7 आला अधिकारियों पर गिरी गाज: जानिए कैसे मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने हजारों छात्रों के भविष्य के साथ किया बड़ा धोखा

Mewar University

चित्तौड़गढ़ । राजस्थान के शिक्षा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी (Mewar University) एक बार फिर से गंभीर विवादों में घिर गई है। यहां पढ़ने वाले छात्र अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। मामला इतना बढ़ गया है कि गंगरार थाने में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की विस्तृत रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। इसमें यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक कुमार गदिया, वाइस चांसलर आलोक मिश्रा, रजिस्ट्रार और कई विभागाध्यक्षों सहित कुल 7 जिम्मेदार लोगों को नामजद किया गया है। आरोप है कि बिना किसी मान्यता के B.Sc. नर्सिंग और जीएनएम (GNM) जैसे कोर्सेज में दाखिला देकर छात्रों से लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई।

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Mewar University अखबारों में विज्ञापन देकर बिछाया गया था जाल

इस पूरे फर्जीवाड़े की शुरुआत बड़े-बड़े और भ्रामक विज्ञापनों से हुई थी। पीड़ित छात्रों का कहना है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी (Mewar University) के प्रशासन ने जानबूझकर अखबारों में ऐसे विज्ञापन छपवाए जिनमें दावा किया गया था कि उनके मेडिकल कोर्सेज को राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से पूरी मान्यता प्राप्त है। इन झूठे दावों पर विश्वास करके राजस्थान के अलावा जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों के मासूम छात्रों ने यहां एडमिशन ले लिया।

लाखों की फीस और एसओजी के आरोपी से कनेक्शन

Mewar University


भीलवाड़ा की रहने वाली छात्रा पायल पाटिल और उनके साथियों ने पुलिस को जो जानकारी दी है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। पायल ने बताया कि जब उन्होंने विज्ञापन देखकर संपर्क किया, तो उनकी बात कौशल चन्द्रल नाम के शख्स से कराई गई थी। गौरतलब है कि इस व्यक्ति को हाल ही में एसओजी (SOG) ने फर्जी डिग्री सिंडिकेट के मामले में गिरफ्तार किया था। साल 2022 में पायल और रोहित मारू, आशुतोष पारीक सहित कई अन्य छात्रों ने एक लाख रुपये एडमिशन फीस और 50 हजार रुपये डोनेशन के नाम पर मेवाड़ यूनिवर्सिटी (Mewar University) में जमा किए थे। 3 साल की कड़ी मेहनत और लाखों रुपये खर्च करने के बाद अब पता चला है कि उनकी पढ़ाई का कोई मोल ही नहीं है।

सच्चाई की तलाश में जयपुर पहुंचे छात्र

जब छात्रों को अपनी डिग्री की मान्यता पर शक हुआ, तो वे हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे। छात्रों का एक समूह सीधे जयपुर पहुंचा और मुख्यमंत्री कार्यालय, सचिवालय व RNC दफ्तर में जाकर हकीकत जाननी चाही। वहां अधिकारियों ने जो बताया, उसने छात्रों के पैरों तले जमीन खिसका दी। स्पष्ट कर दिया गया कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी (Mewar University) के पास B.Sc. नर्सिंग कोर्स चलाने की कोई मान्यता ही नहीं है। हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने मान्यता लेने के लिए कभी कोई फाइल ही जमा नहीं करवाई थी।

कश्मीरी छात्रों की आवाज दबाने का तानाशाही रवैया

इस धोखाधड़ी का दायरा केवल स्थानीय छात्रों तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना (PMSSS) के तहत जम्मू-कश्मीर से आए अजहर सादिक, फैजान अकबर सहित 44 छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। जब इन छात्रों ने 19 अक्टूबर 2024 को अपने हकों के लिए आवाज उठाई और मान्यता के दस्तावेज मांगे, तो मेवाड़ यूनिवर्सिटी (Mewar University) के प्रबंधन ने तानाशाही दिखाते हुए 39 छात्रों को अनुशासनहीनता का हवाला देकर सस्पेंड कर दिया।

जीएनएम कोर्स का भी यही है हाल

केवल B.Sc. नर्सिंग ही नहीं, बल्कि जीएनएम कोर्स कर रहे 26 छात्रों के साथ भी यही खेल खेला गया है। शीतल शर्मा और उनके सहपाठियों ने बताया कि RNC की वेबसाइट पर नाम देखकर उन्होंने दाखिला लिया था, लेकिन अब वे भी खुद को सड़क पर खड़ा पा रहे हैं।

कैंपस में तनाव, पुलिस का पहरा और प्रशासन की चुप्पी

डिग्री की मान्यता को लेकर जयपुर से लौटने के बाद जब छात्रों को कैंपस में घुसने से रोका गया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। मंगलवार को मैस बंद करवाने को लेकर छात्रों के दो गुट आपस में भिड़ गए और जमकर तोड़फोड़ हुई। माहौल इतना बिगड़ गया कि एडिशनल एसपी सरिता सिंह को भारी पुलिस जाब्ते के साथ मोर्चा संभालना पड़ा। हालात बेकाबू होते देख मेवाड़ यूनिवर्सिटी (Mewar University) प्रशासन ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए होली और रमजान की छुट्टियों का बहाना बनाकर हॉस्टल खाली करवा दिए हैं।

अब देखना यह है कि रावतभाटा प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर चल रही इस लूट पर आखिर लगाम कब लगेगी?


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