International Womens Day: VIP कल्चर को दरकिनार कर IHRSO ने पेश की मिसाल: भाई को किडनी देने वाली चंद्रकला, पति की ढाल बनी लक्ष्मी सहित समाज की ‘असली नायिकाओं’ का भव्य सम्मान
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
08 मार्च 2026, (अपडेटेड 08 मार्च 2026, 9:17 अपराह्न IST)

मनासा (Manasa News)। आज 8 मार्च को जब पूरी दुनिया International Womens Day के जश्न में डूबी है, तब मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मनासा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है। अक्सर देखा जाता है कि ऐसे आयोजनों में रसूखदार चेहरों और वीआईपी हस्तियों का बोलबाला रहता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन (IHRSO) ने इस परिपाटी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। मनासा के समता विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में न तो कोई फिल्मी ग्लैमर था और न ही सत्ता का दिखावा, यहाँ केवल उन ‘असली नायिकाओं’ का सम्मान था जिन्होंने अपने खून और पसीने से जीवन की जंग जीती है।

दिखावे के वीआईपी कल्चर को किनारे कर पेश की मिसाल

International Womens Day के इस खास मौके पर IHRSO की टीम ने उन महिलाओं को मंच पर सर्वोच्च स्थान दिया, जो समाज के सबसे निचले पायदान पर रहकर भी किसी महागाथा से कम नहीं हैं। संगठन ने उन विधवाओं, एकल महिलाओं और जुझारू पत्नियों का चयन किया, जो अभावों और शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद अपने परिवार के लिए हिमालय की तरह खड़ी हैं। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि नगर परिषद मनासा अध्यक्ष के प्रतिनिधि अजय तिवारी और हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश मूंदड़ा की पत्नी व सक्रिय समाजसेविका ज्योति मूंदड़ा उपस्थित रहीं। लेकिन इस बार मुख्य आकर्षण अतिथि नहीं, बल्कि वे संघर्षशील महिलाएं थीं जिनकी कहानियों ने हॉल में मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया।

भाई के लिए किडनी देने वाली चंद्रकला की अदम्य वीरता

समारोह में जब International Womens Day के महत्व पर चर्चा हुई, तो चंद्रकला का नाम सबसे ऊपर उभर कर आया। चंद्रकला ने उस समय एक मिसाल कायम की जब उनके सगे भाई की जान बचाने के लिए एक अंग की आवश्यकता थी। उन्होंने बिना किसी झिझक के अपनी एक किडनी दान कर दी। एक बहन के इस असीम त्याग और साहस को जब मंच से साझा किया गया, तो पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह त्याग उस पितृसत्तात्मक सोच पर एक करारा प्रहार था, जो अक्सर महिलाओं को केवल कमजोर समझती है।

लक्ष्मी: पति के घायल होने के बाद बनीं परिवार का सहारा

इसी मंच पर संघर्ष की एक और प्रतिमूर्ति लक्ष्मी का सम्मान किया गया। लक्ष्मी की कहानी किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है। एक भीषण सड़क दुर्घटना में लक्ष्मी के पति के शरीर में रॉड डालनी पड़ी थी, जिसके बाद वे शारीरिक रूप से अक्षम हो गए। लेकिन लक्ष्मी ने टूटने के बजाय लड़ना चुना। आज वह घर-घर जाकर झाड़ू-पोछा करती हैं और लोगों के कपड़ों पर प्रेस (इस्त्री) करके अपने बच्चों और बीमार पति का पेट पाल रही हैं। International Womens Day पर लक्ष्मी जैसे किरदारों का सम्मान ही इस दिन की वास्तविक सार्थकता है।

समाज की ‘खामोश नायिकाओं’ का बहुमान

आयोजन में उन मातृशक्तियों को भी सम्मानित किया गया जो हर शनिवार और रविवार को अपना कीमती समय निकालकर कचरा बीनने वाले गरीब बच्चों को मुफ्त में ट्यूशन पढ़ाती हैं। बिना किसी सरकारी सहायता या वाहवाही की चाह के, शिक्षा की यह अलख जगाना वास्तव में समाज निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। संगठन ने रेखांकित किया कि ये महिलाएं ही वास्तव में International Womens Day की सार्थकता को जमीन पर उतार रही हैं।

भावुक हुए अतिथि, गूंज उठी संवेदना

जब इन महिलाओं के संघर्ष की दास्तां मंच से सुनाई गई, तो मुख्य अतिथि अजय तिवारी स्वयं के आंसुओं को रोक नहीं पाए। उनका गला रुंध गया और उन्होंने कहा कि आज तक उन्होंने कई मंच साझा किए हैं, लेकिन आज इन असली मातृशक्तियों के बीच बैठकर उन्हें जो गर्व महसूस हो रहा है, वह अतुलनीय है। ज्योति मूंदड़ा ने भी महिलाओं के इस साहस को नमन करते हुए कहा कि नारी शक्ति का वास्तविक स्वरूप यही है।

IHRSO की जिला अध्यक्ष पिंकी ठाकुर ने अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि “सिर्फ हाई-प्रोफाइल लोगों को बुलाकर फोटो खिंचवा लेना महिला दिवस नहीं है। हमने उन महिलाओं को खोजा है जो वास्तव में जमीनी हालातों से लड़ रही हैं। असली सम्मान की हकदार यही हैं।”

गरिमामयी आयोजन और उपस्थिति

International Women Day

 

मंच पर इन सभी संघर्षशील महिलाओं का आत्मीय अंदाज में तिलक लगाकर और पुष्पवर्षा कर सम्मान किया गया। इस दौरान जिला अध्यक्ष पिंकी ठाकुर, आकाश शर्मा (जिला उपाध्यक्ष),जुबेदा बोहरा, रेणु गोस्वामी, जीनत दी, तसनीम जी, पार्वती मोदी, रितिका मग, राधा शुक्ला, कशिश जी, विनीता चांगल, जय सोनी, धर्मपाल ग्रोवर, मानक मोदी, गोपाल गहलोत (महामंत्री), राजमल धनोतिया, सुरेश मालवीय, रवि पुरोहित, सुरेश सोनी, पल्लव मग, कैलाश शर्मा, गोविंद प्रसाद शर्मा, दशरथ सेन, अरुण शर्मा, पवन सेन, नरेंद्र पांचाल और सचिन राठौर जैसे कई प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

International Womens Day के इस सफल कार्यक्रम का संचालन रेणु गोस्वामी ने बेहद मार्मिक ढंग से किया, जबकि आभार गोपाल गहलोत ने व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल एक सम्मान समारोह था, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी था कि संघर्ष ही सफलता की असली पहचान है।


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Aakash Sharma
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