Leopard poaching: रक्षक ही बने भक्षक! नीमच में तेंदुए की कुल्हाड़ी से हत्या, 3 गिरफ्तार; वन विभाग के झूठ से मचा हड़कंप

Leopard poaching

Leopard poaching

नीमच: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में वन्यजीवों के संरक्षण के दावों की पोल खुल गई है। जावद तहसील के जनकपुर क्षेत्र में Leopard poaching का एक अत्यंत क्रूर मामला सामने आया है, जहाँ एक तीन वर्षीय नर तेंदुए को कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतार दिया गया। इस घटना ने तब और अधिक तूल पकड़ लिया जब यह खुलासा हुआ कि वन विभाग ने अपराधियों को बचाने या अपनी विफलता छिपाने के लिए चार दिनों तक इस ‘हत्या’ को ‘सामान्य मौत’ बताने का प्रयास किया।

Shubham Solar Solution

कैसे अंजाम दी गई Leopard poaching की यह वारदात?

घटना की गहराई में जाने पर पता चलता है कि यह पूरी तरह से एक सुनियोजित अपराध था। 4 जनवरी को जनकपुर निवासी देवीलाल, अंबालाल और सुनील ने जंगल में जंगली सूअर को फंसाने के लिए लोहे के तारों का फंदा लगाया था। लेकिन शिकारियों के इस जाल में एक निर्दोष नर तेंदुआ फंस गया।

जब शिकारियों ने देखा कि फंदे में तेंदुआ फंसा है, तो उन्होंने रहम दिखाने के बजाय कुल्हाड़ी उठाई और तेंदुए पर तब तक वार किए जब तक उसकी जान नहीं निकल गई। Leopard poaching की इस नृशंसता के बाद, साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए आरोपियों ने तेंदुए के शव को मनासा तहसील की बीट बैसदा के अंतर्गत आने वाले भोजपुर नाले में फेंक दिया।

यह भी पढ़ें: कंपार्टमेंट 391 में मिली तेंदुए की लाश, शिकार या हादसा? जानिए 5 जनवरी की उस सुबह का पूरा सच

वन विभाग की संदिग्ध भूमिका: सच दबाने की साजिश?

7 जनवरी को जब तेंदुए का शव बरामद हुआ, तो वन मंडल अधिकारी (DFO) एस.के. अटोदे और उनकी टीम ने एक प्रेस नोट जारी किया। इसमें दावा किया गया कि बैंसदा क्षेत्र में मिले तेंदुए की मौत ‘सामान्य’ थी और प्रारंभिक जांच में शिकार के कोई संकेत नहीं मिले हैं। विभाग का यह बयान न केवल गलत था, बल्कि सीधे तौर पर Leopard poaching जैसे गंभीर अपराध को दबाने की कोशिश थी।

विभाग का यह झूठ तब बेनकाब हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों, सरपंच और पंचायत सचिव ने खुलकर मोर्चा संभाला। मीडिया के तीखे सवालों और जमीनी हकीकत सामने आने के बाद, उपवन मंडल अधिकारी प्रदीप कछावा को यह स्वीकार करना पड़ा कि विभाग ने गलत जानकारी दी थी और वास्तव में यह Leopard poaching का ही मामला है।

गिरफ्तार आरोपी और कानूनी कार्रवाई

जनता के आक्रोश और पुख्ता सबूतों के आधार पर वन विभाग ने अंततः कार्रवाई की। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है:

आरोपी का नामनिवासीअपराध में भूमिकास्थिति
देवीलालजनकपुरफंदा (Trap) लगानाजेल भेजा गया
अंबालालजनकपुरकुल्हाड़ी से हमला करनाजेल भेजा गया
सुनीलजनकपुरशव ठिकाने लगानाजेल भेजा गया

इन तीनों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उच्च स्तरीय जांच की मांग: रडार पर जिम्मेदार अधिकारी

Leopard poaching के इस मामले में अब केवल शिकारियों की गिरफ्तारी से संतोष नहीं किया जा रहा है। मांग उठ रही है कि उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो जिन्होंने जानबूझकर झूठ बोला।

  • एस.के. अटोदे (DFO): जिन्होंने गुमराह करने वाला प्रेस नोट जारी करवाया।

  • डॉ. जीवन नाथ और डॉ. भूपेश पाटीदार: जिन्होंने पोस्टमार्टम के दौरान शिकार के निशानों को नजरअंदाज किया।

  • स्थानीय गश्ती दल: जिनकी लापरवाही से जंगल में अवैध फंदे लगाए गए।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विभाग इसी तरह तेंदुए का शिकार (Leopard poaching) होने पर पर्दा डालेगा, तो अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे। इस मामले में मुख्यमंत्री और प्रधान मुख्य वन संरक्षक से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

वन्यजीवों की रक्षा करना केवल कागजी खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए। नीमच की यह घटना बताती है कि प्रशासनिक तंत्र के भीतर कितनी गहरी सड़न है। Leopard poaching को प्राकृतिक मौत बताना न केवल पेशेवर नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि कानून का भी खुला उल्लंघन है।


यह भी पढ़ें: 38 करोड़ की जमीन मुक्त: नीमच में चला अतिक्रमण हटाओ अभियान, 4.80 हेक्टेयर भूमि आजाद

हो सकता है आप चूक गए हों