FASTag में OneTag सुविधा शुरू, स्टिकर बदले बिना बदल सकेंगे बैंक
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
12 सितम्बर 2026, (अपडेटेड 12 सितम्बर 2026, 10:20 पूर्वाह्न IST)

मुंबई। FASTag इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलने की प्रक्रिया अब आसान होने वाली है। FASTag OneTag नाम की नई सर्विस शुरू की गई है, जिसके तहत यूजर को बैंक बदलने के लिए गाड़ी की विंडशील्ड पर लगा FASTag स्टिकर हटाकर नया फिजिकल टैग लेने की जरूरत नहीं होगी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest 2026 के दौरान OneTag सर्विस लॉन्च की। नई व्यवस्था में एक ही FASTag को अलग-अलग बैंकों के बीच पोर्ट किया जा सकेगा। यानी इसका तरीका कुछ हद तक मोबाइल SIM पोर्ट करने जैसा होगा।

अब बैंक बदलने पर नहीं बदलना पड़ेगा FASTag

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मौजूदा व्यवस्था में अगर कोई FASTag यूजर अपना बैंक बदलना चाहता था तो उसे पहले पुराने FASTag अकाउंट को बंद करना पड़ता था। इसके बाद नए बैंक के साथ दोबारा ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करनी होती थी और नया फिजिकल FASTag स्टिकर बनवाना पड़ता था।

यही प्रक्रिया अब FASTag OneTag के जरिए बदलने जा रही है। नई व्यवस्था में वाहन पर पहले से लगा FASTag स्टिकर ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। बैंक बदलने के लिए नया फिजिकल टैग जारी कराने की जरूरत नहीं होगी।

पुरानी व्यवस्था में क्या होता था?

  • पुराने FASTag अकाउंट को बंद करना पड़ता था।
  • नए बैंक के साथ दोबारा ऑनबोर्डिंग करनी होती थी।
  • नया फिजिकल FASTag बनवाना पड़ता था।
  • वाहन की विंडशील्ड पर नया स्टिकर लगाना पड़ता था।

OneTag के बाद क्या होगा?

  • पुराना फिजिकल FASTag स्टिकर बदले बिना बैंक बदला जा सकेगा।
  • एक ही FASTag अलग-अलग बैंकों के बीच पोर्टेबल होगा।
  • बैंक बदलने की जानकारी बैकएंड सिस्टम में अपडेट की जाएगी।
  • टोल प्लाजा पर FASTag इस्तेमाल करने का तरीका पहले जैसा रहेगा।

टोल प्लाजा पर नहीं होगा कोई बदलाव

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FASTag OneTag शुरू होने के बाद वाहन मालिकों को टोल प्लाजा पर कोई नई प्रक्रिया नहीं करनी होगी। टोल प्लाजा पर FASTag से टैक्स कटने का तरीका पहले की तरह ही रहेगा।वाहन को टोल पर रोककर कोई अतिरिक्त प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं होगी। FASTag की मदद से टोल कलेक्शन पहले की तरह जारी रहेगा।

नई व्यवस्था का बदलाव मुख्य रूप से बैकएंड में होगा। National Electronic Toll Collection (NETC) से जुड़े सिस्टम के जरिए नए बैंक की जानकारी अपडेट की जाएगी। इसका मतलब यह है कि वाहन मालिक को बैंक बदलने के बाद टोल प्लाजा पर अलग से जाकर FASTag में कोई बदलाव कराने की जरूरत नहीं होगी।

बैंक स्विच होगा, लेकिन टैग वही रहेगा

FASTag OneTag को आसान भाषा में समझें तो इसका मुख्य उद्देश्य FASTag के फिजिकल टैग को बैंक से अलग करना है। अभी बैंक बदलने की स्थिति में नया टैग लेने की जरूरत पड़ सकती थी, लेकिन नई पोर्टेबिलिटी व्यवस्था में फिजिकल स्टिकर को वही रखते हुए बैंक बदला जा सकेगा। यानी वाहन की विंडशील्ड पर लगा FASTag स्टिकर अपनी जगह रहेगा, जबकि संबंधित बैंक की जानकारी सिस्टम में बदल जाएगी।

इसी वजह से OneTag को मोबाइल SIM की तरह FASTag पोर्टेबिलिटी की दिशा में एक नई व्यवस्था के तौर पर देखा जा सकता है।

बार-बार नया टैग बनवाने की जरूरत कम होगी

सरकार को उम्मीद है कि FASTag OneTag की पोर्टेबिलिटी सुविधा से बार-बार नए फिजिकल FASTag बनाने की जरूरत कम होगी। मौजूदा व्यवस्था में बैंक बदलने के साथ नया टैग जारी करने की जरूरत पड़ सकती थी। इसके लिए टैग तैयार करने, उसे डिस्पैच करने और दोबारा जारी करने की प्रक्रिया होती थी। OneTag में वही फिजिकल FASTag इस्तेमाल किए जाने से इस तरह के री-इश्यू की जरूरत कम होने की उम्मीद है।

प्लास्टिक कचरे में भी कमी की उम्मीद

बार-बार नए फिजिकल टैग जारी नहीं करने से प्लास्टिक और अन्य संसाधनों की खपत कम हो सकती है। सरकार के मुताबिक, OneTag की पोर्टेबिलिटी सर्विस से पर्यावरण और संसाधनों दोनों की बचत की उम्मीद है। इसका एक फायदा यह भी होगा कि बैंक बदलने वाले FASTag यूजर्स को हर बार नया स्टिकर तैयार करवाने और वाहन पर लगाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।

क्या है RFID तकनीक?

FASTag के काम करने में RFID यानी Radio Frequency Identification तकनीक की अहम भूमिका होती है। यह एक वायरलेस तकनीक है, जिसमें रेडियो तरंगों के जरिए FASTag में लगी चिप से डेटा पढ़ा जाता है। इसी तकनीक के जरिए टोल प्लाजा पर वाहन के FASTag की पहचान की जाती है और टोल कलेक्शन की प्रक्रिया को बिना गाड़ी रोके पूरा करने में मदद मिलती है।

FASTag OneTag में फिजिकल FASTag को बदलने की बजाय बैंक से संबंधित जानकारी को सिस्टम के स्तर पर बदलने की व्यवस्था की जा रही है।

NETC क्या है और OneTag में इसकी क्या भूमिका है?

NETC यानी National Electronic Toll Collection एक इंटरऑपरेबल डिजिटल टोल कलेक्शन प्लेटफॉर्म है। इसे NPCI यानी National Payments Corporation of India ने विकसित किया है। NETC के जरिए देश के टोल प्लाजा, FASTag जारी करने वाले बैंक और वाहन मालिक डिजिटल टोल कलेक्शन नेटवर्क से जुड़े होते हैं। OneTag की नई व्यवस्था में भी बैकएंड सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बैंक बदलने के बाद नए बैंक की जानकारी सिस्टम में अपडेट की जाएगी, जबकि वाहन पर लगा FASTag वही रहेगा।

FASTag OneTag से आखिर क्या बदला?

इस पूरी व्यवस्था का सबसे अहम बदलाव बैंक बदलने की प्रक्रिया में है। पहले बैंक बदलने पर पुराने FASTag को बंद कर नया फिजिकल टैग लेने की जरूरत पड़ती थी। अब FASTag OneTag के जरिए एक ही टैग को अलग-अलग बैंकों के बीच पोर्ट करने की सुविधा दी जा रही है।

इसे इस तरह समझ सकते हैं:

पहले:
पुराना बैंक बंद → नया बैंक चुनें → दोबारा ऑनबोर्डिंग → नया FASTag स्टिकर।

OneTag में:
नया बैंक चुनें → FASTag पोर्ट करें → वही फिजिकल स्टिकर इस्तेमाल करें।

इस बदलाव से FASTag यूजर्स के लिए बैंक स्विच करने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। वहीं टोल प्लाजा पर वाहन से टोल कटने की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा।

ऐप से स्विच करने को लेकर क्या जानकारी है?

FASTag OneTag के जरिए बैंक स्विच करने की सुविधा का उल्लेख है, साफ तौर पर कहें तो FASTag OneTag का मूल बदलाव यही है—बैंक बदलिए, लेकिन गाड़ी की विंडशील्ड पर लगा FASTag स्टिकर बदलने की जरूरत नहीं होगी।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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