Mandsaur Leopard Rescue: 4 घंटे की दहशत और गलियों में दौड़ता मौत का साया, जानिए कैसे पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
17 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 17 दिसम्बर 2025, 2:21 अपराह्न IST)

मंदसौर (मध्य प्रदेश): शहर की शांत फिजा उस वक्त खौफ के साये में बदल गई, जब मंगलवार की सुबह रिहायशी इलाके में एक तेंदुआ (Leopard) खुलेआम घूमता हुआ नजर आया। Mandsaur Leopard Rescue का यह ऑपरेशन करीब 4 घंटे तक चला, जिसने शहरवासियों की सांसें थाम दी थीं। सीसीटीवी में कैद हुई तस्वीरों और प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों देखी हाल ने हर किसी को सिहरने पर मजबूर कर दिया।

सुबह 8 बजे: जब गलियों में दिखा मौत का साया

Mandsaur Leopard Rescue घटना मंदसौर के संजीत नाका क्षेत्र की है। सुबह के करीब 8 बज रहे थे, लोग अपनी दिनचर्या शुरू ही कर रहे थे कि मयूर कॉलोनी की गलियों में एक तेज रफ्तार जानवर दौड़ता हुआ दिखाई दिया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, सीसीटीवी फुटेज ने पुष्टि कर दी कि यह कोई और नहीं बल्कि एक व्यस्क तेंदुआ है।

तेंदुए की खबर जंगल में आग की तरह फैली। दहशत का आलम यह था कि लोग अपने घरों के दरवाजे-खिड़कियां बंद कर दुबक गए। इसी बीच, तेंदुआ कॉलोनी में स्थित एक निर्माणाधीन (Under-construction) मकान में जा घुसा और वहीं एक कोने में जाकर बैठ गया। यह वही पल था जब प्रशासन के लिए चुनौती और भी बढ़ गई थी।

पुलिस की घेराबंदी और छतों पर चढ़ा हुजूम

Mandsaur Leopard Rescue सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और जिस निर्माणाधीन मकान में तेंदुआ छुपा था, उस पूरी गली को सील कर दिया गया। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी। हालांकि, डर के साथ-साथ लोगों में कौतूहल भी था। आसपास के सैकड़ों लोग अपनी छतों पर चढ़ गए और Mandsaur Leopard Rescue ऑपरेशन को देखने लगे।

भीड़ को नियंत्रित करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि शोर-शराबे से तेंदुआ आक्रामक हो सकता था और किसी पर भी हमला कर सकता था।

वन विभाग का ‘ऑपरेशन साइलेंट’

वन विभाग की टीम को तुरंत सूचित किया गया। रेस्क्यू टीम अपने साथ जाल, पिंजरा और ट्रेंकुलाइजर गन (Tranquilizer Gun) लेकर पहुंची। वन विभाग के अधिकारियों ने स्थिति का मुआयना किया और पाया कि तेंदुआ जिस जगह बैठा है, वहां से उसे पकड़ना आसान नहीं है।

टीम ने बेहद सावधानी से ‘ऑपरेशन साइलेंट’ शुरू किया। सबसे पहले यह सुनिश्चित किया गया कि तेंदुआ बाहर की तरफ न भागे। इसके बाद, एक्सपर्ट्स ने ट्रेंकुलाइजर गन को लोड किया। एक सधी हुई निशानी के साथ तेंदुए को बेहोश करने वाला इंजेक्शन (Dart) दागा गया।

बेहोशी और पिंजरे का सफर

डार्ट लगने के कुछ देर बाद तेंदुए की हरकतें धीमी पड़ने लगीं। जब टीम पूरी तरह आश्वस्त हो गई कि तेंदुआ बेहोश हो चुका है, तब वे सावधानीपूर्वक उसके पास पहुंचे। यह एक जोखिम भरा कदम था, क्योंकि कई बार जानवर पूरी तरह बेहोश नहीं होता और हमला कर देता है।

वन विभाग के कर्मचारियों ने बेहोश तेंदुए को उठाया और सुरक्षित तरीके से पिंजरे में डाल दिया। जैसे ही तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ, वहां मौजूद पुलिस प्रशासन और कॉलोनी के लोगों ने राहत की सांस ली। Mandsaur Leopard Rescue का यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और किसी भी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं?

मंदसौर और उसके आसपास के इलाकों में रिहायशी क्षेत्रों में जंगली जानवरों का आना अब आम होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का घटता दायरा और भोजन-पानी की तलाश जानवरों को शहरों की ओर धकेल रही है। यह घटना प्रशासन के लिए एक अलार्म बेल है कि वन्यजीवों और इंसानों के बीच के इस संघर्ष को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

फिलहाल, वन विभाग की टीम तेंदुए को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर रवाना हो गई है, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उसे घने जंगल में छोड़ दिया जाएगा।


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Aakash Sharma
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