मनासा (दिलीप बोराना )। चंबलेश्वर डैम से संचालित जल निगम की पेयजल योजना इन दिनों तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित हो गई है। डैम की तीनों मोटरों में खराबी आने से योजना से जुड़े करीब 29 गांवों में नियमित जलापूर्ति बाधित हो गई है। पिछले कई दिनों से ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जल निगम ने मोटरों की मरम्मत का कार्य जारी होने और दो से तीन दिनों में जलापूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया है।
पेयजल संकट का असर मनासा क्षेत्र के कई गांवों में दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमित पानी नहीं मिलने से घरेलू जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। कई परिवार वैकल्पिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं, जबकि कुछ गांवों में पुरानी व्यवस्था के सहारे पानी की आपूर्ति की जा रही है।
तीनों मोटरों में खराबी से रुकी जलापूर्ति
चंबलेश्वर डैम की तीनों मोटरों में तकनीकी खराबी आने के बाद जल निगम की पेयजल योजना प्रभावित हो गई। इससे योजना से जुड़े करीब 29 गांवों में पानी की सप्लाई बाधित हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
जल निगम के अधिकारियों के अनुसार मोटरों की मरम्मत का कार्य जारी है। एक मोटर उपलब्ध हो चुकी है और उसे चालू करने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि शेष दो मोटरों को भी जल्द चालू करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरपंच ने विधायक के सामने भी उठाया मुद्दा
ग्राम पंचायत पड़दा के सरपंच सुभाष श्रीमाल ने बताया कि उन्होंने जल निगम के अधिकारियों से चर्चा की है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि दो से तीन दिनों में मोटरों की मरम्मत पूरी होने के बाद जलापूर्ति फिर से शुरू कर दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि जल निगम के सम्मेलन के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय विधायक माधव मारु के समक्ष भी यह विषय रखा। उनका सुझाव था कि पुरानी जलापूर्ति लाइन को भी पुनः दुरुस्त कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति बनने पर ग्रामीणों को वैकल्पिक व्यवस्था मिल सके।
पुरानी लाइन बंद होने से बढ़ी परेशानी
सुभाष श्रीमाल ने बताया कि पहले गांव में कुओं के माध्यम से पानी की आपूर्ति होती थी। बाद में नई पाइपलाइन बिछाने के दौरान पुरानी लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। यदि ग्राम पंचायत को आवश्यक बजट उपलब्ध कराया जाता है तो पुरानी जलापूर्ति लाइन को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
उनका मानना है कि यदि पुरानी व्यवस्था भी चालू रहेगी तो भविष्य में किसी तकनीकी खराबी के दौरान पेयजल संकट से काफी हद तक बचा जा सकेगा।
पड़दा गांव में 10 दिनों से पानी की समस्या
ग्राम पंचायत पड़दा के निवासी अजीत सिंह ने बताया कि गांव में लगभग दस दिनों से गहरा पेयजल संकट बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन मोटरों की मरम्मत में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। लोगों को पीने के पानी के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं।
भाटखेड़ी में पुरानी व्यवस्था बनी सहारा
ग्राम पंचायत भाटखेड़ी के सरपंच मनोज पुरोहित ने बताया कि चंबलेश्वर डैम की मोटरें खराब होने से गांव की जलापूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि जल निगम के अधिकारी उपाध्याय ने जानकारी दी कि एक मोटर पहुंच चुकी है और उसे चालू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि भाटखेड़ी में पुरानी जलापूर्ति लाइन चालू होने के कारण बावड़ी में पानी भरकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे गांव में स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य बनी हुई है। जैसे ही डैम से जलापूर्ति बहाल होगी, नियमित सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
पिपलिया रावजी में भी बढ़ रही चिंता
ग्राम पंचायत पिपलिया रावजी के सरपंच से संपर्क नहीं हो सका। हालांकि गांव के ग्रामीणों ने बताया कि वहां भी लगातार पेयजल संकट बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र जलापूर्ति बहाल नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने रखीं ये मांगें
ग्रामीणों ने जल निगम और प्रशासन से मांग की है कि—
- तीनों खराब मोटरों की मरम्मत जल्द पूरी की जाए।
- सभी प्रभावित गांवों में नियमित जलापूर्ति तत्काल शुरू की जाए।
- भविष्य के लिए वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था विकसित की जाए।
- पुरानी जलापूर्ति लाइन को पुनः चालू किया जाए।
- ऐसी तकनीकी खराबियों से बचने के लिए स्थायी समाधान तैयार किया जाए।
दो-तीन दिनों में राहत मिलने की उम्मीद
जल निगम की ओर से ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया है कि मोटरों की मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि मरम्मत समय पर पूरी हो जाती है तो अगले दो से तीन दिनों के भीतर चंबलेश्वर डैम से जुड़े सभी प्रभावित गांवों में नियमित जलापूर्ति फिर से शुरू की जा सकती है।
फिलहाल मनासा क्षेत्र के हजारों लोग इस इंतजार में हैं कि तकनीकी खराबी जल्द दूर हो और रोजमर्रा की सबसे जरूरी जरूरत—पेयजल—की आपूर्ति फिर से सामान्य हो सके।
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