उज्जैन न्यूज़: 3 बेटियों ने दाल, शंख और इलायची पर उकेरी कला, वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

उज्जैन न्यूज़ (Ujjain News)

उज्जैन न्यूज़महाकाल की पावन नगरी हमेशा से अपनी आस्था, संस्कृति और आध्यात्म के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। लेकिन आज की सबसे बड़ी और गर्व करने वाली उज्जैन न्यूज़ (Ujjain News) यह है कि यहाँ की तीन होनहार युवा बेटियों ने अपनी अद्भुत और बारीक कला (माइक्रो आर्ट) के दम पर पूरी दुनिया में शहर का डंका बजा दिया है।

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इन छात्राओं ने मसूर की दाल के दाने, छोटी सी इलायची और मात्र 5 सेंटीमीटर के शंख जैसी अत्यंत सूक्ष्म वस्तुओं पर देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरकर एक नया इतिहास रच दिया है। उनकी इस बेमिसाल प्रतिभा को देखते हुए उनका नाम विभिन्न वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज किया गया है।

यह खबर न सिर्फ उज्जैन बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। कला के क्षेत्र में अक्सर बड़े-बड़े कैनवास पर चित्रकारी देखने को मिलती है, लेकिन जब बात ‘माइक्रो आर्ट’ यानी सूक्ष्म कला की आती है, तो इसके लिए गजब के धैर्य, एकाग्रता और सधी हुई उंगलियों की आवश्यकता होती है। आइए, ‘द टाइम्स ऑफ एमपी’ की इस विशेष रिपोर्ट में जानते हैं इन तीन होनहार बेटियों की इस ऐतिहासिक सफलता की पूरी कहानी।

सूक्ष्म कला में उज्जैन की बेटियों का कमाल: मुख्य बिंदु

  • अपेक्षा गोखरू: छोटी इलायची पर भगवान गौतम बुद्ध की आकृति।

  • राशि निगम: 5 सेंटीमीटर के शंख पर अष्टविनायक, मात्र 30 मिनट में।

  • भूमि कसेरा: मसूर की दाल पर भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम, सिर्फ 10 मिनट में।

  • तीनों छात्राएं उज्जैन के एक निजी फाइन आर्ट्स कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।


इलायची के छोटे से दाने पर विराजे भगवान बुद्ध
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फाइन आर्ट्स प्रथम वर्ष की 19 वर्षीय छात्रा अपेक्षा गोखरू ने अपनी कला से सभी को हैरत में डाल दिया है। अपेक्षा ने रसोई में इस्तेमाल होने वाली एक साधारण सी छोटी इलायची को अपना कैनवास बनाया। उन्होंने पोस्टर कलर्स का बेहद बारीकी से उपयोग करते हुए उस पर भगवान गौतम बुद्ध की अत्यंत शांत और जीवंत आकृति उकेरी।

इस शानदार कलाकृति को तैयार करने के बाद, इसी महीने इसे सूक्ष्म कला श्रेणी (Micro Art Category) के तहत ‘वर्ल्ड वाइड बुक’ में स्थान दिया गया है। आज की ताज़ा उज्जैन न्यूज़ (Ujjain News) में अपेक्षा की इस उपलब्धि की चर्चा हर गली-मोहल्ले में हो रही है।

मात्र 30 मिनट में 5 सेंटीमीटर के शंख पर अष्टविनायक

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इस कड़ी में दूसरा नाम है 20 वर्षीय राशि निगम का, जिन्होंने अपनी फुर्ती और अचूक कलात्मक दृष्टि से एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राशि ने केवल 5 सेंटीमीटर के छोटे से शंख पर एक्रेलिक रंगों का इस्तेमाल करते हुए भगवान गणेश के ‘अष्टविनायक’ स्वरूप को बड़ी ही खूबसूरती से उकेरा।

हैरानी की बात यह है कि इतनी जटिल और बारीक आकृति बनाने में उन्हें मात्र 30 मिनट का समय लगा। उनकी इस असाधारण रचना को “सबसे छोटी आकृति” की श्रेणी में वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। राशि की इस बेजोड़ उपलब्धि के चलते उनका नाम एक नहीं, बल्कि चार प्रमुख रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज हुआ है:

  1. वर्ल्ड वाइड बुक

  2. इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड

  3. इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड

  4. यूनिक बुक ऑफ रिकॉर्ड

जनवरी में बनाई गई इस मास्टरपीस के लिए उन्हें आधिकारिक ईमेल के माध्यम से चयन की सूचना मिली, और अब उन्हें बाकायदा प्रमाण-पत्र व मेडल से सम्मानित किया गया है। राशि अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने गुरुजनों के मार्गदर्शन और परिवार के अटूट सपोर्ट को देती हैं।

मसूर की दाल पर भगवान जगन्नाथ की त्रिमूर्ति

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भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम

जब बात ‘माइक्रो आर्ट’ की हदें पार करने की हो, तो तीसरी होनहार छात्रा भूमि कसेरा का नाम सबसे ऊपर आता है। भूमि ने मसूर की दाल के तीन बेहद छोटे और अलग-अलग दानों पर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम की सूक्ष्म आकृतियां उकेर कर चमत्कार सा कर दिखाया है।

सुई की नोक जितनी बारीकी से काम करते हुए, भूमि ने इन तीनों कलाकृतियों को महज 10 मिनट में तैयार कर लिया। इस अकल्पनीय गति और एकाग्रता ने उन्हें ‘वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में एक बेहद खास मुकाम दिलाया है। रोजाना आ रही उज्जैन न्यूज़ (Ujjain News) में यह खबर युवाओं के बीच तेजी से वायरल हो रही है।

उज्जैन का नाम हुआ रोशन, युवाओं को मिल रही प्रेरणा

उज्जैन न्यूज़ (Ujjain News) में इन तीनों छात्राओं की शानदार उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। आज के समय में जब युवा अपना ज्यादातर वक्त मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं, वहीं उज्जैन की ये बेटियां अपनी कला-साधना में लीन होकर प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रही हैं।

स्थानीय कला प्रेमियों और शिक्षकों का कहना है कि माइक्रो आर्ट में थोड़ी सी भी चूक पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है। इसके लिए कलाकार को अपनी सांसों तक पर नियंत्रण रखना पड़ता है। इन बेटियों ने जो कर दिखाया है, वह शहर के हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है। अगर आप भी मालवा निमाड़ और प्रदेश की ऐसी ही प्रेरक खबरें पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट की उज्जैन न्यूज़ (Ujjain News) कैटेगरी को नियमित रूप से फॉलो करें।


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