नीमच:मरीज किसी क्लिनिक में जिंदगी बचाने जाता है, लेकिन नीमच के ज्ञानोदय हॉस्पिटल में वह महज़ एक ‘कमाई का टारगेट’ बनकर रह जाता है। शुक्रवार शाम कैंट थाना क्षेत्र के कनावटी स्थित इस सेंटर में जो हुआ, वह कोई नई घटना नहीं है, बल्कि उस मेडिकल माफिया तंत्र का हिस्सा है, जहां मरीज की जान से ज्यादा बिल के मीटर पर फोकस होता है।
ग्राम जावी निवासी 68 वर्षीय प्रहलाद विटोल सामान्य चेकअप के लिए खुद बस में बैठकर पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही घंटों बाद ऑपरेशन थियेटर से उनकी लाश बाहर आई। मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर हुई।
मामूली सीने का दर्द और ‘मौत’ का फरमान

परिजनों, खासकर उनके बेटे भरत विटोल का सीधा आरोप है कि उनके पिता की हालत गंभीर नहीं थी। गुरुवार को सीने में हल्का दर्द महसूस होने पर वे खुद चलकर ज्ञानोदय हॉस्पिटल पहुंचे थे। यहां आते ही डॉक्टरों ने उन्हें ‘कैश काउ’ मान लिया। तुरंत ईसीजी, एंजियोग्राफी और दर्जनों टेस्ट लिख दिए गए।

रिपोर्ट आते ही वह स्क्रिप्ट पढ़ी गई, जो अक्सर मरीजों को डराने के लिए इस्तेमाल होती है— “दिल की तीन नसें ब्लॉक हैं, तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा।” परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर खतरे का खौफ दिखाकर दबाव बनाया।

साफ है कि जिस बुजुर्ग को शुक्रवार शाम 4 बजे ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया और जो खुद अपने पैरों पर चलकर अंदर गया था, वह कुछ ही देर बाद मृत घोषित कर दिया गया।
सर्दी-जुकाम पर 15-20 टेस्ट, 10 हजार की पक्की ‘वसूली’
यह कोई पहला मामला नहीं है जब इलाज के नाम पर हंगामा हुआ हो। ज्ञानोदय हॉस्पिटल का इतिहास ऐसे ‘कारनामों’ से भरा पड़ा है। यहां की व्यवस्था एक सोची-समझी रणनीति पर काम करती है। अगर कोई मरीज सर्दी-जुकाम जैसी छोटी बीमारी लेकर भी पहुंच जाए, तो डॉक्टर उसे हाथ लगाने से पहले 15-20 टेस्ट का पर्चा थमा देते हैं।
यानी, हर मरीज से कम से कम 7,000 से 10,000 रुपये ऐंठने का सीधा टारगेट सेट है। मरीज की असल बीमारी क्या है, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि उससे कितने टेस्ट करवाए जा सकते हैं।
मेडिकल स्टोर की मोनोपॉली: बाहर दवा खोजना मना है!
लूट का यह खेल सिर्फ टेस्ट तक सीमित नहीं है। यहां के डॉक्टर जो दवाइयां लिखते हैं, वे पूरे शहर के किसी भी मेडिकल स्टोर पर नहीं मिलतीं। मरीज और उसके परिजन मजबूरन इसी जगह के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने को विवश होते हैं।
हद तो तब हो जाती है जब इनके खुद के लिखे पर्चे की दवाइयां इनके अपने मेडिकल पर भी आउट ऑफ स्टॉक होती हैं। मरीज दर्द से तड़पता है और परिजन दवा के लिए भटकते रहते हैं। यह इलाज नहीं, बल्कि एक संगठित मेडिकल ब्लैकमेलिंग है।
क्या अब सील होगा यह सेंटर?
बुजुर्ग की मौत के बाद परिसर में जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ। कैंट थाना प्रभारी सौरभ शर्मा ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद परिजनों को शांत किया।
परिजनों ने ज्ञानोदय हॉस्पिटल को सील करने और दोषी डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शव को जिला अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। शनिवार को डॉक्टरों के एक पैनल द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा और पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन सिर्फ कागजी जांच कर मामले को रफा-दफा कर देगा, या फिर यहां चल रही इस खुली लूट और मौत के खेल पर हमेशा के लिए ताला लगेगा?
FAQs: ज्ञानोदय हॉस्पिटल विवाद
1. ज्ञानोदय हॉस्पिटल में बवाल क्यों हुआ?
शुक्रवार शाम को मामूली सीने के दर्द की शिकायत लेकर आए 68 वर्षीय बुजुर्ग प्रहलाद विटोल की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
2. परिजनों ने प्रबंधन पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिजनों का आरोप है कि मरीज खुद पैदल चलकर आया था, लेकिन डॉक्टरों ने डरा-धमका कर जबरन ऑपरेशन किया, जिससे उनकी जान चली गई।
3. क्या ज्ञानोदय हॉस्पिटल में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं?
हाँ, स्थानीय लोगों और मरीजों के अनुसार, पूर्व में भी यहां कई मौतों पर हंगामा हो चुका है। यहां छोटी बीमारियों पर भी अनावश्यक टेस्ट और महंगी दवाइयों के नाम पर वसूली के आरोप आम हैं।
4. अस्पताल में दवाइयों को लेकर क्या गड़बड़ी सामने आई है?
यहां के डॉक्टर ऐसी दवाइयां लिखते हैं जो शहर के अन्य मेडिकल स्टोर्स पर नहीं मिलतीं, जिससे मरीजों को मजबूरन यहीं के मेडिकल से महंगी कीमत पर दवा खरीदनी पड़ती है।
5. पुलिस ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
कैंट थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शव को जिला अस्पताल भेज दिया है। शनिवार को मेडिकल पैनल द्वारा शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा।
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