नीमच। सहकारी बैंक कर्मचारियों ने सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन को लेकर सवाल उठाते हुए न्यूनतम ₹7500 प्रतिमाह पेंशन और महंगाई भत्ता (डीए) देने की मांग दोहराई है। कर्मचारियों के अनुसार, सेवा अवधि में पेंशन के नाम पर बड़ी राशि की कटौती के बावजूद रिटायरमेंट के बाद औसतन करीब ₹1175 प्रतिमाह पेंशन मिल रही है।
नीमच कैंट स्थित मराठा हॉल में जिला सहकारी बैंक कर्मचारी संघ की वार्षिक साधारण सभा आयोजित हुई। सभा में वार्षिक बजट और संगठनात्मक विषयों के साथ सहकारी बैंक कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बैठक में शाखा प्रबंधकों, सुपरवाइजरों और राष्ट्रीय संघर्ष समिति के सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया था।
पेंशन को लेकर कर्मचारियों का क्या कहना है?
राष्ट्रीय संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष डॉ. बृजेंद्र प्रसाद शर्मा के अनुसार, पेंशन का मुद्दा नीमच में वर्ष 2009 से संगठन स्तर पर उठाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय संघर्ष समिति भी पिछले करीब 8 से 10 वर्षों से ऐसे कर्मचारियों के लिए संघर्ष कर रही है, जिन्हें वर्तमान में नाममात्र की पेंशन मिल रही है। कर्मचारियों के अनुसार, सेवा अवधि के दौरान पेंशन के नाम पर कई कर्मचारियों से एक लाख, डेढ़ लाख और यहां तक कि दो लाख रुपये तक की राशि काटी गई। इसके बावजूद रिटायरमेंट के बाद औसतन करीब ₹1175 प्रतिमाह पेंशन मिलने की बात कही गई है।
कर्मचारियों का सवाल है कि लंबी सेवा अवधि और पेंशन के लिए किए गए अंशदान के बाद मिलने वाली इतनी कम राशि वर्तमान समय में किस तरह पर्याप्त मानी जा सकती है।
₹7500 पेंशन और डीए की मांग
सभा में कर्मचारियों ने न्यूनतम ₹7500 प्रतिमाह पेंशन के साथ डीए देने की मांग रखी। संगठन की ओर से कहा गया कि वर्तमान में न्यूनतम पेंशन करीब एक हजार रुपये के स्तर पर होने के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानी की स्थिति बनती है।
पेंशन बढ़ाने के साथ कर्मचारियों ने अन्य मांगें भी रखीं। इनमें प्रमुख रूप से:
- न्यूनतम ₹7500 प्रतिमाह पेंशन प्लस डीए की मांग।
- पति-पत्नी को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग।
- सभी पात्र कर्मचारियों को पेंशन का लाभ देने की मांग।
- पेंशन से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए संघर्ष जारी रखने की बात।
2009 से उठ रहा है पेंशन का मुद्दा
राष्ट्रीय संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष डॉ. बृजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि नीमच में यह मुद्दा वर्ष 2009 से संगठन स्तर पर उठाया जा रहा है। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय संघर्ष समिति भी लंबे समय से पेंशन से संबंधित मांगों को लेकर प्रयास कर रही है। संगठन का कहना है कि पेंशन के नाम पर कटौती और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली कम राशि के बीच अंतर को लेकर कर्मचारियों में असंतोष है। इसी को देखते हुए न्यूनतम पेंशन में सम्मानजनक बढ़ोतरी की मांग की जा रही है।
नीमच से दिल्ली तक आंदोलन की तैयारी
सभा में दिल्ली में चल रही पेंशन संबंधी कार्रवाई और आगामी आंदोलन को लेकर भी चर्चा की गई। संगठन की ओर से संकेत दिया गया कि यदि मांगों का समाधान नहीं होता है तो कर्मचारी दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी करेंगे। जिला सहकारी बैंक कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष संभाजीराव जाधव और राष्ट्रीय संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष डॉ. बृजेंद्र प्रसाद शर्मा ने कहा कि पेंशन से जुड़े मुद्दों का समाधान होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
वार्षिक सभा में आंदोलन की रणनीति पर भी मंथन
रविवार को हुई यह बैठक केवल वार्षिक बजट और संगठनात्मक विषयों तक सीमित नहीं रही। सभा में सहकारी बैंक कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े मुद्दे और आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों की ओर से उठाया गया मुख्य सवाल सेवा अवधि के दौरान पेंशन के नाम पर हुई कथित कटौती और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली कम पेंशन को लेकर है। संगठन अब न्यूनतम ₹7500 पेंशन और डीए सहित अन्य मांगों को लेकर अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की बात कह रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
कर्मचारियों द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों से सेवा अवधि में पेंशन के नाम पर ₹1 लाख से ₹2 लाख तक की राशि काटे जाने का दावा किया गया है, जबकि औसत मासिक पेंशन करीब ₹1175 बताई गई है। यही अंतर इस पूरे मुद्दे का केंद्र बना हुआ है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन इतनी कम है कि उससे वर्तमान समय की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल है। इसी आधार पर संगठन न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहा है। जानकारी के अनुसार, सभा में कर्मचारियों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए आगामी आंदोलन में भागीदारी का संकेत दिया है।
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