Gyanodaya Hospital प्रबंधन ने सुधीर चौहान की मौत पर दी सफाई: आरोपों को बताया निराधार और तथ्यहीन
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
10 मार्च 2026, (अपडेटेड 10 मार्च 2026, 5:33 अपराह्न IST)

नीमच: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बने सुधीर चौहान की मृत्यु के मामले में अब एक बड़ा आधिकारिक बयान सामने आया है। Gyanodaya Hospital के प्रबंधन ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि अस्पताल की छवि को जानबूझकर धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट्स के साथ यह साबित करने की कोशिश की है कि मरीज के उपचार में कोई कोताही नहीं बरती गई थी।

क्या थी घटना की असलियत?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीमच के इंदिरा नगर निवासी सुधीर पिता मनोहर लाल चौहान के साथ यह दुखद हादसा 02 मार्च 2026 की रात को हुआ था। परिजनों के अनुसार, सुधीर जब भगवानपुरा चौराहा पर थे, तब एक बेकाबू सांड (गाय) ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी थी। इस टक्कर से सुधीर के सिर में गंभीर चोटें आई थीं। घटना के तुरंत बाद उन्हें Gyanodaya Hospital की इमरजेंसी यूनिट में रात 9:38 बजे लाया गया।

Gyanodaya Hospital के रिकॉर्ड बताते हैं कि जब मरीज को अस्पताल लाया गया, तब उनकी स्थिति जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही थी। डॉक्टरों ने प्राथमिक जाँच में पाया कि मरीज पूरी तरह अचेत था और उसके मस्तिष्क में गंभीर चोट के लक्षण दिखाई दे रहे थे।

मेडिकल रिपोर्ट और क्रिटिकल कंडीशन का सच

Gyanodaya Hospital के विशेषज्ञों ने बताया कि मरीज का GCS (Glasgow Coma Scale) स्तर अत्यंत चिंताजनक था। चिकित्सीय भाषा में जब आँखों की पुतलियाँ पूरी तरह फैल जाती हैं और शरीर में कोई हलचल नहीं होती, तो वह ब्रेन डेथ या अत्यंत गंभीर हेड इंजरी की ओर इशारा करता है। सुधीर के कान से भी खून बह रहा था, जो कि खोपड़ी के आधार (Base of Skull) में फ्रैक्चर का संकेत था।

Gyanodaya Hospital के मैनेजमेंट ने कहा,

“हमने परिजनों को पहले ही पल स्पष्ट कर दिया था कि मरीज की जान को भारी खतरा है। हमने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी क्योंकि मस्तिष्क में सूजन (Cerebral Edema) बढ़ रही थी। परिजनों ने स्थिति को समझा और अपनी लिखित स्वीकृति प्रदान की, जिसके बाद ही सर्जरी की प्रक्रिया शुरू की गई।”

ऑपरेशन और ICU में किए गए अथक प्रयास

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि मस्तिष्क के अंदरूनी हिस्से में काफी रक्त जमा था और सूजन अत्यधिक थी। ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट के साथ ICU में शिफ्ट किया गया। Gyanodaya Hospital के स्टाफ का दावा है कि उन्होंने मरीज को बचाने के लिए हर संभव आधुनिक चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया। अस्पताल ने साफ तौर पर कहा कि उपचार के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही का सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि पूरी प्रक्रिया मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत की गई थी।

आयुष्मान कार्ड और 15,000 रुपये का विवाद

अस्पताल पर लग रहे आर्थिक आरोपों पर सफाई देते हुए प्रबंधन ने बताया कि 02 मार्च को भर्ती के समय परिजनों ने आयुष्मान योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। आपातकालीन स्थिति में जाँचों और दवाइयों के लिए 15,000 रुपये बतौर सुरक्षा निधि जमा कराए गए थे।

अगले दिन यानी 03 मार्च 2026 को जब परिजनों ने सुधीर के आयुष्मान कार्ड की जानकारी दी, तो अस्पताल ने बिना किसी देरी के मरीज का केस आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पंजीकृत कर लिया। Gyanodaya Hospital ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा निधि का उपयोग केवल उन खर्चों के लिए किया गया जो योजना के दायरे से बाहर या तत्काल अनिवार्य थे।

“बदनाम करने की कोशिश”: प्रबंधन का कड़ा रुख

सुधीर चौहान की दुखद मृत्यु के बाद कुछ स्थानीय लोगों और तथाकथित तत्वों द्वारा अस्पताल के बाहर किए गए विरोध प्रदर्शन को प्रबंधन ने “सुनियोजित साजिश” करार दिया है। Gyanodaya Hospital के अधिकारियों का कहना है कि परिजनों को कुछ लोगों द्वारा भड़काया गया है, जिससे वे अस्पताल के खिलाफ भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी फैला रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की निष्पक्ष जाँच की मांग की है ताकि सच जनता के सामने आ सके। उन्होंने कहा कि एक प्रतिष्ठित संस्थान को बिना प्रमाण के बदनाम करना स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों के मनोबल को गिराने जैसा है। नीमच के इस मामले ने एक बार फिर शहर में आवारा पशुओं की समस्या और निजी अस्पतालों के सुरक्षा प्रोटोकॉल पर चर्चा छेड़ दी है।


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Aakash Sharma
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