1 अप्रैल से देश के सभी टोल प्लाजा होंगे 100% Cashless, नकद लेन-देन पर लगेगी पूरी रोक; जानें नए नियम
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
16 जनवरी 2026, (अपडेटेड 16 जनवरी 2026, 9:50 अपराह्न IST)

नई दिल्ली: अगर आप भी अक्सर नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने देश के हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर को सुगम बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 1 अप्रैल से देश के सभी Cashless Toll Plaza अपनी नई व्यवस्था के साथ काम करना शुरू कर देंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि अब आपको अपनी जेब में नकद (Cash) रखने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि टोल बूथ पर सिर्फ FASTag या UPI के जरिए ही भुगतान स्वीकार किया जाएगा।

मंत्रालय का बड़ा फैसला: अब कैश का झंझट खत्म

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने हाल ही में एक प्रमुख टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि सरकार अब ‘जीरो वेटिंग’ पॉलिसी पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि टोल प्लाजा पर नकद भुगतान के कारण लगने वाले ट्रैफिक जाम को खत्म करने के लिए Cashless Toll Plaza की व्यवस्था को अनिवार्य बनाया जा रहा है।

वर्तमान में, हालांकि FASTag अधिकांश वाहनों के लिए अनिवार्य है, लेकिन फिर भी कई जगहों पर हाइब्रिड लेन के माध्यम से नकद लेन-देन होता है। इस वजह से डिजिटल पेमेंट करने वाले वाहन चालकों को भी कतार में खड़ा होना पड़ता है। अब 1 अप्रैल से यह पूरी तरह से इतिहास बन जाएगा।

25 टोल प्लाजा पर शुरू हुआ ट्रायल

इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। वर्तमान में देश के 25 प्रमुख Cashless Toll Plaza पर इसका पायलट प्रोजेक्ट (ट्रायल) शुरू कर दिया गया है। इन प्लाजा पर केवल डिजिटल माध्यमों से ही टैक्स वसूला जा रहा है। इस ट्रायल से मिलने वाले डेटा और फीडबैक के आधार पर ही 1 अप्रैल से पूरे भारत में इसे फुल-फ्लेक्ड तरीके से लॉन्च किया जाएगा।

Cashless Toll Plaza के 3 बड़े फायदे: समय और पैसे की बचत

सरकार ने इस फैसले के पीछे तीन सबसे बड़े कारणों का हवाला दिया है:

  1. ईंधन (Fuel) की बड़ी बचत: जब गाड़ियां टोल पर रुकती हैं, तो इंजन चालू रहने के कारण भारी मात्रा में डीजल और पेट्रोल खर्च होता है। Cashless Toll Plaza होने से गाड़ियां बिना रुके निकल सकेंगी, जिससे करोड़ों लीटर ईंधन की बचत होगी।

  2. पूर्ण पारदर्शिता (Transparency): डिजिटल लेन-देन का हर रिकॉर्ड सर्वर पर मौजूद रहता है। इससे टोल कलेक्शन में होने वाली किसी भी तरह की हेराफेरी या मैनुअल गलती की संभावना खत्म हो जाएगी।

  3. समय की बर्बादी से मुक्ति: अक्सर टोल पर ‘खुल्ले पैसे’ (Change) को लेकर टोल कर्मी और वाहन चालक के बीच बहस होती है। डिजिटल पेमेंट से यह समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी और यात्रा का समय 15 से 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।

क्या है ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) सिस्टम?

यह कदम भारत को भविष्य की टोलिंग तकनीक की ओर ले जा रहा है। Cashless Toll Plaza लागू करना वास्तव में ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ सिस्टम की दिशा में पहला कदम है। इस तकनीक के तहत आने वाले समय में सड़कों से फिजिकल बैरियर (नाके) हटा दिए जाएंगे। हाईवे पर हाई-टेक कैमरे और सेंसर्स लगाए जाएंगे, जो वाहन की रफ्तार कम किए बिना ही ऑटोमैटिक तरीके से FASTag या सैटेलाइट-बेस्ड सिस्टम से टोल काट लेंगे।

बिना FASTag या UPI वाले वाहनों का क्या होगा?

1 अप्रैल के बाद अगर कोई वाहन चालक बिना पर्याप्त बैलेंस के या डिजिटल पेमेंट की सुविधा के बिना Cashless Toll Plaza पर पहुंचता है, तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ऐसे वाहनों को या तो वापस लौटा दिया जाएगा या फिर उन पर दोगुना जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जा सकता है। आधिकारिक नोटिफिकेशन में इसके नियमों को और अधिक स्पष्ट किया जाएगा।

वाहन चालकों के लिए जरूरी टिप्स

सफर पर निकलने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखें:

  • FASTag रिचार्ज: अपने FASTag वॉलेट को हमेशा अपडेट रखें और उसमें न्यूनतम बैलेंस बनाए रखें।

  • UPI ऐप्स: अपने स्मार्टफोन में PhonePe, Google Pay या Paytm जैसे UPI ऐप्स को चालू रखें, ताकि FASTag में दिक्कत होने पर क्यूआर कोड (QR Code) से पेमेंट किया जा सके।

  • केवाईसी (KYC): सुनिश्चित करें कि आपके FASTag का केवाईसी पूरा हो चुका है, अन्यथा वह ब्लैकलिस्ट हो सकता है।

सरकार का यह विजन भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर ले जाने का है। 1 अप्रैल से होने वाला यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि यह आम आदमी की जेब और कीमती समय की भी रक्षा करेगा।


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Aakash Sharma
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