नीमच। नीमच जिले में किशोरी अपहरण का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। सिटी थाना क्षेत्र के ठीकरिया गांव से करीब 9 दिन पहले लापता हुई 16 वर्षीय किशोरी की बरामदगी नहीं होने से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को यह आक्रोश हिंसा में बदल गया, जहां दो गांवों के लोगों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई और एक झोपड़ी को आग के हवाले कर दिया गया।
घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
घटना की शुरुआत
इस किशोरी अपहरण मामले की शुरुआत 19 अप्रैल की रात से हुई, जब ठीकरिया गांव की 16 वर्षीय किशोरी अचानक गायब हो गई। परिजनों ने तुरंत इस घटना को संदिग्ध मानते हुए जोरावरपुरा निवासी पिंटू गरासिया पर अपहरण का आरोप लगाया।
परिवार की शिकायत पर सिटी थाना नीमच में मामला दर्ज किया गया, लेकिन समय बीतने के बावजूद पुलिस को कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई।
पंचायत का भरोसा, लेकिन नतीजा शून्य
मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए समाज की पंचायत बुलाई गई। पंचायत में यह आश्वासन दिया गया कि एक सप्ताह के भीतर किशोरी को सुरक्षित वापस लाया जाएगा।
ग्रामीणों ने इस भरोसे पर संयम बनाए रखा, लेकिन जब तय समयसीमा पूरी हो गई और कोई प्रगति नहीं हुई, तो नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। यहीं से किशोरी अपहरण मामला संवेदनशील बन गया।
दोपहर में बिगड़े हालात
मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे जैसे ही पंचायत की मोहलत खत्म हुई, ठीकरिया और आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में टाटियाखेड़ी पहुंचे। शुरुआत में विरोध-प्रदर्शन हुआ, लेकिन माहौल जल्दी ही तनावपूर्ण हो गया।
दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ा और देखते ही देखते पत्थरबाजी शुरू हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।
आगजनी की घटना
इस किशोरी अपहरण मामले में उग्र भीड़ ने गांव के बाहर बनी एक झोपड़ी को आग के हवाले कर दिया। आगजनी के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग डर के कारण अपने घरों में छिपने को मजबूर हो गए।
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे। दमकल की मदद से आग पर काबू पाया गया, लेकिन झोपड़ी पूरी तरह जल चुकी थी।
पुलिस की तैनाती और कार्रवाई
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किशोरी अपहरण मामले में जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। साथ ही हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस पर उठे सवाल
इस पूरे किशोरी अपहरण मामले में पुलिस की धीमी कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पुलिस ने समय रहते गंभीरता दिखाई होती, तो यह स्थिति नहीं बनती।
परिजनों का कहना है कि 9 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस जानकारी न मिलना चिंता का विषय है।
प्रशासन के सामने चुनौती
अब यह मामला केवल एक किशोरी अपहरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बन गया है। प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—पहली, किशोरी को सुरक्षित ढूंढ़ना और दूसरी, क्षेत्र में शांति बनाए रखना।
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