RSS में बड़ा बदलाव: संघ का नया संगठनात्मक ढांचा, 2027 यूपी चुनाव बनेगा पहला टेस्ट
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
12 मार्च 2026, (अपडेटेड 12 मार्च 2026, 11:11 पूर्वाह्न IST)

नीमच (Neemuch News) देश के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में शामिल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। लगभग 40 लाख स्वयंसेवकों और 83 हजार से अधिक शाखाओं वाले RSS में प्रस्तावित यह बदलाव संघ की कार्यप्रणाली को और अधिक परिणाम-केंद्रित और जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार इस नए ढांचे पर 13 से 15 मार्च के बीच हरियाणा के समालखा में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में चर्चा होगी। बैठक में RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी देशभर के संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा करेंगे और बदलाव का प्रस्ताव तैयार करेंगे। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो सितंबर 2026 में इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पारित किया जा सकता है और 2027 की शुरुआत तक इसे लागू किया जाएगा।

RSS के इतिहास में दूसरा बड़ा संगठनात्मक बदलाव

RSS

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लगभग 100 साल के इतिहास में यह दूसरा बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले 1949 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पहली बार अपना लिखित संविधान तैयार किया था और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार किया था।

उस समय संघ के संगठनात्मक ढांचे और कार्यप्रणाली में भी कई बदलाव किए गए थे। इसके बाद समय-समय पर छोटे बदलाव होते रहे, जैसे कि संघ की वेशभूषा में परिवर्तन। लेकिन संगठन के ढांचे में इतने बड़े स्तर पर बदलाव की चर्चा लंबे समय बाद सामने आई है।

RSS में खत्म हो सकती है प्रांत प्रचारक व्यवस्था

वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संगठनात्मक ढांचा “प्रांत” इकाइयों पर आधारित है। बड़े राज्यों को कई प्रांतों में बांटा गया है और हर प्रांत में एक प्रचारक होता है, जो जमीनी कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय का काम करता है।

लेकिन प्रस्तावित बदलाव के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस व्यवस्था को समाप्त करने पर विचार कर रहा है। नई व्यवस्था में हर राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक नियुक्त किया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर Uttar Pradesh में अभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छह प्रांत हैं—

  • ब्रज

  • अवध

  • मेरठ

  • कानपुर

  • काशी

  • गोरक्ष

इन सभी प्रांतों के अपने-अपने प्रचारक हैं। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद इन छह प्रांत प्रचारकों की जगह पूरे राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक की व्यवस्था हो सकती है।

संभाग स्तर पर बढ़ेगी RSS की ताकत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नए ढांचे में संभाग या डिवीजन स्तर को अधिक मजबूत बनाने की योजना है। प्रशासनिक मंडलों को मिलाकर संभाग बनाए जाएंगे और हर संभाग में एक प्रचारक नियुक्त किया जाएगा।

उदाहरण के तौर पर—

  • उत्तर प्रदेश में 18 प्रशासनिक मंडल हैं, जिन्हें 9 संभागों में बांटा जा सकता है

  • Madhya Pradesh में लगभग 5 संभाग बनाए जा सकते हैं

  • Rajasthan में 3 से 4 संभाग

  • Bihar में 4 से 5 संभाग

इस व्यवस्था से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नेटवर्क स्थानीय स्तर पर अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

जिला से गांव तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ताओं को ज्यादा अधिकार

नए ढांचे का सबसे अहम पहलू संगठन का विकेंद्रीकरण है। RSS की योजना है कि जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव स्तर के कार्यकर्ताओं को ज्यादा अधिकार दिए जाएं।

अब तक जमीनी कार्यकर्ताओं को कई मामलों में प्रांत स्तर के पदाधिकारियों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन नई व्यवस्था में वे सीधे संभाग प्रचारकों से संवाद कर सकेंगे।

इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और स्थानीय मुद्दों पर ज्यादा प्रभावी काम किया जा सकेगा।

RSS में बन सकता है जिला प्रचारक पद

सूत्रों के मुताबिक बैठक में जिला स्तर पर नए पद बनाने पर भी चर्चा हो सकती है। संभावना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला स्तर पर जिला प्रचारक या सहायक प्रचारक जैसे पदों की व्यवस्था करे।

इससे जमीनी स्तर पर संगठनात्मक संरचना और मजबूत होगी तथा स्थानीय समाज से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संपर्क और गहरा हो सकेगा।

प्रचारकों का बनेगा रिपोर्ट कार्ड

नए ढांचे के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ताओं के काम का मूल्यांकन भी अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा। प्रचारकों के कार्य का एक तरह का “रिपोर्ट कार्ड” तैयार होगा, जिसमें यह देखा जाएगा कि उन्होंने अपने क्षेत्र में संगठन के लक्ष्यों को कितना पूरा किया।

समीक्षा साल में कई बार की जा सकती है। यदि किसी क्षेत्र में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं तो वहां अतिरिक्त कार्यकर्ता भेजे जा सकते हैं या जिम्मेदारी में बदलाव भी किया जा सकता है।

2027 यूपी चुनाव में दिख सकता है असर

सूत्रों के अनुसार RSS के इस नए ढांचे का पहला बड़ा परीक्षण 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। संघ नई माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति के साथ जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक कार्यप्रणाली में एक नया अध्याय जुड़ सकता है।


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Aakash Sharma
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