रतनगढ़ | कोटा से बांसवाड़ा जा रही राजस्थान रोडवेज की बस RJ 02 PA 8775 रतनगढ़ के घाट क्षेत्र में गंभीर हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई। बस के पिछले हिस्से के एक टायर के सभी बोल्ट निकलने से पहिया फ्री हो गया, जबकि दूसरे टायर के पंचर होने की जानकारी सामने आई है। घटना के समय बस में करीब 65 से 70 यात्री सवार बताए गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घाट क्षेत्र में बस के लहराने के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। समय रहते बस को रोक लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद यात्रियों को उनका किराया वापस किया गया और बस को खाली हालत में धीरे-धीरे नीमच की ओर ले जाने की जानकारी सामने आई है।
घाट में उतरते समय निकले पहिए के बोल्ट

राजस्थान रोडवेज की यह बस प्रतिदिन कोटा से बांसवाड़ा के बीच करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करती है। आरोप है कि बस को पर्याप्त तकनीकी और मैकेनिकल जांच के बिना सड़क पर संचालित किया जा रहा था। बस के टायरों के घिसे होने की बात भी सामने आई है। रतनगढ़ के घाट क्षेत्र में बस नीचे की ओर उतर रही थी। इसी दौरान बस के पिछले हिस्से के एक टायर के सभी बोल्ट निकल गए और पहिया पूरी तरह फ्री हो गया। दूसरी ओर एक अन्य टायर के पंचर होने की जानकारी भी सामने आई।
शुरुआत में चालक और परिचालक को इसकी जानकारी नहीं हुई। इसी दौरान सिंगोली की ओर जा रहे शिक्षक रमेश वर्मा की नजर बस के टायर पर पड़ी।
शिक्षक ने ओवरटेक कर चालक को किया सतर्क
रमेश वर्मा ने बस चालक को आवाज लगाकर स्थिति से अवगत कराने का प्रयास किया। जब चालक का ध्यान तत्काल नहीं गया तो उन्होंने बस को ओवरटेक किया और आगे जाकर चालक को टायर की स्थिति के बारे में बताया। इसी दौरान बस के लहराने की बात सामने आई। बस में मौजूद यात्रियों को जब स्थिति का अंदाजा हुआ तो उनमें डर का माहौल बन गया और यात्री चिल्लाने लगे।
यात्रियों के शोर के बाद चालक और परिचालक को स्थिति की गंभीरता का पता चला। उस समय तक बस रतनगढ़ बस स्टैंड के कॉर्नर तक पहुंच चुकी थी। इसके बाद बस को रोक दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- घाट के शुरुआती हिस्से में होता तो खतरा बढ़ सकता था
एडवोकेट ओमप्रकाश मूंदड़ा ने घटना को अपनी आंखों से देखने की बात कही। वे अपनी बेटियों को छोड़ने के लिए बस स्टैंड आए थे। मूंदड़ा के अनुसार, यदि घाट उतरने के शुरुआती हिस्से में ही पहिया बाहर निकल जाता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। उन्होंने कहा कि तेज गति की स्थिति में बस के खाई में जाने की आशंका पैदा हो सकती थी और उस समय बस में 65 से 70 यात्री मौजूद थे।
उनके मुताबिक, यह राहत की बात रही कि समय रहते बस को रोक लिया गया और बड़ा हादसा टल गया।
कोटा डिपो प्रबंधक से हुई बात
कोटा-बांसवाड़ा बस हादसा सामने आने के बाद एडवोकेट ओमप्रकाश मूंदड़ा ने कोटा डिपो के प्रबंधक अजय मीणा से मोबाइल पर चर्चा की। उन्होंने घटना की पूरी जानकारी देते हुए कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। दी गई जानकारी के अनुसार, डिपो प्रबंधक अजय मीणा ने लापरवाही को स्वीकार करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
दो घंटे प्रयास के बाद भी नहीं हो सकी व्यवस्था
घटना के बाद बस को ठीक करने के प्रयास किए गए। जानकारी के मुताबिक, दो घंटे से अधिक समय तक प्रयास करने के बावजूद बस की स्टेपनी ठीक तरह से सेट नहीं हो सकी।इसके बाद बस में मौजूद यात्रियों को उनका किराया वापस कर दिया गया। यात्रियों को उतारने के बाद खाली बस को धीरे-धीरे नीमच की ओर ले जाया गया। इस घटना ने राजस्थान रोडवेज की बसों की तकनीकी जांच और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर लंबी दूरी तय करने वाली बसों के टायर, पहियों और अन्य तकनीकी हिस्सों की नियमित जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब कार्रवाई पर नजर
कोटा-बांसवाड़ा बस हादसा भले ही बड़े नुकसान के बिना टल गया, लेकिन घटना ने बसों की फिटनेस और तकनीकी जांच को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े किए हैं। वरिष्ठजनों ने मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और लापरवाही सामने आने पर संबंधित कर्मचारियों एवं अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
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