मौत बनकर गिरा बिजली का खंभा: मोरवन में भीषण पोल दुर्घटना, विभाग की ‘अंधी’ लापरवाही ने छीनी महिला की मुस्कान

Pole Accident
मोरवन न्यूज। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मोरवन क्षेत्र में शनिवार को बिजली विभाग की एक ऐसी भयावह लापरवाही सामने आई जिसने पूरे गांव को सन्न कर दिया। यहाँ एक पोल दुर्घटना (Pole Accident) ने उस समय तबाही मचाई जब मंदिर से दर्शन कर घर लौट रही निर्दोष महिलाओं के ऊपर अचानक एक जर्जर विद्युत पोल मौत बनकर गिर पड़ा। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला का पैर बुरी तरह फ्रैक्चर हो गया है, जबकि कई अन्य महिलाएँ इस मलबे के नीचे दबने से बाल-बाल बचीं।
खौफनाक मंजर: जब चीखों में बदल गए भजन
शनिवार दोपहर मोरवन के स्थानीय मंदिर से पूजा-अर्चना कर महिलाओं का एक समूह भजन गाते हुए लौट रहा था। सड़कें व्यस्त थीं और कोई नहीं जानता था कि ऊपर खड़ा एक सड़ा-गला बिजली का पोल उनकी जान का दुश्मन बनने वाला है। तभी अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और वह भारी-भरकम खंभा सीधे महिलाओं के बीच गिर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह पोल दुर्घटना (Pole Accident) इतना अचानक था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय नागरिक पवन राठौर और महेश जाट ने अपनी आँखों से यह मंजर देखा। उन्होंने बताया, “पोल गिरते ही धूल का गुबार और चीख-पुकार मच गई। गनीमत रही कि पोल गिरने के दौरान पास ही मौजूद एक लोहे के गेट से अटक गया, जिससे उसका वेग (Force) कम हो गया। अगर वह सीधा किसी के सिर पर गिरता, तो आज मोरवन में सामूहिक मातम पसरा होता।”
ग्रामीणों का आक्रोश: “हमने पहले ही चेताया था, पर विभाग सोया रहा”
हादसे के बाद मोरवन के ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। यह पोल दुर्घटना (Pole Accident) कोई दैवीय आपदा नहीं, बल्कि बिजली विभाग द्वारा पाला गया एक बड़ा भ्रष्टाचार और लापरवाही का नमूना है। ग्रामीण महेश जाट ने बताया कि इस क्षतिग्रस्त खंभे की सूचना एक बार नहीं, बल्कि दर्जनों बार बिजली मंडल के अधिकारियों और लाइनमैन को दी गई थी। आवेदन दिए गए, गुहार लगाई गई, लेकिन विभागीय बाबू और अफसर अपनी एसी केबिन से बाहर नहीं निकले।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि विभाग केवल गरीब किसानों और ग्रामीणों के बिजली बिल वसूलने में बहादुरी दिखाता है, लेकिन जब जर्जर बुनियादी ढांचे को बदलने की बारी आती है, तो बजट और स्टाफ की कमी का रोना रोया जाता है। इस पोल दुर्घटना (Pole Accident) ने विभागीय दावों की धज्जियाँ उड़ाकर रख दी हैं।
जिम्मेदार कौन? JE का इस्तीफा और अधिकारियों का पल्ला झाड़ना
इस पूरे प्रकरण में सबसे विवादास्पद मोड़ तब आया जब मोरवन बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) प्रवीण सावलिया से जवाब मांगा गया। उन्होंने बेहद संवेदनहीनता के साथ कहा कि उन्हें इस पोल की खराबी की कोई जानकारी नहीं थी और साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वे नौकरी से त्यागपत्र दे चुके हैं। एक जिम्मेदार अधिकारी का ऐसा जवाब ग्रामीणों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
वहीं, डिविजनल इंजीनियर कल्याण सिंह चौहान ने औपचारिक बयान देते हुए कहा, “हमें इस पोल दुर्घटना (Pole Accident) की जानकारी मीडिया से मिली है। सोमवार को एक विशेष टीम गठित कर जांच की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी की कोताही सामने आती है, तो कड़ी कार्रवाई होगी।”
प्रशासनिक कि असफलता: क्या किसी की जान जाने का इंतजार था?
यह पोल दुर्घटना (Pole Accident) केवल मोरवन की कहानी नहीं है, बल्कि नीमच जिले के सैकड़ों गांवों में ऐसे ‘सफेद हाथी’ रूपी पोल खड़े हैं। विभाग के पास मेंटेनेंस के नाम पर लाखों का फंड आता है, फिर भी खंभे जर्जर क्यों हैं? घायल महिला के परिजनों ने अब प्रशासन से मुआवजे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सोमवार तक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
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