नीमच जल संकट: बढ़ते जल संकट के बीच कलेक्टर का बड़ा फैसला, नलकूप खनन पर पूर्ण प्रतिबंध
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
31 मार्च 2026, (अपडेटेड 31 मार्च 2026, 7:32 अपराह्न IST)

नीमच (MP News)। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में गहराते जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। नीमच जल संकट (Neemuch Water Crisis) की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी हिमांशु चंद्रा ने पूरे जिले को “जल अभावग्रस्त क्षेत्र” घोषित कर दिया है। यह आदेश म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है।

जिले में लगातार गिरते भू-जल स्तर और आने वाले महीनों में संभावित पेयजल संकट को रोकने के उद्देश्य से प्रशासन ने जल उपयोग और नलकूप खनन पर व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम न केवल वर्तमान स्थिति को संभालने के लिए बल्कि भविष्य के जल संकट को टालने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जल उपयोग पर कड़ी निगरानी, गैर-जरूरी उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित

प्रशासन द्वारा जारी आदेश के तहत अब जिले के सभी जल स्रोतों से पानी निकालने पर सख्त नियंत्रण लागू कर दिया गया है। इसमें नदी, नहर, तालाब, झील, नाले, झरने, कुएं और नलकूप सभी शामिल हैं। हालांकि, पीने के पानी को इस प्रतिबंध से अलग रखा गया है,

लेकिन इसके अलावा घरेलू, कृषि या अन्य गैर-जरूरी उपयोग के लिए पानी निकालना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नीमच जल संकट (Neemuch Water Crisis) को देखते हुए यह फैसला लिया गया है ताकि उपलब्ध जल संसाधनों को केवल आवश्यक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

भू-जल स्तर में गिरावट बनी चिंता का मुख्य कारण

नीमच जिले में पिछले कुछ वर्षों से भू-जल स्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है। कई क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गर्मी के मौसम में पानी की भारी कमी महसूस होती है।

इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन ने अशासकीय और निजी नलकूप खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 6(1) के तहत यह रोक लागू की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित बोरिंग और अत्यधिक जल दोहन ही नीमच जल संकट (Neemuch Water Crisis) का प्रमुख कारण है।

बिना अनुमति बोरिंग मशीन चलाने पर सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने नलकूप खनन के साथ-साथ बोरिंग मशीनों के उपयोग पर भी सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब बिना अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) की अनुमति के कोई भी व्यक्ति बोरिंग मशीन का उपयोग नहीं कर सकेगा।

यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसकी मशीन को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी। नीमच जल संकट (Neemuch Water Crisis) को नियंत्रित करने के लिए यह कदम प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है।

उल्लंघन करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान

नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने दंड का भी स्पष्ट प्रावधान किया है।

  • पहली बार उल्लंघन करने पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
  • दोबारा उल्लंघन करने पर ₹10,000 तक का जुर्माना या 2 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है।

यह स्पष्ट संकेत है कि प्रशासन अब जल संरक्षण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। नीमच जल संकट (Neemuch Water Crisis) को गंभीरता से लेते हुए यह सख्ती जरूरी मानी जा रही है।

30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा आदेश

जिला प्रशासन द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नीमच को सौंपी गई है। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिले में कहीं भी नियमों का उल्लंघन न हो।

जनता से सहयोग की अपील, पानी बचाने की जरूरत

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे जल का उपयोग सोच-समझकर करें और अनावश्यक बर्बादी से बचें। नीमच जल संकट (Neemuch Water Crisis) केवल प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

यदि लोग जागरूक होकर पानी बचाने की दिशा में कदम उठाते हैं, तो इस संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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Aakash Sharma
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