Pistol:इंदौर में लड़की ने लहराई पुलिस की पिस्तौल, महकमे में हड़कंप SI का नाम आते ही आईडी से कराए डिलीट
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
03 मार्च 2026, (अपडेटेड 03 मार्च 2026, 12:04 अपराह्न IST)

इंदौर न्यूज़। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से पिस्तौल (Pistol) वाली खबर में एक ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिसने खाकी वर्दी की साख और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर चंद लाइक्स और फॉलोअर्स बटोरने की चाहत में आज का युवा किस कदर अंधा हो चुका है, इसका एक जीता-जागता और खतरनाक उदाहरण शहर में देखने को मिला है।

शिविका नाम की एक युवती ने इंस्टाग्राम पर अपना एक वीडियो और कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं, जिनमें वह एक असली और सरकारी पिस्तौल (Pistol) के साथ ‘भौकाल’ जमाती हुई नजर आ रही है। सबसे बड़ी हैरानी और पुलिस विभाग के लिए शर्मिंदगी का विषय यह है कि यह जानलेवा हथियार किसी आम नागरिक या गुंडे का नहीं, बल्कि परदेशीपुरा थाने में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर (SI) का बताया जा रहा है।

रंगबाजी के चक्कर में खाकी दागदार

आजकल के डिजिटल दौर में रील्स और शॉर्ट वीडियो का नशा हर युवा के सिर चढ़कर बोल रहा है। महंगी गाड़ियों और हथियारों के साथ वीडियो बनाकर इंटरनेट पर ‘डॉन’ दिखने की एक अजीब सी होड़ मची हुई है। इसी भटकी हुई मानसिकता का शिकार शिविका भी हुई।

उसने बिना यह सोचे-समझे कि एक सरकारी हथियार के साथ सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करना कितना संगीन जुर्म है, बड़े ही शान से अपनी इंस्टाग्राम आईडी पर उस पिस्तौल (Pistol)  के साथ अपनी तस्वीरें साझा कर दीं। जैसे ही यह पोस्ट सोशल मीडिया के पटल पर आई, यह जंगल की आग की तरह इंटरनेट पर वायरल हो गई। एक आम लड़की के हाथ में पुलिस का हथियार देखकर आम जनता भी सन्न रह गई और इस मामले ने तुरंत आला पुलिस अधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी।

साइबर सेल की एंट्री और दरोगा जी का पर्दाफाश

वायरल हो रही इन तस्वीरों की जब इंदौर पुलिस की साइबर सेल और वरिष्ठ अधिकारियों ने तकनीकी रूप से बारीकी से जांच-पड़ताल की, तो एक बेहद खौफनाक सच सामने आया। प्रारंभिक जांच में यह बात शीशे की तरह साफ हो गई कि वीडियो और तस्वीरों में जो हथियार शान से लहराया जा रहा है, वह कोई प्लास्टिक का खिलौना या छर्रे वाली बंदूक नहीं है, बल्कि पुलिस विभाग द्वारा जनता की सुरक्षा के लिए जारी की गई आधिकारिक सर्विस पिस्तौल (Pistol)  है।

विभाग के अंदरूनी और पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह हथियार परदेशीपुरा थाने में तैनात एक दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) को ड्यूटी के लिए अलॉट किया गया था। जैसे ही यह भंडाफोड़ हुआ और पुलिस महकमे में कार्रवाई की सुगबुगाहट शुरू हुई, युवती ने भारी घबराहट में तुरंत अपने सोशल मीडिया अकाउंट से वे विवादित तस्वीरें और वीडियो डिलीट कर दिए।

लेकिन डिजिटल दुनिया में सबूत मिटाना इतना आसान नहीं होता; तब तक उन तस्वीरों के स्क्रीनशॉट्स और वीडियो आला अधिकारियों के मोबाइल और विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप्स तक पहुंच चुके थे।

एडीशनल डीसीपी का सख्त रुख और कानूनी पेंच

इस पूरे सनसनीखेज घटनाक्रम पर इंदौर पुलिस प्रशासन ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अपनाया है। एडीशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने मीडिया के सामने इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए साफ शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया या किसी भी अन्य सार्वजनिक मंच पर हथियारों का इस तरह से खुला और भौकाल भरा प्रदर्शन करना पूरी तरह से गैरकानूनी कृत्य है।

उन्होंने विस्तार से समझाया कि भारतीय दंड संहिता, आर्म्स एक्ट और पुलिस रेगुलेशन मैनुअल के तहत हथियारों के उपयोग, उनके रख-रखाव और प्रदर्शन को लेकर बेहद सख्त और कड़े प्रावधान लागू हैं।
यदि कोई भी जिम्मेदार पुलिसकर्मी अपनी सरकारी सर्विस पिस्तौल (Pistol)  किसी भी आम नागरिक को, चाहे वह उसका कितना भी करीबी परिचित ही क्यों न हो, सौंपता है, तो यह घोर अनुशासनहीनता और नियम विरुद्ध कृत्य की श्रेणी में आता है।

फिलहाल, डीसीपी कुमार प्रतीक के सख्त निर्देशों पर संबंधित सब-इंस्पेक्टर को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) थमा दिया गया है और उनसे इस घोर लापरवाही पर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

कमिश्नर का हंटर: महकमे में नहीं चलेगी कोई भी मनमानी

इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह जब से शहर की कमान संभाल रहे हैं, वे लगातार महकमे में लापरवाही, भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की सख्त नीति पर काम कर रहे हैं।

हाल ही के कुछ महीनों के पुलिसिया रिकॉर्ड पर नजर डालें तो, उन्होंने ड्यूटी में कोताही बरतने वाले, जनता से बदसलूकी करने वाले और कानून तोड़ने वाले लगभग एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सीधी और सख्त कार्रवाई की है। इनमें से कईयों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है, तो कुछ गंभीर मामलों में डिमोशन (पदावनति) की कड़ी सजा भी दी गई है।

पुलिस विभाग के ऐसे सख्त और अनुशासित माहौल में एक सरकारी पिस्तौल (Pistol)  का यह विवादित मामला सामने आना संबंधित दरोगा के करियर पर एक बहुत बड़ा दाग लगा सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों का साफ तौर पर कहना है कि एसआई का लिखित जवाब आने के बाद, अगर विभागीय जांच में यह पूरी तरह सिद्ध हो जाता है

कि उसने अपनी सरकारी पिस्तौल (Pistol)  निजी उपयोग, रौब झाड़ने या महज़ एक इंस्टाग्राम रील बनाने के लिए किसी बाहरी व्यक्ति को दी थी, तो उसके खिलाफ पुलिस मैन्युअल के तहत बर्खास्तगी तक की कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह घटना पूरे पुलिस महकमे के लिए एक कड़ा सबक है कि सरकारी हथियार खिलौना नहीं होते।


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Aakash Sharma
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