नीमच | भारतीय रेलवे ने AC कोच में चोरी की बढ़ती घटनाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रेलवे पुलिस मुख्यालय के सर्कुलर के मुताबिक, AC कोच में चोरी होने की स्थिति में अब कोच अटेंडर की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी और उसे आरोपी बनाए जाने की बात कही गई है। विदिशा और ग्वालियर में सामने आए चोरी के आंकड़ों ने रेलवे की चिंता बढ़ाई है।
अब तक AC कोच में चोरी की घटना सामने आने पर जांच का मुख्य फोकस चोरी करने वाले व्यक्ति और चोरी गए सामान पर रहता था। लेकिन नए निर्देश के बाद सवाल यह भी होगा कि जिस कोच में चोरी हुई, वहां ड्यूटी पर मौजूद अटेंडर की भूमिका क्या थी? यही बदलाव इस पूरे मामले को अहम बनाता है।
चोरी हुई तो अटेंडर पर क्यों नजर?
रेलवे पुलिस मुख्यालय के अनुसार, AC कोच में यात्रियों की सुरक्षा और कोच की निगरानी में अटेंडर की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान चोरी होने पर अटेंडर की भूमिका की जांच किए जाने की बात कही गई है। रेलवे के इस रुख के बाद AC कोच में चोरी की घटना सामने आने पर जांच का दायरा बढ़ सकता है। अब यह भी देखा जाएगा कि घटना के समय अटेंडर कहां था, उसकी ड्यूटी क्या थी और यात्रियों तथा उनके सामान की निगरानी किस तरह की जा रही थी।
हालांकि, किसी व्यक्ति को आरोपी बनाया जाना उसके दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। वास्तविक भूमिका जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
विदिशा में 3 साल में 116 मामले
रेलवे पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, GRP थाना विदिशा में तीन साल के दौरान 116 मामले दर्ज हुए। इनमें ज्यादातर चोरी की घटनाएं AC कोच से जुड़ी बताई गई हैं।
इसके मुकाबले स्लीपर और जनरल कोच में ऐसी घटनाएं काफी कम बताई गई हैं। यहीं से रेलवे के सामने बड़ा सवाल खड़ा हुआ—आखिर AC कोच में चोरी की घटनाएं इतनी ज्यादा क्यों सामने आ रही हैं? इसी सवाल के बीच रेलवे ने अटेंडरों की भूमिका और उनकी जवाबदेही पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है।
ग्वालियर के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
ग्वालियर GRP क्षेत्र के आंकड़े इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार AC कोच में चोरी के मामले लगातार बढ़े।
- 2022 में: 109 चोरी
- 2023 में: 129 चोरी
- 2024 में: 334 चोरी
इन आंकड़ों में 2024 में अचानक बड़ी बढ़ोतरी दिखाई देती है। 2022 के 109 मामलों की तुलना में 2024 में संख्या 334 तक पहुंच गई। यही बढ़ोतरी रेलवे की चिंता का एक बड़ा कारण बनी। आंकड़ों ने यह सवाल खड़ा किया कि AC कोच आखिर चोरी के लिए इतना संवेदनशील क्यों होता जा रहा है।
फरवरी का वह मामला, जिसने बढ़ाए सवाल
इसी साल फरवरी में रेलवे नेटवर्क से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया था, जिसने कोच अटेंडेंट की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वन्यजीव तस्करी के मामले में एक कोच अटेंडेंट को मुख्य आरोपी बनाया गया था। उसके पास से दो बैगों में छिपाकर रखे गए 311 जीवित कछुए बरामद हुए थे।
बताया गया कि ये कछुए दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजाति के थे। यह मामला सीधे तौर पर ट्रेन में चोरी से संबंधित नहीं था, लेकिन इस घटना ने रेलवे कोच में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता जरूर बढ़ाई। इसके अलावा सामान चोरी के कुछ मामलों में भी अटेंडरों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने की बात सामने आई। इन्हीं परिस्थितियों के बीच अब चोरी के मामलों में अटेंडर की भूमिका की जांच पर जोर दिया जा रहा है।
रेलवे ने साफ किया अपना रुख
डीजी रेल राजाबाबू सिंह के हवाले से बताया गया है कि यात्रियों की सुरक्षा GRP की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उनके मुताबिक, यदि AC कोच में चोरी होती है तो अटेंडर को आरोपी बनाया जाएगा। बढ़ते मामलों के बीच अटेंडरों की भूमिका की जांच को जरूरी बताया गया है। रेलवे का मानना है कि इस कदम से अटेंडरों की जवाबदेही तय होगी और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। लेकिन अब असली सवाल यह है कि नए सर्कुलर के बाद AC कोच में चोरी की घटनाओं पर कितना असर पड़ेगा?
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
नए रुख के बाद AC कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। चोरी होने की स्थिति में जांच के दौरान ड्यूटी पर मौजूद अटेंडर की भूमिका भी देखी जाएगी।
जांच में किन बातों पर नजर हो सकती है?
- चोरी की घटना कब हुई?
- उस समय अटेंडर की ड्यूटी क्या थी?
- कोच की निगरानी किस तरह की जा रही थी?
- यात्रियों के सामान की सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था थी?
- चोरी की घटना के दौरान अटेंडर की भूमिका क्या रही?
इन पहलुओं की जांच के बाद ही किसी व्यक्ति की वास्तविक भूमिका सामने आ सकेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल—चोरी के बाद अगला नंबर किसका?
रेलवे के इस कदम ने AC कोच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया सवाल खड़ा कर दिया है। अब चोरी की घटना होने पर जांच सिर्फ चोर की तलाश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कोच में ड्यूटी कर रहे अटेंडर की भूमिका भी जांची जाएगी। विदिशा में 116 मामलों और ग्वालियर में 2024 के दौरान 334 मामलों का आंकड़ा रेलवे के सामने मौजूद चुनौती को दिखाता है।
रेलवे का यह कदम अटेंडरों की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में है, लेकिन इसका वास्तविक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना साफ है कि AC कोच में चोरी होने के बाद अब जांच का एक नया सवाल सामने रहेगा—घटना के समय अटेंडर की भूमिका क्या थी? AC कोच में चोरी हुई तो अब सिर्फ यह नहीं पूछा जाएगा कि सामान कौन ले गया। रेलवे के नए रुख के बाद यह भी जांच का हिस्सा बनेगा कि चोरी के वक्त कोच की जिम्मेदारी किसके पास थी और वहां ड्यूटी कर रहा अटेंडर क्या कर रहा था। यही सवाल रेलवे के नए सख्त कदम का सबसे अहम हिस्सा बन गया है।
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