चित्तौड़गढ़ (Chandan Smuggling): फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ में अल्लू अर्जुन को लाल चंदन की तस्करी करते देख पूरी दुनिया हैरान थी, लेकिन राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में हकीकत में भी कुछ वैसा ही नजारा देखने को मिला। यहाँ पुलिस ने Chandan Smuggling के एक ऐसे ही हाई-प्रोफाइल मामले का पर्दाफाश किया है, जहाँ तस्करों ने फिल्म की तर्ज पर पुलिस को चकमा देने के लिए एक निजी यात्री बस का सहारा लिया।
कोतवाली थाना पुलिस ने कपासन चौराहे पर शुक्रवार की आधी रात को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 223 किलो गीली चंदन की लकड़ियां बरामद की हैं। इन लकड़ियों को बड़े ही शातिराना तरीके से प्लास्टिक के कट्टों में भरकर बस की डिक्की में छिपाया गया था। इस Chandan Smuggling की खेप को चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा से जयपुर सप्लाई किया जाना था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
पुष्पा फिल्म जैसा तरीका, लेकिन पुलिस निकली ‘शेर’
फिल्म ‘पुष्पा’ में दिखाया गया था कि कैसे दूध के टैंकरों या अन्य सामान के नीचे चंदन छिपाकर तस्करी की जाती है। चित्तौड़गढ़ के इस मामले में भी Chandan Smuggling के लिए कुछ ऐसा ही ‘माइंड गेम’ खेला गया। तस्करों ने सोचा कि यात्रियों से भरी ‘निरजी ट्रेवल्स’ की बस (जो निंबाहेड़ा से पिलानी जा रही थी) पर पुलिस शक नहीं करेगी। डिक्की में रखे कट्टों को इस तरह सेट किया गया था कि वह ऊपर से साधारण पार्सल लगें।
थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत ने बताया कि रात करीब ढाई बजे जब नाकाबंदी के दौरान बस को रुकवाया गया, तो पुलिस टीम ने संदेह होने पर डिक्की की गहनता से तलाशी ली। जैसे ही पुलिस ने प्लास्टिक के कट्टे खोले, पूरे इलाके में चंदन की महक फैल गई। यह Chandan Smuggling का खेल पूरी तरह से फिल्मी था, लेकिन यहाँ ‘सिस्टम’ भारी पड़ गया।
तस्करी कांड की पूरी कुंडली: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| कुल वजन | 2 क्विंटल 33 किलो (223 किलोग्राम) |
| अनुमानित कीमत | लगभग 3.5 लाख रुपये |
| बस का नाम | निरजी ट्रेवल्स (निंबाहेड़ा से पिलानी) |
| मुख्य बिंदु | बरखा ट्रेवल्स ऑफिस से लोड किए गए थे कट्टे |
| गंतव्य | जयपुर (पर्ची पर लिखा पता) |
आधी रात का ड्रामा और यात्रियों का हंगामा
पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान बस में जयपुर, सीकर और पिलानी जाने वाले दर्जनों यात्री सवार थे। रात के ढाई बजे जब पुलिस ने जांच के लिए बस को रोका और सामान उतरवाना शुरू किया, तो यात्रियों का धैर्य जवाब दे गया। कई यात्रियों ने समय पर गंतव्य तक पहुंचने की बात को लेकर हंगामा भी किया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस बस को कपासन चौराहे से हटाकर थाने के सामने ले गई, जहाँ यात्रियों को दूसरी व्यवस्था का आश्वासन देकर जांच को आगे बढ़ाया गया।
ड्राइवर और कंडक्टर का चौंकाने वाला खुलासा
पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान बस ड्राइवर सुरेंद्र और कंडक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि कट्टों में क्या है। उन्होंने खुलासा किया कि यह माल चित्तौड़गढ़ स्थित ‘बरखा ट्रेवल्स’ के ऑफिस से संचालक अशोक कुमार सिंधी द्वारा रखवाया गया था। एक कागज पर जयपुर का पता और एक मोबाइल नंबर लिखा था, जिस पर माल की डिलीवरी होनी थी।
हैरानी की बात यह है कि इस Chandan Smuggling के पीछे कोई वैध दस्तावेज, बिल या बिल्टी नहीं थी। वन अधिनियम (Forest Act) के तहत पुलिस ने अब अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उस मोबाइल नंबर की तलाश की जा रही है जो इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड हो सकता है।
निष्पक्ष विश्लेषण: क्या सिर्फ ‘पुष्पा’ का प्रभाव है या सिस्टम की ढिलाई?
ईमानदारी से बात की जाए तो फिल्मों का असर समाज पर पड़ता है, लेकिन Chandan Smuggling का असली कारण ‘आसान पैसा’ और ‘ढीला सुरक्षा चक्र’ है। तस्करों को पता है कि निजी ट्रेवल्स की बसों में पार्सल की बुकिंग के समय कोई सख्त जांच नहीं होती। बरखा ट्रेवल्स जैसे ऑफिसों से बिना किसी आईडी या चेकिंग के अवैध माल लोड हो जाना सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है।
चित्तौड़गढ़ और निंबाहेड़ा के जंगलों से चंदन की लकड़ियां कटना और फिर शहर के बीचों-बीच तस्करी के लिए लोड होना, यह बताता है कि तस्करों का नेटवर्क काफी गहरा है। पुलिस को केवल लकड़ी पकड़ने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उस ‘अशोक कुमार सिंधी’ और जयपुर के ‘रिसीवर’ तक पहुंचना चाहिए, जो इस Chandan Smuggling का असली खिलाड़ी है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इससे पहले भी इसी बस या अन्य बसों के जरिए चंदन जयपुर भेजा गया है। बरामद लकड़ी की बाजार में कीमत भले ही 3.5 लाख रुपये बताई जा रही हो, लेकिन वन संपदा की चोरी का नुकसान अमूल्य है।
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