नीमच । नीमच शहर के बीचों-बीच स्थित द्वारिका रेस्टोरेंट शुक्रवार शाम प्रशासनिक कार्रवाई के कारण चर्चा में आ गया। CM Helpline पर मिली शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने संचालित रेस्टोरेंट पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान गंदगी, बिना तारीख वाले खाद्य पैकेट और घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग सामने आने के बावजूद केवल खाद्य तेल का सैंपल लिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
कई घंटों तक चली जांच कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सोलंकी और यशवंत शर्मा ने टीम के साथ कई घंटों तक रेस्टोरेंट परिसर और किचन की जांच की। इस दौरान इस्तेमाल किए जा रहे खाद्य तेल के नमूने लेकर उन्हें लैब जांच के लिए भेजा गया। मौके पर तहसीलदार संजय मालवीय भी पहुंचे और पूरे परिसर का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान द्वारिका रेस्टोरेंट में रखे चिप्स और वेफर्स के कुछ पैकेटों पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट अंकित नहीं मिली। अधिकारियों ने इन्हें अमानक मानते हुए पंचनामा तैयार किया और सामग्री जब्त कर नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की।
किचन में गंदगी और घरेलू सिलेंडर


कार्रवाई के दौरान किचन की साफ-सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। निरीक्षण में रसोई क्षेत्र में गंदगी पाई गई। साथ ही व्यावसायिक उपयोग के बजाय घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल भी सामने आया। सुरक्षा नियमों के अनुसार व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग जरूरी माना जाता है।
सिर्फ तेल का सैंपल लेने पर सवाल

इन गंभीर कमियों के बावजूद विभाग द्वारा मौके पर कोई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने से स्थानीय लोगों में चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि जब रेस्टोरेंट में मिठाइयां, नमकीन और अन्य खाद्य सामग्री मौजूद थी, तब केवल तेल का ही सैंपल लेने तक कार्रवाई सीमित क्यों रखी गई।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
शहरवासियों का आरोप है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई अक्सर सैंपल लेने तक सीमित रह जाती है और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि द्वारिका रेस्टोरेंट मामले में आगे कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
फिलहाल खाद्य तेल की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही विभाग आगे की कार्रवाई तय करेगा।
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