयास कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिस पोल पर रघुवीर काम कर रहे थे, वहां दो लाइनें गुजर रही थीं। काम करने के लिए एक लाइन को बंद (Shutdown) किया गया था, लेकिन उसके ठीक पास से गुजर रही दूसरी लाइन चालू थी। तकनीकी भाषा में इसे ‘इंडक्शन इफेक्ट’ (Induction Effect) कहा जाता है। जब रघुवीर सिंह बंद लाइन पर काम कर रहे थे, तभी पास की चालू लाइन से ‘इंडक्शन करंट’ रिटर्न हुआ और वह उसकी चपेट में आ गए।

धमाका और अफरातफरी का माहौल

जैसे ही Neemuch Lineman Accident हुआ, वहां एक तेज आवाज आई और रघुवीर सिंह करंट लगने से तड़प उठे। करंट का झटका इतना तेज था कि उनका शरीर झुलस गया और वह अपना संतुलन नहीं बना सके। देखते ही देखते वह क्रेन की ऊंचाई से सीधे नीचे जमीन पर आ गिरे। इस दृश्य को देख वहां मौजूद राहगीरों और साथी कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और अफरातफरी मच गई। साथी कर्मचारियों ने तुरंत काम रोका और घायल को संभालने दौड़े।

मैराथन दौड़ बनी जीवनदायिनी (Miraculous Rescue)

कहते हैं कि ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय। यह कहावत रघुवीर सिंह के मामले में बिल्कुल सटीक साबित हुई।जिस वक्त यह हादसा हुआ, संयोग से उसी क्षेत्र में बच्चों की एक मैराथन दौड़ (Marathon Run) आयोजित की जा रही थी। इस आयोजन के लिए आयोजकों ने एहतियात के तौर पर एक एम्बुलेंस और मेडिकल टीम (Doctor Team) को मौके पर तैनात कर रखा था।

जैसे ही लोगों ने लाइनमैन को गिरते हुए देखा, मैराथन में मौजूद एम्बुलेंस और डॉक्टर तत्काल घटनास्थल पर पहुँच गए। बिना एक भी मिनट गंवाए, घायल रघुवीर को प्राथमिक उपचार (First Aid) दिया गया और उसी एम्बुलेंस से उन्हें नीमच जिला चिकित्सालय (Neemuch District Hospital) पहुँचाया गया। यदि एम्बुलेंस मौके पर न होती, तो अस्पताल पहुँचाने में देरी हो सकती थी, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

गंभीर चोट और उपचार (Medical Condition)

जिला अस्पताल में घायल लाइनमैन का उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, करंट लगने से रघुवीर सिंह के हाथ में गंभीर चोटें आई हैं (Severe Burn Injuries)। उनके हाथ बुरी तरह झुलस गए हैं और गिरने की वजह से शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आई हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि समय पर इलाज मिलने के कारण उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर (Stable) बताई जा रही है। उन्हें लगातार चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है।

हादसे की खबर मिलते ही विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल पहुँचे और घायल कर्मचारी का हालचाल जाना। परिजनों को भी सूचित कर दिया गया है, जो खबर सुनते ही बदहवास हालत में अस्पताल पहुँचे।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल (Questions on Safety)

इस Neemuch Lineman Accident ने एक बार फिर विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली और आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर देखा जाता है कि विद्युत विभाग के मैदानी कार्यों में आउटसोर्स कर्मचारियों को ही सबसे कठिन और जोखिम भरे कामों में झोंका जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नदारद रहते हैं।

इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डबल लाइन पर काम चल रहा था, तो ‘इंडक्शन करंट’ (Induction Current) के खतरे को पहले से क्यों नहीं भांपा गया? नियम के अनुसार, जब हाई टेंशन या डबल लाइन के पास काम होता है, तो दोनों लाइनों का शटडाउन लिया जाना चाहिए या फिर अर्थिंग की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

क्या मौके पर मौजूद सुपरवाइजर ने इन मानकों की अनदेखी की?
क्या रघुवीर सिंह के पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) जैसे इंसुलेटेड ग्लव्स और सेफ्टी बेल्ट मौजूद थे?
यह जांच का विषय है कि आखिर चालू लाइन के इतने करीब काम करने की अनुमति कैसे दी गई, जिससे एक युवा कर्मचारी की जान पर बन आई ?
विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसे तकनीकी खतरों (Technical Hazards) के प्रति कर्मचारियों को न केवल जागरूक किया जाए बल्कि कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन भी अनिवार्य किया जाए।

निष्कर्ष

फिलहाल, रघुवीर सिंह खतरे से बाहर हैं, लेकिन यह हादसा एक चेतावनी है। विद्युत विभाग को अपनी ‘जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी’ पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। शहर के नागरिकों ने भी मांग की है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी दुर्घटना का सामना न करना पड़े।


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Aakash Sharma
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