Leopard Death In Manasa : कंपार्टमेंट 391 में मिली तेंदुए की लाश, शिकार या हादसा? जानिए 5 जनवरी की उस सुबह का पूरा सच
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
07 जनवरी 2026, (अपडेटेड 07 जनवरी 2026, 2:41 अपराह्न IST)

नीमच/मनासा सनसनी: मनासा में तेंदुए की मौत के बाद मध्यप्रदेश के नीमच जिले का वन महकमा सकते में आ गया, जब मनासा वन परिक्षेत्र के घने जंगलों के बीच एक वयस्क तेंदुए का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। घटना 5 जनवरी 2026 की है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि भोपाल तक के वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। Leopard Death In Manasa की खबर जंगल में आग की तरह फैली और देखते ही देखते मौके पर अधिकारियों का जमावड़ा लग गया।

यह मामला सिर्फ एक वन्यजीव की मौत का नहीं, बल्कि वन सुरक्षा और संरक्षण पर खड़े होते सवालों का भी है। आखिर कैसे एक सुरक्षित माने जाने वाले ‘बैसदा बीट’ में तेंदुए की जान चली गई? क्या यह शिकारियों की करतूत है या फिर कोई प्राकृतिक घटना ? 

5 जनवरी की सुबह: जब ‘बैसदा बीट’ में मचा हड़कंप

Leopard Death In Manasa घटनाक्रम के अनुसार, 5 जनवरी 2026 को मनासा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ‘बैसदा बीट’ (Baisda Beat) के कक्ष क्रमांक 391 की वन भूमि पर गश्त के दौरान वन कर्मियों को एक तेंदुए का शव दिखाई दिया। शव को देखते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत इसकी सूचना राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), नई दिल्ली और मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश (भोपाल) को दी।

वरिष्ठ कार्यालयों से दिशा-निर्देश मिलते ही स्थानीय वन अमला एक्शन मोड में आ गया। Leopard Death In Manasa के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए त्वरित और सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई।

डॉग स्क्वायड ने चप्पा-चप्पा छाना: क्या मिले सुराग?

सुरक्षा और जांच के लिहाज से वन विभाग ने सबसे पहले घटनास्थल को सील किया। चूंकि मामला ‘शेड्यूल-1’ के वन्यजीव का था, इसलिए डॉग स्क्वायड (Dog Squad) की विशेष टीम को मौके पर बुलाया गया। डॉग स्क्वायड और वन रक्षकों की टीम ने आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में गहन तलाशी ली।

अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना था कि कहीं आसपास कोई फंदा, जहर या शिकारियों की संदिग्ध गतिविधि के निशान तो नहीं हैं। वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, “प्रारंभिक जांच और मौका-ए-वारदात के निरीक्षण में तेंदुए के शिकार किए जाने के कोई भी प्रत्यक्ष साक्ष्य (Direct Evidence) नहीं मिले हैं।” इस खुलासे ने अवैध शिकार की आशंका को फिलहाल कम कर दिया है, लेकिन रहस्य अभी भी बरकरार है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट: क्या कहते हैं एक्सपर्ट डॉक्टर्स?

मौत की असली वजह जानने के लिए मृत तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी में किया गया। यह पोस्टमार्टम वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. जीवन नाथ और डॉ. भूपेश पाटीदार द्वारा नियमानुसार किया गया।विशेषज्ञों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बात साझा की है। रिपोर्ट के अनुसार, तेंदुए के शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंग (Organs) सुरक्षित पाए गए हैं। नाखून, दांत और खाल का सुरक्षित होना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह शिकारियों का काम नहीं है, क्योंकि शिकारी अक्सर अंगों की तस्करी के लिए जानवर को मारते हैं।

हालांकि, Leopard Death In Manasa का वास्तविक कारण क्या है—क्या यह आपसी संघर्ष (Territorial Fight) था, कोई बीमारी थी, या कुछ और—इसकी पुष्टि के लिए विसरा और अन्य सैंपल्स को विस्तृत तकनीकी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

NTCA की गाइडलाइन के तहत हुआ अंतिम संस्कार

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और NTCA की सख्त गाइडलाइन्स का पालन करते हुए, मृत तेंदुए का अंतिम संस्कार पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया। दाह-संस्कार की प्रक्रिया वनमंडलाधिकारी (DFO) नीमच, तहसीलदार मनासा, ग्राम पंचायत पलासिया के सरपंच, वन अमले और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई।

जांच में भविष्य में कोई सवाल न उठे, इसके लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई है। वन विभाग ने इस मामले में अज्ञात कारणों के तहत ‘वन अपराध प्रकरण’ (POR) दर्ज कर लिया है और विवेचना जारी है।

वन्यजीव प्रेमियों की चिंता और आगे की राह

नीमच का मनासा क्षेत्र जैव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में एक तेंदुए की मौत वन विभाग के लिए चिंता का विषय है। अधिकारी अब लैब रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि Leopard Death In Manasa की गुत्थी को पूरी तरह से सुलझाया जा सके। फिलहाल, वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है ताकि अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


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Aakash Sharma
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